आगामी 9 अक्टूबर को जीआर राशि का होगा डीबीटी ट्रांसफर
अवध किशोर शर्मा/सारण (बिहार)। आपदा प्रबंधन विभाग बिहार की राजधानी पटना में 30 सितंबर को मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत की अध्यक्षता में राज्य के बाढ़ प्रभावित एवं संवेदनशील जिलों में राहत-बचाव कार्यों की समीक्षा के लिए वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गयी।
जानकारी के अनुसार उक्त बैठक में पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, सारण, वैशाली, मुजफ्फरपुर, दरभंगा, सुपौल और सहरसा के जिलाधिकारी ऑनलाइन जुड़े। साथ हीं आपदा प्रबंधन विभाग के प्रधान सचिव संतोष कुमार मल्ल भी मौजूद रहे। बैठक में बिहार के उपरोक्त नौ जिलों में बाढ़ की वर्तमान स्थिति, तटबंधों की स्थिति, राहत शिविर, सामुदायिक रसोई, नावों के परिचालन और राहत सामग्री वितरण की विस्तृत समीक्षा की गई। जिलाधिकारियों ने अपने-अपने जिलों की अद्यतन रिपोर्ट प्रस्तुत की।
मुख्य सचिव ने निर्देश दिया कि प्रशासन पूरी संवेदनशीलता और तत्परता के साथ प्रभावित परिवारों तक सहायता पहुंचाए। तटबंधों की निरंतर निगरानी और संवेदनशील स्थलों पर विशेष सतर्कता बरती जाए। मुख्य सचिव ने बताया कि बाढ़ प्रभावित परिवारों को दी जाने वाली जीआर राशि का अंतरण मुख्यमंत्री द्वारा आगामी 9 अक्टूबर को डीबीटी के माध्यम से किया जाएगा। सभी जिलाधिकारियों को पात्र लाभुकों की सूची और अन्य तैयारियां समय पर पूरी करने का निर्देश दिया गया।
ज्ञात हो कि वर्तमान में 6 राहत शिविरों का संचालन किया जा रहा है, जहां 3550 बाढ़ पीड़ितों के लिए आवासन, भोजन और चिकित्सा की व्यवस्था है। बाढ़ प्रभावितों के लिए 100 सामुदायिक रसोई केंद्रों के माध्यम से अब तक 1.40 लाख रहिवासियों को भोजन कराया गया है। मुख्य सचिव ने शिविरों में भोजन, पेयजल, स्वच्छता और अन्य सुविधाएं नियमित रूप से उपलब्ध कराने तथा सामुदायिक रसोई की संख्या और बढ़ाने का निर्देश दिया।
कहा गया कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्र के रहिवासी आबादी के निष्क्रमण और आवागमन के लिए 221 नावों का परिचालन कराया जा रहा है। आवश्यकता वाले क्षेत्रों में और नावें उपलब्ध कराने को कहा गया है। कहा गया कि अब तक 2400 से अधिक ड्राई राशन पैकेट और 10400 पॉलीथिन शीट का वितरण किया जा चुका है। पशुपालकों के लिए पर्याप्त पशुचारा वितरण सुनिश्चित करने का भी निर्देश दिया गया। इस अवसर पर मुख्य सचिव ने सभी जिलाधिकारियों को जिला स्तर पर विभागों के साथ समन्वय बनाकर राहत कार्यों की सतत निगरानी और नियमित समीक्षा करने को कहा।
![]()













Leave a Reply