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प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता ने की गढ़वा के बुल्का गांव की घटना की उच्चस्तरीय जांच की मांग

एस. पी. सक्सेना/रांची (झारखंड)। झारखंड में वन अधिकार कानून की अनदेखी कर दलित एवं वनाश्रित परिवारों को बेघर करना स्वीकार्य नहीं है। गढ़वा के बुल्का गांव की घटना की उच्चस्तरीय जांच हो, दोषी अधिकारियों पर हो कार्रवाई तथा पात्र परिवारों को तत्काल वन अधिकार पट्टा मिले। उक्त बाते प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता विजय शंकर नायक ने 16 जुलाई को कही।

उन्होंने कहा कि गढ़वा जिला के हद में रमना थाना क्षेत्र अंतर्गत बुल्का गांव के दलित एवं वनाश्रित परिवारों के प्रतिनिधिमंडल ने 16 जुलाई को रांची में उनसे मुलाकात कर वन अधिकार अधिनियम, 2006 के कथित उल्लंघन, बेदखली एवं आवास ध्वस्तीकरण से संबंधित शिकायत सौंपी। प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि वे वर्षों से उक्त भूमि पर निवासरत हैं तथा वन अधिकार अधिनियम के तहत अपने वैधानिक अधिकारों के लिए आवेदन भी कर चुके हैं। इसके बावजूद उन्हें वन अधिकार पट्टा उपलब्ध कराने के बजाय उनके घरों को तोड़ा जा रहा है तथा उन्हें बेघर किया जा रहा है।

मामले पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए प्रदेश प्रवक्ता विजय शंकर नायक ने कहा कि यदि पात्र दलित एवं वनाश्रित परिवारों के दावों का निस्तारण किए बिना उनके आशियानों पर कार्रवाई की गई, तो यह वन अधिकार अधिनियम, 2006 की भावना तथा संविधान के सामाजिक न्याय के मूल सिद्धांतों के प्रतिकूल है। उन्होंने कहा कि वन अधिकार अधिनियम देश की संसद द्वारा बनाया गया एक ऐतिहासिक कानून है, जिसका उद्देश्य आदिवासियों, दलितों एवं अन्य परंपरागत वनवासियों के ऐतिहासिक अधिकारों को मान्यता देना और उनकी रक्षा करना है। ऐसे में संबंधित अधिकारियों का पहला दायित्व पात्र परिवारों के दावों का निष्पक्ष एवं समयबद्ध निस्तारण करना चाहिए, न कि उन्हें बेघर करना।

नायक ने कहा कि राज्य के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व वाली राज्य सरकार आदिवासियों, दलितों, पिछड़ों एवं वनाश्रित समुदायों के संवैधानिक और कानूनी अधिकारों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। यदि गढ़वा के बुल्का गांव में स्थानीय प्रशासन अथवा वन विभाग के अधिकारियों द्वारा सरकार की मंशा और वन अधिकार अधिनियम की भावना के विपरीत कोई कार्रवाई की गई है, तो इसकी उच्चस्तरीय जांच कर दोषी अधिकारियों के विरुद्ध कठोर विभागीय एवं कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए। कहा कि सरकार की जनकल्याणकारी नीतियों को कमजोर करने और गरीब परिवारों को अनावश्यक रूप से प्रताड़ित करने वाले अधिकारियों को किसी भी परिस्थिति में संरक्षण नहीं मिलना चाहिए।

उन्होंने कहा कि गरीबों के आशियानों पर बुलडोज़र चलाना किसी भी समस्या का समाधान नहीं है। कहा कि कानून का पालन तभी माना जाएगा जब पात्र परिवारों को पहले उनका वैधानिक अधिकार दिया जाए। उसके बाद ही किसी प्रकार की प्रशासनिक कार्रवाई कानून सम्मत प्रक्रिया के अनुसार की जाए। प्रदेश प्रवक्ता नायक ने राज्य सरकार एवं जिला प्रशासन से मांगें की कि बुल्का गांव सहित सभी पात्र दलित एवं वनाश्रित परिवारों के वन अधिकार अधिनियम के अंतर्गत लंबित दावों का समयबद्ध निस्तारण कर तत्काल वन अधिकार पट्टा प्रदान किया जाए।

पूरे मामले की उच्चस्तरीय, निष्पक्ष एवं समयबद्ध जांच कर यदि किसी अधिकारी द्वारा कानून की अवहेलना, मनमानी अथवा अधिकारों का हनन किया गया है, तो उसके विरुद्ध कठोर विभागीय एवं कानूनी कार्रवाई की जाए। जिन परिवारों के घर तोड़े गए हैं अथवा जो बेघर हुए हैं, उनके पुनर्वास, आवास, भोजन एवं आजीविका की तत्काल व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। वन अधिकार अधिनियम तथा सर्वोच्च न्यायालय एवं केंद्र सरकार द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का सभी जिलों में कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाए, ताकि भविष्य में किसी भी पात्र परिवार के साथ इस प्रकार की घटना दोबारा न हो। गढ़वा जिला प्रशासन एवं वन विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिया जाए कि वन अधिकार संबंधी सभी लंबित मामलों का शीघ्र निस्तारण कर पात्र परिवारों को उनका वैधानिक अधिकार उपलब्ध कराया जाए।

नायक ने कहा कि कांग्रेस पार्टी सामाजिक न्याय, संविधान और गरीबों के अधिकारों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। दलितों, आदिवासियों एवं वनाश्रित समाज के साथ किसी भी प्रकार का अन्याय स्वीकार नहीं किया जाएगा। कहा कि यदि पीड़ित परिवारों को शीघ्र न्याय नहीं मिला, तो कांग्रेस पार्टी लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक तरीके से उनके अधिकारों की रक्षा हेतु संबंधित अधिकारियों के समक्ष मामला उठाएगी तथा आवश्यकता पड़ने पर जनआंदोलन का भी रास्ता अपनाएगी।
उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन इस गंभीर मामले का संज्ञान लेकर दोषी अधिकारियों के विरुद्ध आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करेंगे तथा पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने के लिए प्रभावी कदम उठाएंगे।

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