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सोनपुर रेल मंडल ने जारी किया वित्तीय वर्ष 2026-27 का ई-नीलामी कैलेंडर

चालू वित्तीय वर्ष में रेल मंडल का ₹40 करोड़ राजस्व प्राप्ति का लक्ष्य

अवध किशोर शर्मा/सारण (बिहार)। पूर्व मध्य रेलवे के हद में सोनपुर रेल मंडल ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए एक अप्रैल को अपना विस्तृत ई-नीलामी कैलेंडर जारी कर दिया है। कार्य में पारदर्शिता और राजस्व वृद्धि की दिशा में इसे एक सशक्त कदम माना जा रहा है।

सोनपुर के मंडल रेल प्रबंधक (डीआरएम) अमित सरन ने वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक रौशन कुमार एवं अन्य वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में उपरोक्त कैलेंडर का औपचारिक अनावरण किया। जिसमें ​राजस्व और पारदर्शिता पर विशेष ध्यान दिया गया है।

रेलवे के ​इस पहल का मुख्य उद्देश्य गैर-किराया राजस्व में सतत वृद्धि सुनिश्चित करना है। ई-नीलामी कैलेंडर एक सुव्यवस्थित दस्तावेज़ है जो पूरे वर्ष की नीलामियों की तिथियों, श्रेणियों और प्रक्रियाओं का अग्रिम विवरण प्रदान करता है।

​कैलेंडर के मुख्य उद्देश्य में ​ संभावित बोलीदाताओं को समय रहते जानकारी देना शामिल है। इसके अलावा अधिक से अधिक निवेशकों और व्यापारियों को जोड़ना शामिल है। निष्पक्ष बोली प्रक्रिया के माध्यम से बेहतर मूल्य निर्धारण एवं पूरी प्रक्रिया को मानवीय हस्तक्षेप से मुक्त और पारदर्शी बनाना शामिल है।

सोनपुर मंडल की उपलब्धियां: एनएफआर दक्षता शील्ड से सम्मानित

ज्ञात हो कि ​सोनपुर रेल मंडल ने पिछले कुछ वर्षों में गैर-किराया राजस्व (एनएफआर) और विविध आय के क्षेत्र में रिकॉर्ड सफलता हासिल की है। रेल ​मंडल ने विविध आय के माध्यम से लगभग ₹25 करोड़ का राजस्व अर्जित किया है।
​एनएफआर लक्ष्यों में 20 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई है।

​इन उपलब्धियों के कारण मुख्यालय द्वारा सोनपुर मंडल को ”
एनएफआर दक्षता शील्ड से नवाजा गया है, जो पूर्व मध्य रेल में सर्वाधिक वृद्धि का प्रमाण है। नए ई-नीलामी कैलेंडर के माध्यम से रेलवे अपनी संपत्तियों के अधिकतम उपयोग की योजना बना रहा है।

वित्तीय वर्ष 2026–27 के लिए रेल मंडल ने निम्नलिखित वित्तीय लक्ष्य निर्धारित किए हैं जिनमें एनएफआर अनुबंधों से लगभग ₹15 करोड़ एवं विविध आय से कुल ₹40 करोड़ शामिल है।  विभाग द्वारा कहा गया कि सोनपुर रेल मंडल नवाचार और डिजिटल प्रक्रियाओं के माध्यम से व्यावसायिक गतिविधियों को सशक्त बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। यह कैलेंडर हितधारकों की सक्रिय भागीदारी बढ़ाने और रेलवे के लिए अधिकतम राजस्व सृजन की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।

 

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