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श्रीराम और सीता के प्रेम का प्रतीक है झूलनोत्सव-लक्ष्मणाचार्य

गजेन्द्र मोक्ष देवस्थानम में झूला महोत्सव का आयोजन

अवध किशोर शर्मा/सारण (बिहार)। सारण जिला के हद में हरिहरक्षेत्र सोनपुर के साधु गाछी स्थित श्रीगजेन्द्र मोक्ष देवस्थानम् दिव्य देश प्रांगण में 29 अगस्त को झूला महोत्सव का आयोजन किया गया। झूला महोत्सव में भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ी।

इस अवसर पर देवस्थानम् पीठाधिपति जगतगुरु रामानुजाचार्य स्वामी लक्ष्मणाचार्य जी महाराज ने श्रीराम और सीता मैया के रोचक प्रसंग का वर्णन करते हुए कहा कि जानकी विवाह के बाद जब अयोध्या आईं तो उन्होंने श्रीराम से सावन में झूला झूलने की इच्छा जताई।

अपने मायके जनकपुर में पर्वतों पर जानकी अपनी सखियों के साथ झूला झूलती थी, लेकिन अयोध्या में पर्वत नहीं थे।तब सीता के झूला झूलने के लिए उनके पिता राजा जनक ने मणियों का एक पर्वत बना दिया। उसमें झूला पड़ा और सीता ने अपनी सखियों संग झूला झूला।

इसलिए ये झूलनोत्सव राम और सीता के प्रेम का प्रतीक भी माना जाता है। तभी से मणिपर्वत का झूलनोत्सव प्रचलित हो गया। लक्ष्मणाचार्य ने बताया कि उसी तिथि से अयोध्या में मणिपर्वत का झूला उत्सव तीज के दिन आयोजित होता है। उसके बाद आस पास सभी जगह रक्षाबंधन तक इस परम्परा का निर्वहन किया जाता है।

इसी तरह देवस्थानम में मनमोहक झांकियां के साथ भगवान बालकृष्ण, बालाजी वेङ्कटेश, श्रीदेवी और भूदेवी के विग्रह को पवित्र और फूलों से सजाया गया झूला में श्रीराम सीता को स्थापित कर श्रद्धालु भक्तों द्वारा झूलाया जा रहा है।

इस अवसर पर स्थानीय कलाकार श्रीलाल पाठक, ओंकार सिंह द्वारा संध्याकालीन भजन की प्रस्तुति मनमोहक रही। यहां सोनपुर, हाजीपुर, पटना, वैशाली, मुजफ्फरपुर और सारण जिले के भक्तों ने झूला महोत्सव का भरपूर आनंद लिया।

इस अवसर पर देवस्थानम् प्रबंधक नन्द कुमार राय ने बताया कि हर शाम शृंगार के बाद भगवान को 4 घंटे के लिए झूला झुलाया जा रहा है। यह उत्सव सावन के अंतिम दिन यानी 31 अगस्त तक मनाया जाएगा। उपर्युक्त अवसर पर ज्योतिषाचार्य नन्द किशोर तिवारी, मन्दिर मीडिया प्रभारी समाजसेवी लाल बाबू पटेल, दिलीप झा, रतन कर्ण, फूल झा, ममता पटेल, निलीमा कर्ण, नारायणी सहित सैकड़ों श्रद्धालुओं ने श्रद्धापूर्वक भाग लिया।

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