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इसरो ने बढ़ाया भारतीय का मान, तिरंगा लहरा कर चंद्रमा पर पहुँचाया चंद्रयान-नर्मदेश्वर

नटवर साहित्य परिषद द्वारा मुजफ्फरपुर में कवि गोष्ठी का आयोजन

एस. पी. सक्सेना/मुजफ्फरपुर (बिहार)। बिहार की लाइफलाइन खे जानेवाले मुजफ्फरपुर शहर के नवयुवक समिति सभागार में 27 अगस्त को नटवर साहित्य परिषद की ओर से मासिक कवि गोष्ठी सह मुशायरा का आयोजन किया गया। कवि गोष्ठी की अध्यक्षता वरिष्ठ कवि सत्येन्द्र कुमार सत्येन, मंच संचालन वरिष्ठ गीतकार डॉ विजय शंकर मिश्र, स्वागत भाषण नटवर साहित्य परिषद के संयोजक डॉ नर्मदेश्वर प्रसाद चौधरी व धन्यवाद ज्ञापन डॉ लोकनाथ मिश्र ने किया।

उक्त जानकारी देते हुए मुजफ्फरपुर की युवा कवियित्री सविता राज ने बताया कि इस अवसर पर कवि गोष्ठी की शुरुआत उत्तर छायावाद के कवि आचार्य जानकी वल्लभ शास्त्री के गीत से किया गया। इसके बाद शायर व कवि डॉ नर्मदेश्वर मुजफ्फरपुरी ने स्वरचित कविता इसरो ने बढ़ाया है हर भारतीय का मान, तिरंगा लहरा कर चंद्रमा पर पहुँचाया चंद्रयान सुनाकर भरपूर तालियां बटोरी।

उन्होंने बताया कि गोष्ठी में वरिष्ठ शायर रामउचित पासवान ने चले क्यों आज आँखें फेर बन बेगाना साहब जी, खता क्या हो गई ऐसी जरा बतलाना साहब जी प्रस्तुत की। प्रो. डॉ पुष्पा गुप्ता ने ओ भैया तेरा अभिनंदन, आया है शुभ रक्षाबंधन सुनाकर माहौल खुशनुमा बना दी। वरिष्ठ कवि डॉ विजय शंकर मिश्र ने हृदय शिवालय प्रेम देवता, निष्काम कर्म है पूजा वंदन सुनाकर भरपूर तालियां बटोरी। कवि डॉ लोकनाथ मिश्र ने आज देखा है मैंने स्वयं को, पाया है मैंने अपने मन को सुनाकर तालियां बटोरी।

सविता राज ने बताया कि उक्त गोष्ठी में युवा कवि सुमन कुमार मिश्र ने आखिर क्यों हमारी रचना आम नहीं खास बनकर रह गई है, श्रोताओं और पाठकों की मोहताज बनकर रह गई है सुनाकर समाज के प्रबुद्ध जनों को निरुत्तर कर दिया। भोजपुरी के वरिष्ठ कवि सत्येन्द्र कुमार सत्येन ने धीरे-धीरे अइली बदरिया, उतरी असमनवां में हो प्रस्तुत की।

वरिष्ठ शायर डॉ सिबगतुल्लाह हमीदी ने इस ताजमहल से हसीं पैकर भी बनेगा, जिसने बनाया उसका हुनर आखिरी नहीं सेर प्रस्तुत कर तालियां बटोरी। ओम प्रकाश गुप्ता ने भाव पिरोता हूं शब्दों में, गीत नहीं कोई गान नहीं सुनाकर तालियां बटोरी। उदय शंकर प्रसाद ने दो वक्त की रोटी हम बना कहां पाते हैं कविता पेश की।

विजय शंकर प्रसाद ने इश्क की सलाह पर खामोश गवाह, किसे होता रहा मलाल पेश कर समाज को सच्चाई का आइना दिखाने का काम किया। डॉ शैल केजरीवाल ने रंगीनियत- रूमानियत को ताख पर धर दीजिए सुनाकर तालियां बटोरी। रामवृक्ष राम चकपुरी ने चांद पर यान थ्री उतरने का बड़ा सपना भारत का साकार हो गया, जबकि डॉ जगदीश शर्मा ने बढ़ती आबादी का समाधान, खोज देश ने अब लिया है सुनाकर आधुनिक भारत का खाका खिंचा।

इस अवसर पर कवि दीनबंधु आजाद ने कुछ भी करने से ये दुनिया हैरान क्यों है सुनाकर तालियां बटोरी। अरुण कुमार तुलसी ने अतीत के मर्म स्थल से वर्तमान के पटल पर सुनायी। अंजनी कुमार पाठक ने जबसे मिली मुझको तुमसे नजर, जी चाहता बना लू तुझे हमसफ़र प्रेम रस से लबालब कविता प्रस्तुत किया।

गोष्ठी में इसके अलावा कवियित्री हेमा सिंह, कवि रणवीर अभिमन्यु, कवियित्री मुन्नी चौधरी, कवि सुरेन्द्र कुमार, अजय कुमार, संतोष कुमार आदि कवियों की भी रचनाएं काफी सराही गई।

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