आपातकालीन स्थिति से निपटने की तैयारियों का सभी विभागों का समन्वित अभ्यास
एस. पी. सक्सेना/बोकारो। भारत सरकार के गृह मंत्रालय के निर्देशानुसार 15 जुलाई को बोकारो जिले में सिविल डिफेंस एक्सरसाइज (मॉक ड्रिल) का सफल आयोजन किया गया। मॉक ड्रिल का उद्देश्य किसी भी आपदा अथवा आपातकालीन स्थिति में विभिन्न विभागों की त्वरित प्रतिक्रिया, आपसी समन्वय एवं राहत-बचाव व्यवस्था की तैयारियों का परीक्षण करना था।
निर्धारित परिदृश्य के अनुसार घटना की सूचना मिलते ही बोकारो जिला उपायुक्त (डीसी) अजय नाथ झा समेकित नियंत्रण कक्ष (सीसीआर) पहुंचे और पूरे ऑपरेशन की निगरानी की। पुलिस अधीक्षक (एसपी) नाथू सिंह मीणा भी नियंत्रण कक्ष पहुंचे। यहां से सभी संबंधित विभागों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए तथा राहत एवं बचाव कार्यों की लगातार मॉनिटरिंग की गई।
बताया जाता है कि इससे पूर्व, नियंत्रण कक्ष उप विकास आयुक्त शताब्दी मजूमदार एवं प्रशिक्षु आईएएस अरविंद राधाकृष्णन भी पहुंचे तथा घटनास्थल पर राहत एवं बचाव कार्यों का जायजा लिया। दृश्य के अनुसार इसके बाद डीसी एवं एसपी उषा पेट्रोल पंप स्थित घटनास्थल पहुंचे और राहत एवं बचाव कार्यों का जायजा लिया। इस दौरान अग्निशमन दल द्वारा आग पर नियंत्रण, घायलों को सुरक्षित बाहर निकालने, एंबुलेंस के माध्यम से अस्पताल भेजने, पुलिस द्वारा क्षेत्र की घेराबंदी एवं यातायात व्यवस्था सहित विभिन्न गतिविधियों का अभ्यास किया गया।
मॉक ड्रिल में बोकारो जिला प्रशासन, पुलिस, अग्निशमन सेवा, स्वास्थ्य विभाग, नगर निगम, सिविल डिफेंस तथा अन्य संबंधित विभागों ने समन्वित रूप से भाग लिया। मॉक ड्रिल के दौरान डीसी अजय नाथ झा एवं एसपी नाथू सिंह मीणा ने सदर अस्पताल एवं बोकारो जनरल अस्पताल (बीजीएच) पहुंचकर घायलों का हाल-चाल जाना। उन्होंने सेवारत चिकित्सकों एवं स्वास्थ्यकर्मियों से उपचार व्यवस्था की जानकारी ली तथा आपातकालीन परिस्थितियों में त्वरित एवं बेहतर चिकित्सा सुविधा सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। साथ ही चिकित्सकों की टीम को समन्वय के साथ कार्य करते हुए सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध रखने के संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
मॉक ड्रिल के दौरान आपातकालीन सूचना तंत्र, संचार व्यवस्था, राहत एवं बचाव कार्य, चिकित्सा सहायता, अग्निशमन, यातायात प्रबंधन तथा विभिन्न विभागों के बीच समन्वय व्यवस्था का परीक्षण किया गया। अभ्यास के उपरांत अधिकारियों ने पूरी प्रक्रिया की समीक्षा कर आवश्यक सुधार बिंदुओं पर चर्चा की।
मौके पर उपायुक्त झा ने कहा कि सिविल डिफेंस मॉक ड्रिल का उद्देश्य किसी भी आपातकालीन स्थिति में जिला प्रशासन एवं सभी संबंधित एजेंसियों की त्वरित प्रतिक्रिया, आपसी समन्वय तथा आपदा प्रबंधन क्षमता का व्यावहारिक परीक्षण करना था। कहा कि इस अभ्यास से विभिन्न विभागों की तैयारियों का आकलन हुआ और भविष्य में किसी भी वास्तविक आपदा की स्थिति में प्रभावी एवं समन्वित कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण अनुभव प्राप्त हुआ। उन्होंने कहा कि सभी विभागों ने निर्धारित प्रोटोकॉल के अनुरूप समयबद्ध एवं जिम्मेदारीपूर्ण ढंग से अपने दायित्वों का निर्वहन किया, जो जिले की आपदा प्रबंधन तैयारियों को दर्शाता है।

मौके पर एसपी नाथू सिंह मीणा ने कहा कि आयोजित सिविल डिफेंस मॉक ड्रिल का उद्देश्य किसी भी आपातकालीन स्थिति में पुलिस एवं सभी संबंधित एजेंसियों की त्वरित प्रतिक्रिया और आपसी समन्वय का परीक्षण करना था। सूचना मिलते ही पुलिस, क्यूआरटी, स्वास्थ्य विभाग, एंबुलेंस, जिला प्रशासन एवं अन्य टीमों ने निर्धारित समय के भीतर घटनास्थल पर पहुंचकर अपनी जिम्मेदारियों का सफलतापूर्वक निर्वहन किया। उन्होंने कहा कि इस तरह के नियमित अभ्यास भविष्य में किसी भी आपदा या आपात स्थिति में प्रभावी एवं त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। मॉक ड्रिल को सफल बनाने में सभी संबंधित विभागों के वरीय पदाधिकारियों, कर्मियों एवं आम जनों का अहम रोल रहा।
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