अखंड सौभाग्य की कामना के साथ व्रत रखकर की वट वृक्ष की पूजा-अर्चना
प्रहरी संवाददाता/पेटरवार (बोकारो)। बोकारो जिला के हद में पेटरवार के विशेश्वर धाम मंदिर, छठ तलाब रघुनाथपुरम सहित आसपास के क्षेत्रों में दो दिन बीते 15 मई को चतुर्दशी और 16 मई अमावस्या के दिन सुहागिन महिलाओं ने पति की लंबी उम्र के लिए व्रत रखकर वट वृक्ष की पूजा-अर्चना की।
इस अवसर पर महिलाओं ने वट वृक्ष की टहनी को वृक्ष का प्रतिरूप मानकर यम देव से पति की दीर्घायु, सेहत व परिवार की सुख-शांति व उन्नति का वरदान मांगा।
इस अवसर पर महिलाओं ने सावित्री और सत्यवान की कथा सुन सुहागन महिलाओं को दान दिया। पेटरवार प्रखंड के विभिन्न पंचायतों में महिलाओं ने सुबह स्नान के बाद व्रत का संकल्प लिया और वट वृक्ष की पूजा के बाद सावित्री और सत्यवान की कथा सुनी।
बताया जाता है कि सत्यवान अल्पायु के थे। फिर भी सावित्री ने विवाह कर लिया। एक दिन लकड़ी काटते समय सत्यवान की मृत्यु हो गई। यमराज सत्यवान के प्राण लेने के बाद अपने लोक को चल पड़े। सावित्री भी उनके पीछे चल पड़ी। जब यमराज ने देखा कि सावित्री भी चली आ रही है तो उसे लौटने को कहा। साथ ही पुत्रवती होने का आशीर्वाद दे डाला। तब सावित्री ने कहा कि आपके आशीर्वाद की पूर्ति कैसे होगी, जब हमारे पति को आप ले जा रहे हैं। तब यमराज को सत्यवान के प्राण वापस करने पड़े। तभी से महिलाएं इस व्रत पूजा को करती आ रही हैं।

महिलाओं ने बताया कि परंपरा के अनुसार बरगद के पेड़ के नीचे पूजा होती है। परिवार के सदस्यों के साथ घर में ही पूजा कर सभी के अच्छे स्वास्थ्य की कामना की। ज्ञात हो कि पूजा को लेकर सुहागिन सुबह उठकर पूरी तैयारी कर पति के साथ विधि विधान से पूजा संपन्न की। सनातन धर्म में वट वृक्ष का बहुत महत्व है। वट वृक्ष के समीप दीप दान से पारिवारिक अभ्युदय की प्राप्ति होती है। वट का एक पौधा लगाने से हजारों वृक्ष लगाने का फल प्राप्त होता है। पेटरवार प्रखंड के हद में अंगवाली के राजाटांड़ स्थित पुराने वट वृक्ष तले सैकड़ों सुहागिनों को पुजारी संतोष चटर्जी उनके पुत्र आनंद चटर्जी तथा बबलू पांडेय के 12 वर्षीय पुत्र कृष्ण कुमार पांडेय तथा हर्ष कुमार ने पूजा कराते हुए कथा श्रवण कराई।
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