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कसमार में संस्कृत संभाषण प्रतियोगिता शिविर का भव्य आयोजन

रंजन वर्मा/कसमार (बोकारो)। बोकारो जिला के हद में कसमार प्रखंड संस्कृत भारती इकाई द्वारा बीते 9 मार्च से आधिकारिक तौर पर संभाषण शिविर का आयोजन किया गया था। शिविर के अंतिम बीते 28 मार्च को सम्मिलित बच्चों को विशेष रूप से संस्कृत भाषा बोलने के लिए सिखाया गया।

शिविर में मुख्य भूमिका निभाने वाले +2 विद्यालय कसमार के पूर्व छात्र प्रमोद कपरदार, ब्रजेश कुमार महतो और सौरभ कुमार महतो ने कसमार प्रखंड के हद में ग्राम धधकिया के महिला सामुदायिक भवन में संस्कृत संभाषण समारोह का आयोजन किया। समारोह में अतिथियों का स्वागत गीत एवं पुष्प गुच्छ देकर किया गया। साथ ही समारोह का आरंभ दीप प्रज्वलन से किया गया। जिसमें मुख्य व विशेष अतिथि के रूप में प्लस टू उच्च विद्यालय कसमार के संस्कृत शिक्षक डॉ रंजीत कुमार झा एवं आईसीटी शिक्षक नितेश कुमार प्रजापति उपस्थित थे।

समारोह में सत्यम कुमार, ऋषि कुमार, रौनक रजवार, विवेक रजवार, दीपिका कुमारी और साक्षी कुमारी द्वारा एकल गीत संस्कृत में गाकर सभी का मन मोह लिया। सामूहिक गीत में रोशनी कुमारी, डोली कुमारी, साक्षी कुमारी, विवेक रजवार, ऋषि कुमार, सत्यम कुमार, बरखा कुमारी,ईशानी कुमारी ने उत्कृष्ट प्रदर्शन किया।

इस अवसर पर बच्चों के उत्साहवर्धन हेतु कॉपी, कलम, पेंसिल तथा शिविर में उत्तम संस्कृत प्रदर्शन करने वाले सत्यम कुमार, साक्षी कुमारी और डोली कुमारी को गोल्ड, सिल्वर और ब्रॉन्ज मेडल देकर उत्साहित किया गया। मौके पर संस्कृत शिक्षक डॉ रंजीत कुमार झा ने बताया कि संस्कृत क्यों पढ़ना चाहिए? उन्होंने संस्कृत के अर्थ को बताते हुए कहा कि संस्कृत माने शुद्ध परिष्कृत है। कहा कि संस्कृत सभी भाषाओं की जननी है। संस्कृत भाषा के ज्ञान से आप शुद्ध शब्दों का चयन आसानी से कर सकते हैं।

उन्होंने कहा कि यदि आप शुद्ध भोजन की इच्छा रखते हैं तो आपको एक शुद्ध भाषा की इच्छा भी होनी चाहिए। साथ ही उन्होंने बताया कि संस्कृत पढ़कर आप विभिन्न क्षेत्रों में रोजगार हासिल कर सकते हैं। इंजीनियरिंग का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि जब देश में अंग्रेज नहीं आए थे उससे पूर्व क्या हमारे देश में इंजीनियर नहीं थे? यदि नहीं तो अंग्रेजों से पूर्व की विशाल किले देश में कैसे मौजूद है?

सभा को संबोधित करते हुए आईसीटी शिक्षक नीतीश कुमार ने बताया कि शुद्ध एवं परस्कृत भाषा का ज्ञान रखना आवश्यक है। यदि बच्चे शुद्ध-शुद्ध लिखना पढ़ना और बोलना जान जाएंगे तो भविष्य में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर सकेंगे। इस दौरान उपस्थित बच्चों में संस्कृत के प्रति काफी उत्साह देखा गया। बच्चों में संस्कृत भाषा के प्रति उत्साह को देखते हुए संस्कृत शिक्षक डॉ झा का कहना है कि इस शिविर के आयोजन से वाकई में बच्चों ने संस्कृत बोलना शुरू किया है। अभिभावकों तथा गणमान्य अतिथिगण में मुकेश कपरदार, दिलीप कपरदार, संतोष कपरदार, बेबी देवी, रेणु देवी, मीना देवी लीला देवी, सष्टि देवी, रीना देवी आदि ने अपना बहुमूल्य समय देकर बच्चों का उत्साह वर्धन किया।

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