रंजन वर्मा/कसमार (बोकारो)। बोकारो में आयोजित जिला स्तरीय सांस्कृतिक समिति की बैठक में जिले की सांस्कृतिक पहचान, लोक परंपराओं और ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण को लेकर व्यापक चर्चा की गई। बैठक की अध्यक्षता उपायुक्त अजय नाथ झा ने की। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि बोकारो केवल औद्योगिक पहचान तक सीमित नहीं है, बल्कि यहां की लोक संस्कृति, परंपरा और सांस्कृतिक विरासत भी जिले की विशेष पहचान है, जिसे संरक्षित और आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना हम सभी की जिम्मेदारी है।
जानकारी के अनुसार 23 मई को जिला समाहरणालय में आयोजित बैठक में उपायुक्त ने विशेष रूप से झारखंड की पारंपरिक अखड़ा संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन पर बल दिया। उन्होंने कहा कि अखड़ा केवल सांस्कृतिक गतिविधियों का केंद्र नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता, लोक कला और सामुदायिक एकता का प्रतीक है। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित अखड़ा स्थलों की पहचान कर उनके संरक्षण एवं विकास की दिशा में योजनाबद्ध तरीके से कार्य किया जाए। साथ ही स्थानीय कलाकारों एवं सांस्कृतिक दलों को प्रोत्साहित करने के लिए विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाएं।

बैठक में जिला स्तरीय नाट्य मंच महोत्सव के आयोजन को लेकर भी विस्तार से चर्चा की गयी। उपायुक्त ने कहा कि इस तरह के आयोजन स्थानीय कलाकारों को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर प्रदान करेंगे और जिले की सांस्कृतिक गतिविधियों को नई पहचान मिलेगी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि महोत्सव के आयोजन में विद्यालयों, महाविद्यालयों, सांस्कृतिक संस्थाओं और युवा कलाकारों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाए।
इसके अलावा बैठक में ज्ञान भारतम मिशन के तहत जिले की ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक धरोहरों के डिजिटलीकरण पर भी जोर दिया गया। उपायुक्त ने कहा कि जिले के ऐतिहासिक स्थलों, प्राचीन दस्तावेजों, लोक कलाओं एवं सांस्कृतिक परंपराओं का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जाए, ताकि इन धरोहरों को लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सके और नई पीढ़ी भी जिले के गौरवशाली इतिहास से परिचित हो सके।
बैठक में समिति के सदस्यों एवं विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने भी सांस्कृतिक संरक्षण और विकास को लेकर अपने सुझाव प्रस्तुत किए। सभी ने मिलकर जिले की लोक संस्कृति और परंपराओं को सशक्त बनाने की दिशा में सामूहिक प्रयास करने की बात कही।
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