आखिर जिम्मेवार कौन, मौत का सौदागर बना बीएलए कंपनी डीजल टैंकर में लगी आग
एन. के. सिंह/फुसरो (बोकारो)। बोकारो जिला के हद में सीसीएल ढोरी क्षेत्र के एसडीओसीएम परियोजना में कार्यरत आउटसोर्सिंग बीएलए के स्टोर में 26 अप्रैल को अचानक भीषण आग लग गई। इस घटना में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है।
बताया जाता है कि डीजल टैंकर में अचानक आग लगने से डीजल टैंकर एवं बगल में खड़ा जेसीबी मशीन में आग लग गया। जिससे आग बेकाबू हो गया। देखते देखते डीजल टैंकर क्रमांक-WB 11E/5264 पुरी तरह जल गया। इससे जेसीबी मशीन के टायर और इंजन भी जल गया है।
घटना के संबंध में प्रत्यक्षदर्शीयो ने बताया कि 26 अप्रैल की शाम के लगभग 4 बजे डीजल टैंकर में आउटसोर्सिंग कंपनी बीएलए स्टोर के समीप खड़ा था। इस दौरान डीजल टैंकर में अचानक आग लग गई। डीजल अधिक होने के कारण देखते ही देखते आग बेकाबू हो गई।
घटना के बाद बीएलए कंपनी और सीसीएल के टैंकर द्वारा आग बुझाने की कोशिश की गई। करीब डेढ़ घंटे बाद चंद्रपुरा थर्मल पावर कॉरपोरेशन से सीआईएसएफ की फायर ब्रिगेड की गाड़ी पहुंची और आग पर काबू पाया, अन्यथा एक बड़ा घटना हो सकता था। वही जिस जगह पर डीजल टैंकर खड़ा था, उसकी कुछ दूरी पर डीजल का काफी मात्रा में स्टोर था। यह संयोग ही था कि इस घटना में किसी कर्मचारी को किसी तरह का कोई नुकसान नहीं हुआ।
घटना की जानकारी मिलते ही सीसीएल के कई अधिकारी तथा सीसीएल सुरक्षा गार्ड घटनास्थल पर पहुंचकर घटना की जानकारी हासिल की। वही पत्रकारों को घटनास्थल पर पहुंचने से भी रोका गया। आग लगी की इस घटना के बाद आउटसोर्सिंग कंपनी बीएलए स्टोर के बाहर काफी संख्या में भीड़ जुट गयी।
कई लोगों ने तो दबी जुबान में कहा कि बीएलए कंपनी मौत का सौदागर कंपनी बन गया है। पर पता नहीं कंपनी के ऊपर किसकी छत्रछाया है, जो इतनी गलतियां करने के बाद भी इस कंपनी को ब्लैक लिस्टेड नहीं किया जा रहा है। आखिर क्यों?
ज्ञात हो कि, इसके पूर्व भी यहां घटना हुई थी, जिसमें कार्य के दौरान डोजर ऑपरेटर के ऊपर पूरा कोयला गिर गया था।
जिसके कारण डोजर ऑपरेटर की मौत मौके पर हीं हो गई थी। बीएलए कंपनी के अधिकारियों द्वारा सुरक्षा नियमों को ताक पर रखकर हमेशा काम किया जाता है। कईयों ने तो दबी जुबान में कहा कि बीएलए कंपनी मौत का सौदागर कंपनी बन गया है। पर पता नहीं कंपनी के ऊपर किसकी छत्रछाया है, जो इतनी गलतियों के बाद भी इस कंपनी को ब्लैक लिस्टेड नहीं किया जा रहा है। आखिर क्यों?
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