रंजन वर्मा/कसमार (बोकारो)। बच्चों एवं महिलाओं में पोषण के प्रति जागरूकता बढ़ाने तथा स्थानीय खाद्य सामग्रियों के महत्व को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से 9वें राष्ट्रीय पोषण माह के तहत 30 सितंबर को बोकारो जिले में पौष्टिक व्यंजन प्रतियोगिता का आयोजन किया गया।
प्रतियोगिता में जिले के विभिन्न प्रखंडों एवं शहरी क्षेत्रों से प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया। इस दौरान स्थानीय स्तर पर उपलब्ध खाद्य सामग्रियों से तैयार पौष्टिक व्यंजनों की आकर्षक प्रस्तुति की गई।
मौके पर प्रतिभागियों ने अपने व्यंजनों के माध्यम से यह संदेश दिया कि स्थानीय और पारंपरिक खाद्य पदार्थों को दैनिक आहार में शामिल कर बेहतर पोषण सुनिश्चित किया जा सकता है। प्रतियोगिता में बेरमो, कसमार एवं नावाडीह को संयुक्त रूप से प्रथम पुरस्कार प्रदान किया गया। वहीं, पेटरवार, चंद्रपुरा, चंदनकियारी एवं जरीडीह ने संयुक्त रूप से द्वितीय स्थान प्राप्त किया। जबकि गोमिया, चास सिटी एवं चास रूरल को संयुक्त रूप से तृतीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

राष्ट्रीय पोषण माह के कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य समाज में कुपोषण की रोकथाम, संतुलित आहार के प्रति जागरूकता तथा स्थानीय खाद्य पदार्थों के उपयोग को प्रोत्साहित करना रहा। प्रतियोगिता में तैयार किए गए व्यंजनों में स्थानीय स्तर पर आसानी से उपलब्ध खाद्य सामग्रियों के इस्तेमाल पर विशेष जोर दिया गया। इसके माध्यम से यह संदेश देने का प्रयास किया गया कि पौष्टिक भोजन के लिए महंगी खाद्य सामग्री आवश्यक नहीं है, बल्कि स्थानीय अनाज, हरी सब्जियों, दालों और अन्य पारंपरिक खाद्य पदार्थों के समुचित उपयोग से भी संतुलित आहार तैयार किया जा सकता है।
इस अवसर पर बोकारो जिला उपायुक्त अजय नाथ झा ने पोषण के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि बच्चों का स्वस्थ शारीरिक एवं मानसिक विकास सुनिश्चित करने के लिए संतुलित और पौष्टिक आहार अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने स्थानीय खाद्य सामग्रियों के उपयोग को बढ़ावा देने तथा पोषण संबंधी जागरूकता को समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
उप विकास आयुक्त शताब्दी मजूमदार ने भी पोषण माह के उद्देश्यों को रेखांकित करते हुए महिलाओं और बच्चों के पोषण स्तर में सुधार के लिए सामुदायिक भागीदारी को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने स्थानीय स्तर पर उपलब्ध पौष्टिक खाद्य पदार्थों को भोजन में शामिल करने और पोषण संबंधी अच्छी आदतों को परिवारों तक पहुंचाने की आवश्यकता पर बल दिया।
स्थानीय खाद्य पदार्थों को बढ़ावा देने की पहल
राष्ट्रीय पोषण माह के तहत आयोजित इस प्रतियोगिता ने स्थानीय खाद्य सामग्रियों की पौष्टिकता और उपयोगिता को प्रदर्शित करने का अवसर प्रदान किया। प्रतिभागियों ने विभिन्न प्रकार के व्यंजन तैयार कर यह दिखाया कि पारंपरिक खान-पान को अपनाकर भी स्वादिष्ट और पौष्टिक भोजन बनाया जा सकता है। कार्यक्रम के माध्यम से समाज में यह संदेश दिया गया कि कुपोषण की रोकथाम केवल सरकारी प्रयासों से संभव नहीं है, बल्कि इसके लिए परिवार, समाज और सामुदायिक संस्थाओं की सक्रिय भागीदारी भी जरूरी है।

विशेष रूप से गर्भवती महिलाओं, धात्री माताओं और छोटे बच्चों के पोषण पर ध्यान देने की आवश्यकता बताई गई।
प्रतियोगिता में विभिन्न प्रखंडों की भागीदारी और प्रतिभागियों की रचनात्मक प्रस्तुति ने पोषण जागरूकता के संदेश को प्रभावी ढंग से सामने रखा। स्थानीय खाद्य पदार्थों को प्रोत्साहित करने की यह पहल स्वस्थ समाज के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण संदेश देती है।
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