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मध्यप्रदेश के मैहर में अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का भव्य आयोजन

शोला यहीं, शबनम यहीं, बारूद यहीं, बम, गाते रहो रे गीत मीत, वन्देमातरम-भारती

एस. पी. सक्सेना/रांची (झारखंड)। कहानिका हिंदी पत्रिका परिवार के तत्वावधान में 23 मई को मध्य प्रदेश के सतना जिला के हद में मैहर स्थित ओंकार होटल भव्य वंदेमातरम् अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। उक्त जानकारी कहानिका हिंदी पत्रिका के केंद्रीय सूचना प्रभारी शिखा गोस्वामी निहारिका ने दी।

उन्होंने बताया कि संस्थापक एवं प्रधान संपादक श्याम कुंवर भारती के प्रमुख संयोजन एवं महिला कल्याण समिति ढोरी बोकारो द्वारा कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े साहित्य, कला एवं समाजसेवा के क्षेत्र में सक्रिय गणमान्य जनों को काशी हिन्दी विद्यापीठ के कुलसचिव इंद्रजीत तिवारी ‘निर्भीक’ द्वारा विद्या-वाचस्पति विशेष मानद सम्मान से सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का प्रभावशाली संचालन छत्तीसगढ़ की सुप्रसिद्ध कवयित्री आशा पांडेय ने की।

कहा कि कवि सम्मेलन के द्वितीय सत्र में मुख्य अतिथि पश्चिम मध्य रेलवे बोर्ड, जबलपुर के सदस्य एवं मैहर जिला योजना समिति सदस्य सत्यभान सिंह, काशी हिन्दी विद्यापीठ के कुलसचिव इंद्रजीत तिवारी ‘निर्भीक’, भरत प्रसाद प्रजापति तथा रमेश प्रसाद प्रजापति की गरिमामयी उपस्थिति में आज़ाद अध्यापक शिक्षक संघ मैहर के जिलाध्यक्ष देवेंद्र पटेल की अध्यक्षता में अखिल भारतीय कवि सम्मेलन आयोजित किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ माँ सरस्वती की वाणी-वंदना से किया गया, जिसे पूनम दुबे एवं अंजू पांडेय ने मधुर स्वर में प्रस्तुत किया।

प्रधान संपादक श्याम कुंवर भारती ने अपनी रचना माँ मैहरवाली देवीजी क महिमा अपरम्पार ह, ओकर इहलोक अउरी परलोक में समझ हो जाला कल्याण ह…प्रस्तुत कर वाहवाही लूटी। अंतरराष्ट्रीय लोक कलाकार ललित सिंह ठाकुर ने माँ गंगा का अवतरण गीत प्रस्तुत कर वातावरण को भक्तिमय बना दिया। राजेन्द्र तिवारी ‘स्वदेश’ ने अपनी चर्चित रचना शिमला, नैनीताल, मनाली न जाए पहलगाम में, आओ बच्चों अबकी छुट्टी चलते अपने गाँव में सुनाकर ग्रामीण संस्कृति और अपनत्व की सुंदर झलक प्रस्तुत की।

पांडेय चिदानन्द ‘चिद्रूप’ ने राष्ट्रभक्ति से ओत-प्रोत पंक्तियाँ हिन्द के सैनिक प्यारे वतन के, निर्भीक पहरेदार हम। हैं जुझारू मुश्किलों वाले, करें चुनौती स्वीकार हम। प्रस्तुत कर श्रोताओं में जोश और उत्साह का संचार कर दिया। इस अवसर पर देश के विभिन्न प्रदेशों से उपस्थित रचनाकारों में जगन्नाथ पांडेय, गायत्री पांडेय, आशा पांडेय, राजेश तिवारी (बाँदा), सुरेश प्रसाद जायसवाल, डॉ उमेश कुमार पांडेय, विनय गुप्ता सहित अनेक कवियों एवं साहित्यकारों ने अपनी रचनाओं से श्रोताओं को भाव विभोर कर दिया।

कार्यक्रम के समापन अवसर पर मुख्य अतिथि एवं आयोजन अध्यक्ष ने सभी रचनाकारों को माँ की चुनरी ओढ़ाकर सम्मानित किया तथा कहा कि माँ मैहर के पावन धाम में आज शब्द-साधकों ने जो शब्द-राग छेड़ा है, वह समाज को आत्म चिंतन और राष्ट्रचेतना का संदेश देता है। प्रमुख संयोजक श्याम कुंवर भारती ने कहा कि भीषण गर्मी और तेज धूप के बावजूद सैकड़ों की उपस्थिति यह सिद्ध करती है कि समाज आज भी मातृशक्ति, संस्कृति और राष्ट्र भावना के प्रति सजग है। उन्होंने अपने भाव व्यक्त करते हुए कहा कि शोला यहीं, शबनम यहीं, बारूद यहीं, बम…गाते रहो रे गीत मीत, वन्देमातरम। अंत में विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े विशिष्ट जनों को अंगवस्त्र एवं स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का धन्यवाद ज्ञापन अंजू पांडेय ने प्रस्तुत किया।

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