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युद्ध समाप्त, कच्चा तेल सस्ता के भाव गिरे तेल व् गैस सस्ता करे केंद्र सरकार-नायक

एस. पी. सक्सेना/रांची (झारखंड)। युद्ध के नाम पर जनता की जेब काटने वाली केंद्र की मोदी सरकार अब चुप क्यों है। युद्ध समाप्त हो गया है। अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल सस्ता हो गया है। अब जनता को राहत दो, पेट्रोल-डीजल ₹15 से 20 तथा गैस ₹100 सस्ती करो। 15 दिन में रीफिल व्यवस्था बहाल करो।

झारखंड प्रदेश कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता विजय शंकर नायक ने केंद्र की भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए एक जुलाई को कहा कि ईरान-इज़राइल युद्ध के दौरान अंतरराष्ट्रीय हालात का हवाला देकर केंद्र सरकार ने आम जनों पर महंगाई का बोझ तो लाद दिया, लेकिन अब जब युद्ध का प्रभाव कम हो चुका है और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें युद्ध-पूर्व स्तर के करीब पहुंच गई है। ऐसे में मात्र 5 रुपये पेट्रोल और 3 रुपये डीजल के दामो में कमी करना जनता का आई वाश करने के समान है।

उन्होंने कहा कि मई माह में केंद्र सरकार ने चरणबद्ध तरीके से पेट्रोल की कीमत में कुल ₹6.51 प्रति लीटर, डीजल की कीमत में ₹6.61 प्रति लीटर की वृद्धि की तथा घरेलू एलपीजी गैस सिलेंडर की कीमत में ₹50 प्रति सिलेंडर की बढ़ोत्तरी कर देश के करोड़ों परिवारों की रसोई और घरेलू बजट पर सीधा हमला किया। उस समय सरकार ने तर्क दिया कि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के कारण कीमतें बढ़ाना आवश्यक है।

प्रदेश प्रवक्ता विजय शंकर नायक ने सवाल किया कि यदि युद्ध के समय अंतरराष्ट्रीय बाजार का हवाला देकर कीमतें बढ़ाई जा सकती हैं, तो आज उसी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें घटने के बावजूद आमजनों को कम से कम 15 से 20 रुपया पेट्रोल और डीजल के दामो को कम कर और गैस में ₹100 कम कर राहत क्यों नहीं दी जा रही?

क्या भाजपा सरकार के लिए देश की जनता केवल टैक्स वसूलने का माध्यम बनकर रह गई है? उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार हर मुद्दे पर डबल इंजन का दावा करती है, लेकिन महंगाई के मामले में यह डबल बोझ वाली सरकार साबित हुई है। कहा कि एक ओर पेट्रोल-डीजल महंगा है, दूसरी ओर रसोई गैस की कीमतों ने गरीब और मध्यम वर्ग की कमर तोड़ दी है। सरकार ने महंगाई पर नियंत्रण के बजाय उसे राजस्व कमाने का साधन बना दिया है।

नायक ने कहा कि सबसे अधिक अन्याय उन महिलाओं के साथ हो रहा है जिनके नाम पर उज्ज्वला योजना का प्रचार किया गया था। आज देश के लाखों गरीब परिवार महंगी गैस के कारण सिलेंडर भरवाने में असमर्थ हैं और मजबूरी में फिर से लकड़ी एवं अन्य पारंपरिक ईंधनों का उपयोग कर रहे हैं। यह सरकार की विफलता का सबसे बड़ा प्रमाण है।

उन्होंने मांग की कि केंद्र सरकार तत्काल पेट्रोल एवं डीजल की कीमतों में युद्धकालीन वृद्धि के अनुरूप पर्याप्त कटौती करे। घरेलू एलपीजी गैस सिलेंडर की कीमत में कम से कम ₹50 की तत्काल कमी करे। घरेलू गैस उपभोक्ताओं के लिए 15 दिनों के भीतर रीफिल बुकिंग की पूर्व व्यवस्था तत्काल बहाल करे। ईंधन मूल्य निर्धारण में पारदर्शिता लाते हुए उपभोक्ताओं को अंतरराष्ट्रीय बाजार में होने वाली गिरावट का पूरा लाभ दे।

नायक ने कहा कि भाजपा सरकार यह स्पष्ट करे कि जब तेल महंगा होता है तो उसका बोझ देश की जनता पर डाल दिया जाता है, लेकिन जब तेल सस्ता होता है तो उसका लाभ कम क्यों पहुंचता है? आखिर यह राहत किसके लिए रोककर रखी गई है। उन्होंने कहा कि देश की जनता अब भाजपा सरकार के बहानों से नहीं, बल्कि महंगाई से राहत चाहती है। यदि सरकार शीघ्र पेट्रोल, डीजल और घरेलू गैस की कीमतों में कम से कम 15 से 20 रुपया पेट्रोल और डीजल के दामो को कम कर और गैस में 100 रुपैया कमी नहीं करती, तो यह स्पष्ट हो जाएगा कि भाजपा की प्राथमिकता जनता नहीं, बल्कि मुनाफाखोरी और कर वसूली है।

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