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मनरेगा पर मोदी सरकार का बुलडोज़र, गरीबों के रोज़गार पर सीधा हमला-नायक

भाजपा बताए मज़दूरों की मज़दूरी क्यों रोकी, हज़ारों करोड़ बकाया कब देगी

एस. पी. सक्सेना/रांची (झारखंड)। झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमिटी के प्रदेश प्रवक्ता विजय शंकर नायक ने केंद्र की भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार योजनाओं के नाम बदलने में व्यस्त है, जबकि गरीबों के अधिकार और रोज़गार को लगातार कमजोर किया जा रहा है। मनरेगा पर प्रहार दरअसल देश के करोड़ों गरीब, किसान, दलित, आदिवासी, पिछड़े और ग्रामीण मजदूरों की आजीविका पर हमला है।

कांग्रेस प्रवक्ता नायक ने 30 जून को प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश को बताएं कि जब मार्च 2026 तक लोकसभा में प्रस्तुत जानकारी के अनुसार 34 राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों का ₹17,144.13 करोड़ मनरेगा बकाया लंबित था और उसमें ₹7,846.25 करोड़ मजदूरों की मजदूरी थी, तब आखिर लाखों गरीबों का पसीने का पैसा क्यों रोका गया? क्या गरीब का हक़ मारना ही भाजपा की नई नीति है? उन्होंने कहा कि एक ओर केंद्र सरकार नई योजना लागू करने का ढोल पीट रही है, दूसरी ओर झारखंड का लगभग ₹900 करोड़, कर्नाटक का लगभग ₹700 करोड़ सहित देश के कई राज्यों का बकाया भुगतान आज तक नहीं किया गया। जब पुराना हिसाब चुकता नहीं हुआ, तब नई व्यवस्था थोपने की इतनी जल्दबाज़ी क्यों?

नायक ने कहा कि कांग्रेस सरकार ने मनरेगा में मजदूरी का पूरा खर्च केंद्र सरकार के जिम्मे रखा था, लेकिन भाजपा सरकार राज्यों पर 40 प्रतिशत तक अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालना चाहती है। जब भाजपा शासित राज्य भी इस व्यवस्था पर सवाल उठा रहे हैं, तब साफ है कि यह नीति राज्यों को आर्थिक संकट में धकेलने वाली है। उन्होंने कहा कि खेती के सबसे महत्वपूर्ण समय में 60 दिनों तक काम बंद रखने जैसे प्रावधान किसानों और मजदूरों के साथ अन्याय हैं। कहा कि दिल्ली में बैठी केंद्र सरकार को गांव की हकीकत का अंदाज़ा नहीं है। खेतों और गांवों की ज़िंदगी फ़ाइलों से नहीं चलती।
कांग्रेस प्रवक्ता नायक ने कहा कि यदि 125 दिनों के रोजगार के नाम पर मध्य प्रदेश पर ₹20,037 करोड़ और बिहार पर ₹15,939 करोड़ का अतिरिक्त बोझ डाला जा रहा है। यह सहयोग नहीं, बल्कि राज्यों के साथ आर्थिक अन्याय है।

उन्होंने कहा कि महंगाई लगातार बढ़ रही है, लेकिन मजदूरों की मजदूरी बढ़ाने में केंद्र सरकार की नीयत साफ दिखाई नहीं देती। कांग्रेस पार्टी शुरू से मनरेगा मजदूरी ₹500 प्रतिदिन करने की मांग करती रही है। कहा कि कई राज्यों ने भी मजदूरी बढ़ाने की मांग की है, लेकिन केंद्र की भाजपा सरकार गरीबों की आवाज़ सुनने को तैयार नहीं है। नायक ने कहा कि इस वर्ष कम वर्षा और खरीफ की बुआई में गिरावट ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को संकट में डाल दिया है। ऐसे में मनरेगा को कमजोर करना गरीबों के पेट पर लात मारने जैसा है। कहा कि भाजपा सरकार को यह समझना होगा कि ग्रामीण भारत को कमजोर करके विकसित भारत का सपना कभी पूरा नहीं हो सकता।

नायक ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सात सीधे सवाल पूछे हैं, जिसमें मजदूरों की रुकी हुई मजदूरी कब मिलेगी, राज्यों का ₹17,144 करोड़ से अधिक बकाया कब जारी होगा, झारखंड सहित अन्य राज्यों का लंबित भुगतान क्यों रोका गया, राज्यों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ क्यों डाला जा रहा है, खेती के मौसम में 60 दिन काम बंद रखने की नीति क्यों थोपी जा रही है, मजदूरों की दैनिक मजदूरी ₹400 कब होगी तथा क्या केंद्र की भाजपा सरकार मनरेगा को कमजोर कर ग्रामीण भारत से रोजगार का अधिकार छीनना चाहती है शामिल है। उन्होंने कहा कि देश का गरीब, किसान और मजदूर अब जवाब मांग रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को देश के सामने इन सवालों का स्पष्ट उत्तर देना ही होगा।

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