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आज भी विकास से कोसों दूर है झुमरावासी

 


विजय कुमार साव/गोमियां(बोकारो)। गोमियां प्रखंड (Gomiya block) के हद में आज भी विकास से कोसों दूर है नक्सल प्रभावित झुमरा व् आसपास के दर्जनों गांवों के रहिवासी।
ज्ञात हो कि सरकारी स्तर पर झुमरा में विकास (Devlopment in jhumra at government level) के बड़े-बड़े दावे किए जाते रहे हैं। धरातल पर इसकी सच्चाई कुछ और ही है। आज भी वहां के रहिवासीयों को पीएम आवास के लिए दर दर चक्कर काटने पड़ रहे हैं। आज भी वहां के रहिवासी बिना पुल पुलिया के नदी को पार करते हैं और अपनी रोजमर्रा की जीवन की सामग्री जुटाने के लिए मजबूर हैं। खासकर बरसात के दिनों में स्थिति और भयावह होती है। जो जहां है वहीं पर रह जाते हैं।
झुमरा के रहिवासी प्रदीप मांझी और प्रेमचंद महतो का घर गिरकर बुरी तरह से ध्वस्त हो चुका है। पीड़ितों ने बताया कि कई बार वह मुखिया और प्रखंड कार्यालय के चक्कर लगा चुके हैं, मगर उनका सुनने वाला कोई नहीं। इस संबंध में स्थानीय मुखिया रेणुका देवी से दूरभाष पर संपर्क करना चाहा तो उनके पति ही फोन को उठाते हैं। मुखिया पति ने इस बावत बताया की पंचायत सेवक बिना ग्रामसभा किए आवास को आवंटित करते हैं। वहीं दूसरी ओर पंचायत सेवक कागजी कार्रवाई का हवाला देकर पल्ला झाड़ते नजर आएं। ऐसे में साफ है कि सरकार का उग्रवाद प्रभावित क्षेत्र के विकास का दावा यहाँ खोखला साबित हो रहा है।

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