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कोयला मजदूरों के बुरे दिन का दौर शुरू, संघर्ष ही एकमात्र विकल्प-शुभेंदु सेन

एस. पी. सक्सेना/बोकारो। कोयला क्षेत्र के सभी सब्सिडियरियों में यूनियन कि विस्तार और मजबूत संघर्ष के संकल्प के साथ 26 मई को बोकारो जिला के हद में ऑफिसर क्लब कथारा में आयोजित कोल माइंस वर्कर्स यूनियन (सीएलडब्ल्यूयू) का दो दिवसीय सम्मेलन सम्पन्न हो गया। सम्मेलन के माध्यम से सर्वसम्मति से 51 सदस्यीय केंद्रीय कमिटी का चुनाव किया गया।

बीते 25 मई से आयोजित सम्मेलन के दूसरे दिन प्रतिनिधि सत्र की शुरुआत सीएलडब्ल्यूयू महासचिव शुभेंदु सेन द्वारा प्रस्तुत प्रतिवेदन रिपोर्ट के साथ किया गया। महासचिव सेन ने प्रतिवेदन रिपोर्ट पेश करते हुए कहा कि केंद्र सरकार द्वारा चार लेबर कोड के लागू होते ही सारे श्रम कानूनों को शिथिल कर दिया गया है। मजदूरों के हक की आवाज उठाने वाले यूनियनो के अधिकारों पर हमले हो रहे हैं। देश में मालिक पक्षीय एकल यूनियन की व्यवस्था कायम की जा रही है। उन्होंने कहा कि यूनियनों की मान्यता के लिए 51 प्रतिशत मजदूरों की सदस्यता और चुनाव की बाध्यता इसका ताजा सबूत है। कहा कि चारों श्रम संहिता के लागू होते ही अब कोयला मजदूरों के बुरे दिन के दौर की शुरुआत हो गई है। अब मजदूरों के सामने संघर्ष ही एकमात्र विकल्प है।

इस अवसर पर प्रतिनिधि सत्र के रिपोर्ट पर 33 से अधिक प्रतिनिधियों ने अपना सुझाव और संशोधन का प्रस्ताव दिया। कुछ महत्वपूर्ण सुझावों को शामिल करने के आश्वासन के बाद सर्वसम्मति से प्रस्तावित दस्तावेज को ध्वनि मत से पारित किया गया। सम्मेलन के अंतिम सत्र में मुख्य पर्यवेक्षक देव द्वीप सिंह दिवाकर के देखरेख में नई कमिटी का चुनाव कराया गया। जिसमें 51 सदस्यीय कमिटी का गठन किया गया।

गठित नयी कमेटी में केंद्रीय अध्यक्ष बैजनाथ मिस्त्री, उपाध्यक्ष भुवनेश्वर केवट, नकुल देव सिंह, मनोरजंन मलिक, सुरेंद्र कुमार, रघुबीर राय, महासचिव कृष्णा सिंह, संयुक्त सचिव शुभेंदु सेन, विकाश कुमार सिंह, बालेश्वर गोप, सोमनाथ चटर्जी, जगदीश शर्मा, कार्तिक हरि, बिपिन मंडल, महादेव मांझी, शौकत अली, बलदेव वर्मा, जगरनाथ उरांव समेत कई प्रमुख पदाधिकारियों का नाम शामिल है। सम्मेलन में कोयला क्षेत्र के सब्सिडियरियों में यूनियन के विस्तार और संघर्ष को मजबूत बनाने का कार्यभार लिया गया। सम्मेलन के समापन पर बड़ी संख्या में सीएलडब्ल्यूयू के कॉमरेड साथी उपस्थित थे।

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