रंजन वर्मा/कसमार (बोकारो)। झारखंड बिजली वितरण निगम लिमिटेड (जेबीवीएनएल) की बिलिंग व्यवस्था का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। बोकारो जिला के हद में कसमार प्रखंड के ग्राम गर्री रहिवासी गणेश महतो को विभाग ने ₹37,06,668 ( 37 लाख रुपये से अधिक) का बिजली बिल भेज दिया है। बिल देखते ही उपभोक्ता और आसपास के रहिवासी हैरान रह गए।
पीड़ित के अनुसार जारी बिल में 26 जनवरी 2026 से 29 अप्रैल 2026 के बीच 50,05,980 यूनिट बिजली खपत दर्शाई गई है। किसी सामान्य घरेलू उपभोक्ता के लिए इतनी बिजली की खपत व्यावहारिक रूप से असंभव मानी जाती है।
पीड़ित उपभोक्ता का कहना है कि मार्च 2026 में पूर्व का पूरा बिजली बिल जमा कर दिया गया था, इसके बावजूद विभाग ने अचानक लाखों रुपये का नया बिल जारी कर दिया। ऐसे में विभाग की बिलिंग प्रणाली और मीटर रीडिंग प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
स्थानीय रहिवासियों का कहना है कि यदि समय रहते ऐसी त्रुटियों को नहीं सुधारा गया तो आम उपभोक्ताओं का विभाग पर से भरोसा उठ जाएगा। कहा गया कि गलत बिल के कारण उपभोक्ताओं को आर्थिक और मानसिक परेशानी झेलनी पड़ती है।
सवाल यह है कि आखिर 37 लाख रुपये का बिल किस आधार पर बना? क्या यह सॉफ्टवेयर की तकनीकी गड़बड़ी है, मीटर रीडिंग की भारी भूल है या विभागीय लापरवाही? उपभोक्ता ने विभाग से बिल की तत्काल जांच कर सही बिल जारी करने और इस गंभीर लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की है। विभाग द्वारा उपलब्ध बिजली बिल की प्रति में कुल देय राशि ₹37,06,668 दर्ज है। वहीं उपभोक्ता का दावा है कि पूर्व का बिल पहले ही जमा किया जा चुका था। विभाग का कहना है मिस बील चल गया होगा बील में सुधार हो जायेगा।
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