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जरीडीह पुनर्वास क्षेत्र में 40 साल बाद भी बिजली-पानी नहीं, आंदोलन की चेतावनी

प्रहरी संवाददाता/तेनुघाट (बोकारो)। बोकारो जिला के हद में सीसीएल बीएंडके क्षेत्र के जरीडीह मौजा अंतर्गत जरीडीह पश्चिमी एवं जरीडीह पूर्वी पंचायत के पुनर्वास क्षेत्र में बिजली व पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाओं की मांग को लेकर सैकड़ों ग्रामीणों ने एक जुलाई को बेरमो के अनुमंडल पदाधिकारी (तेनुघाट) को आवेदन सौंपा। ज्ञात हो कि सीसीएल द्वारा वर्ष 1983-85 में 590 एकड़ जमीन अधिग्रहित की गयी थी।

एसडीओ को सौंपे गये आवेदन में बताया गया कि सीसीएल द्वारा वर्ष 1983-1985 में कोल बेयरिंग अधिनियम व लैंड एक्वीजिशन अधिनियम के तहत लगभग 590 एकड़ भूमि अधिग्रहित कर विस्थापितों को जरीडीह नया बस्ती पुनर्वास क्षेत्र में बसाया गया था। आरोप है कि 40 साल बाद भी पुनर्वास क्षेत्र सीसीएल द्वारा बिजली व पेयजल से वंचित रखा गया है।

ग्रामीणों ने कहा कि सीसीएल की खनन गतिविधियों व हैवी ब्लास्टिंग के कारण क्षेत्र के कुएं, तालाब, बोरिंग व चापानल का जलस्तर नीचे चला गया है। घरों की दीवारों व छतों पर दरारें आ गई हैं। सीसीएल के कथारा तथा बीएंडके क्षेत्र के विस्थापित गांवों को सीसीएल ने सुविधा दी, लेकिन जरीडीह मौजा पुनर्वास क्षेत्र को छोड़ दिया गया। ग्राम सभा में बिजली-पानी को लेकर बीते माह 7 व 10 जून को ग्राम सभा आयोजित की गई। इसमें सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर सीसीएल प्रबंधन व जिला प्रशासन से स्थायी व्यवस्था की मांग की गई। ग्रामीणों का कहना है कि भूमि अधिग्रहण के समय बिजली, पानी, सड़क, स्वास्थ्य व शिक्षा देने का आश्वासन मिला था, जो आज तक पूरा नहीं किया गया है।

आवेदन में स्पष्ट किया गया है कि संबंधित मामले में यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं की गयी तो ग्रामीण संवैधानिक व लोकतांत्रिक अधिकारों के तहत जन आंदोलन, धरना-प्रदर्शन व न्यायालय में शिकायत करने को बाध्य होंगे। इसकी समस्त जिम्मेवारी सीसीएल प्रबंधन की होगी। आवेदनकर्ता समस्त ग्रामवासी एवं जनप्रतिनिधिगण जरीडीह मुखिया एवं पंचायत समिति सदस्य की उपस्थिति में ज्ञापन सौंपा।

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