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नाबालिग बच्चे को रुस्टीकेट नहीं कर सकता स्कूल-एहतेशाम

दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश से शिक्षा के अधिकार की जीत-एआईएसएफ

एस. पी. सक्सेना/रांची (झारखंड)। दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा 13.5 वर्षीय ईडब्ल्यूएस छात्रा को स्कूल में वर्ग VIII की पढ़ाई जारी रखने की अनुमति देने का आदेश स्वागत योग्य है। यह आदेश केवल एक छात्रा के अधिकार की रक्षा नहीं करता, बल्कि देश के तमाम स्कूलों के लिए यह स्पष्ट संदेश देता है कि बच्चों के शिक्षा के अधिकार के साथ मनमानी नहीं की जा सकती। नाबालिग बच्चों को रुस्टीकेट नहीं कर सकता है स्कूल। उक्त बाते ऑल इंडिया स्टूडेंट फेडरेशन (एआईएसएफ) रांची जिलाध्यक्ष एहतेशाम परवीन ने 20 अगस्त को कही।

उन्होंने बताया कि कोर्ट ने दिल्ली स्कूल एजुकेशन रूल्स, 1973 के रूल 37(1)(बी) का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि 14 वर्ष की आयु पूरी नहीं करने वाले छात्र पर फाइन, एक्सप्लशन और रुस्तीकेशन जैसी कार्रवाई लागू नहीं की जा सकती। इसके बावजूद यदि किसी नाबालिग छात्र को स्कूल से बाहर करने या ट्रांसफर सर्टिफिकेट लेने के लिए मजबूर किया जाता है, तो यह गंभीर चिंता का विषय है।

जिलाध्यक्ष एहतेशाम के अनुसार एआईएसएफ का मानना है कि स्कूलों में अनुशासन जरूरी है, लेकिन अनुशासन के नाम पर बच्चों की शिक्षा रोकना समाधान नहीं हो सकता। कहा कि किसी छात्र से गलती होने पर पहले काउंसलिंग, अभिभावकों से संवाद और सुधारात्मक प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए। विशेष रूप से ईडब्ल्यूएस वर्ग के छात्रों के मामले में स्कूल प्रशासन और सरकार की जिम्मेदारी और अधिक बढ़ जाती है। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों के लिए शिक्षा सामाजिक और आर्थिक बदलाव का महत्वपूर्ण माध्यम है। ऐसे बच्चों को प्रशासनिक या अनुशासनात्मक कार्रवाई के नाम पर शिक्षा से वंचित करना उनके भविष्य पर सीधा असर डाल सकता है।

उन्होंने कहा कि एआईएसएफ सरकार और शिक्षा विभाग से मांग करता है कि सभी स्कूलों को बच्चों के संबंध में लागू कानूनी प्रावधानों का सख्ती से पालन करने का निर्देश दिया जाए। नाबालिग छात्रों के खिलाफ डिसिप्लिनरी एक्शन से पहले काउंसलिंग और ड्यू प्रोसेस सुनिश्चित किया जाए। ईडब्ल्यूएस छात्रों के शिक्षा संबंधी अधिकारों की प्रभावी निगरानी की जाए। किसी छात्र को ट्रांसफर सर्टिफिकेट लेने के लिए दबाव डालने या मौखिक रूप से स्कूल आने से रोकने जैसी शिकायतों पर तत्काल जांच की व्यवस्था हो।

छात्रों के अधिकारों और शिक्षा का अधिकार कानून अधिनियम (आरटीई एक्ट) से संबंधित प्रावधानों के बारे में स्कूलों, अभिभावकों और छात्रों के बीच जागरूकता बढ़ाई जाए। एहतेशाम ने कहा कि एआईएसएफ का स्पष्ट मत है कि बच्चों को डराकर नहीं, बल्कि बेहतर शिक्षा, काउंसलिंग और लोकतांत्रिक वातावरण देकर अनुशासन सिखाया जाना चाहिए। कहा कि शिक्षा किसी बच्चे पर एहसान नहीं, उसका अधिकार है।

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