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अभिमान की समाप्ति पर ही मिलते हैं परमात्मा-स्वामी लक्ष्मणाचार्य

श्रीकृष्ण जन्मोत्सव व् गजेन्द्र मोक्ष कथा से भावविभोर हुए श्रद्धालु, उमड़ा जनसैलाब

अवध किशोर शर्मा/सारण (बिहार)। सारण जिला के हद में विश्व प्रसिद्ध हरिहर क्षेत्र सोनपुर के साधु गाछी स्थित श्रीगजेन्द्र मोक्ष देवस्थानम में चल रहे श्रीमद्भागवत सप्ताह ज्ञान यज्ञ के चौथे दिन 20 मई को श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी।

इस अवसर पर जगद्गुरु रामानुजाचार्य स्वामी लक्ष्मणाचार्यजी महाराज ने उपस्थित भक्तों को संबोधित करते हुए सर्वप्रथम गजेन्द्र मोक्ष की मार्मिक कथा सुनाई। उन्होंने कहा कि भागवत महापुराण में वर्णित यह कथा हर कल्प जीव को अहंकार मुक्ति का संदेश देती है।

​स्वामीजी ने गजेन्द्र मोक्ष प्रसंग की व्याख्या करते हुए कहा कि जब तक हाथी के पास अपना शारीरिक बल था, वह अभिमान में चूर था। लेकिन जब जल के भीतर पूर्व जन्म के शत्रु (ग्राह) ने उसे खींचा, तो उसके तमाम सगे-संबंधी भी उसे बचा नहीं सके। कहा कि जब जीवात्मा अपने सारे प्रयास हारकर, सर्वतोभावेन समर्पित होकर भगवान को पुकारती है, तभी परमात्मा का प्राकट्य होता है। हाथी का अभिमान समाप्त होते ही भगवान प्रकट हुए और उन्होंने न केवल गजराज को बचाया, बल्कि अपने भक्त के चरण पकड़ने वाले ग्राह को पहले मोक्ष प्रदान किया।

​कथा के क्रम को आगे बढ़ाते हुए स्वामीजी ने समुद्र मंथन, बलि-वामन चरित्र और प्रभु श्रीराम के जन्मोत्सव का जीवंत वर्णन किया। इसके पश्चात श्रीकृष्ण जन्म की कथा सुनाते हुए उन्होंने कहा कि जब-जब देश और समाज पर आसुरी शक्तियां हावी होती हैं और पापों में अतिशय वृद्धि होती है, तब-तब परमात्मा का अवतार होता है। ​अवतार का उद्देश्य भगवान संतों की रक्षा, उन्हें सद्गति देने और कंस जैसे दुष्टों का संहार करने के लिए धरा पर आते हैं।

सोहर और बधाई गीतों से गूंजा पंडाल, आज होगा विवाह महोत्सव

​इस पावन अवसर पर पंडाल में बलि-वामन लीला और श्रीकृष्ण प्राकट्य उत्सव की मनमोहक झांकियों के दर्शन कराए गए। बाल कृष्ण के प्रकट होते ही उपस्थित माताओं ने मंगल सोहर और बधाई गीत गाए, जिससे पूरा माहौल आनंदमय हो गया।

​वैदिक विद्वानों के मंत्रोच्चारण के बीच श्रीमद्भागवत की महाआरती की गई, जिसके बाद भक्तों के बीच प्रसाद वितरण और भंडारे का आयोजन किया गया। यज्ञ समिति के सदस्यों ने बताया कि यज्ञ के पांचवें दिन प्रभु के विवाह महोत्सव की दिव्य कथा और लीला का आयोजन किया जाएगा। इसके साथ ही चौथे दिन की कथा को विश्राम दिया गया।

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