एस. पी. सक्सेना/रांची (झारखंड)। रांची विश्वविद्यालय में एमएससी स्टैटिस्टिक्स और एमएससी डेटा साइंस जैसे नए रोजगारपरक पाठ्यक्रम शुरू किए जाने पर एआईएसएफ रांची जिलाध्यक्ष एहतेशाम परवीन ने सवाल उठाते हुए कहा है कि नए कोर्स की घोषणा स्वागत योग्य है, लेकिन विश्वविद्यालय प्रशासन को छात्रों के भविष्य से जुड़े कई महत्वपूर्ण सवालों का जवाब देना होगा।
जिलाध्यक्ष ने कहा है कि एआईएसएफ द्वारा विश्वविद्यालय प्रशासन से पुछे गये प्रमुख सवालो में कहा गया है कि क्या उपरोक्त दोनों कोर्सों के लिए पर्याप्त स्थायी शिक्षक नियुक्त किए गए हैं? क्या विश्वविद्यालय के पास डेटा साइंस और मशीन लर्निंग की पढ़ाई के लिए आधुनिक कंप्यूटर एवं अत्याधुनिक लैब उपलब्ध है? जब अभी सांख्यिकी विभाग स्थापित नहीं हुआ है, तो विभागीय ढांचे के बिना पढ़ाई की गुणवत्ता कैसे सुनिश्चित होगी?
क्या विश्वविद्यालय ने छात्रों के लिए कंपनियों और सरकारी संस्थानों के साथ प्लेसमेंट एवं इंटर्नशिप का कोई ठोस समझौता किया है? अगर रोजगार के इतने बड़े अवसर हैं, तो विश्वविद्यालय प्लेसमेंट का लिखित रोडमैप छात्रों के सामने क्यों नहीं रखता? क्या ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों के लिए फीस और संसाधनों को लेकर कोई विशेष व्यवस्था होगी? क्या छात्रों को सिर्फ सैद्धांतिक पढ़ाई कराई जाएगी या वास्तविक प्रोजेक्ट और इंडस्ट्री ट्रेनिंग भी दी जाएगी? डेटा साइंस जैसे तेजी से बदलते क्षेत्र में पाठ्यक्रम को नियमित रूप से अपडेट करने की व्यवस्था क्या होगी?
30-30 सीटों वाले इन कोर्सों में चयन प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी होगी या नहीं? क्या विश्वविद्यालय हर साल इन कोर्सों से पास होने वाले छात्रों के रोजगार और प्लेसमेंट का आंकड़ा सार्वजनिक करेगा? एआईएसएफ जिलाध्यक्ष एहतेशाम परवीन ने 18 अगस्त को कहा कि छात्रों को रोजगार के सपने दिखाना आसान है, लेकिन रोजगार तक पहुंचाने की जिम्मेदारी कौन लेगा? रांची विश्वविद्यालय को सिर्फ नए कोर्स की घोषणा नहीं, बल्कि शिक्षक, लैब, प्रशिक्षण, इंटर्नशिप और प्लेसमेंट की पूरी व्यवस्था का जवाब देना चाहिए। उन्होंने कहा कि एआईएसएफ छात्रों के हित में विश्वविद्यालय की सकारात्मक पहल का समर्थन करता है, लेकिन शिक्षा के नाम पर केवल डिग्री बांटने की व्यवस्था किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं की जाएगी।
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