वीर हनुमान के बाल रूप के दर्शन को उमड़े हजारों श्रद्धालू
अवध किशोर शर्मा/सारण (बिहार)। सारण जिला के हद में सोनपुर स्थित विश्व प्रसिद्ध बाबा हरिहरनाथ मंदिर परिसर के महावीर मंदिर में चैत्र पूर्णिमा के पावन अवसर पर 2 अप्रैल को संकटमोचन हनुमानजी का जन्मोत्सव श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया। भक्ति, शक्ति और साहस के प्रतीक पवनपुत्र के स्वागत में पूरा मंदिर परिसर जय वीर बजरंगी के जय घोष से सराबोर रहा।
इस अवसर पर मंदिर में एक अद्भुत संयोग देखने को मिला। जहाँ एक ओर महावीर मंदिर में उत्सव था, वहीं हरिहरनाथ मंदिर के मुख्य गर्भगृह में अवस्थित शिवलिंग का भी बाल हनुमान के स्वरूप में भव्य और अलौकिक श्रृंगार किया गया।
जन्मोत्सव के शुभ अवसर पर बाबा हरिहरनाथ के गर्भगृह एवं महावीर मंदिर में विशेष अनुष्ठान किए गए।
इस अवसर पर सर्वप्रथम गंगा जल, दूध और विभिन्न सुगंधित द्रव्यों से प्रभु का वैदिक मंत्रोच्चार के बीच अभिषेक किया गया। इसके पश्चात बजरंगबली का बाल रूप में मनमोहक श्रृंगार किया गया। गेंदा, गुलाब के पुष्प-मालाओं और स्वर्ण आभा से सुसज्जित प्रभु की दिव्य छवि को निहारने के लिए भक्तों का तांता लगा रहा।
सुंदरकांड और हनुमान चालीसा के पाठ से गूंजा मंदिर परिसर
उपस्थित श्रद्धालुओं ने निश्चय प्रेम प्रतीति ते, बिनय करैं सनमान के भाव के साथ प्रभु के श्री चरणों में शीश नवाया। दिन भर मंदिर प्रांगण में सामूहिक रूप से हनुमान चालीसा और रामचरितमानस के सुंदरकांड का सस्वर पाठ किया गया। अतुलितबलधामं हेमशैलाभदेहं… इन दिव्य श्लोकों और हनुमान गायत्री मंत्र के उच्चारण से वातावरण पूरी तरह आध्यात्मिक ऊर्जा से ओतप्रोत हो गया।
सायंकाल में जब प्रभु की महाआरती शुरू की गयी, तो आरती कीजै हनुमान लला की… के स्वर से संपूर्ण हरिहरक्षेत्र झंकृत हो उठा। शंखध्वनि, घड़ियाल और ढोल-नगाड़ों के बीच भव्य आरती में सैकड़ों श्रद्धालुओं ने भाग लेकर पुण्य लाभ अर्जित किया।
रामभक्त हनुमानजी हरेंगे सबके संकट-मुख्य अर्चक
सोनपुर स्थित बाबा हरिहरनाथ मंदिर के मुख्य अर्चक आचार्य सुशीलचंद्र शास्त्री ने जन्मोत्सव की महिमा बताते हुए कहा कि मर्यादा पुरषोत्तम प्रभु श्रीराम भक्त हनुमानजी अतुलनीय बल के स्वामी और ज्ञानियों में अग्रगण्य हैं। वह स्वर्ण पर्वत के समान दैदीप्यमान हैं और भक्तों के सभी संकटों को हरने वाले हैं। हमारी प्रार्थना है कि महावीर की कृपा सभी श्रद्धालुओं पर बनी रहे और समस्त जगत रोग-शोक से मुक्त होकर खुशहाल रहे। इस भव्य आयोजन को सफल बनाने में मंदिर के पुजारी पवनजी शास्त्री, सदानंद बाबा, नंद बाबा सहित सभी पुजारियों, मंदिर कर्मियों और न्यास समिति के पदाधिकारियों व सदस्यों ने सक्रिय भूमिका निभाई।
![]()













Leave a Reply