एस. पी. सक्सेना/रांची (झारखंड)। कहावत है कि होनहार विरवान् के होत चिकने पात। इस कहावत को चरितार्थ कर रही है सीसीएल के सेवानिवृत खनन अधिकारी कुंवर कांत झा की पुत्री गीतांजलि झा।
अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के विशेष अवसर पर लेखिका गीतांजलि झा की नई पुस्तक प्रिंसेस बाय बर्थ, हिस्ट्री मेकर बाय चॉइस: द अनहर्ड इकोज़ ऑफ द महाभारत वुमेन का लोकार्पण एक प्रेरणादायक पहल के रूप में सामने आया है। यह पुस्तक केवल एक कथा नहीं, बल्कि उन स्त्रियों की आवाज़ है जिनकी कहानियाँ इतिहास और महाकाव्यों के बीच कहीं दब कर रह गई है।
वकौल गीतांजलि महाभारत के पन्नों में अक्सर युद्ध, वीरता और राजसत्ता की कहानियाँ प्रमुखता से दिखाई देती हैं, लेकिन इन घटनाओं के पीछे खड़ी स्त्रियों के साहस, त्याग और निर्णयों की गूंज बहुत कम सुनाई देती है। यह पुस्तक उन्हीं अनसुनी प्रतिध्वनियों को सामने लाती है। इसमें गांधारी, कुंती, माद्री और द्रौपदी जैसी स्त्रियों के जीवन को एक नए दृष्टिकोण से देखा गया है, जहाँ वे केवल परिस्थितियों की शिकार नहीं, बल्कि अपने निर्णयों से इतिहास की दिशा तय करने वाली सशक्त व्यक्तित्व बनकर उभरती हैं।
गीतांजलि झा ने अपनी लेखनी के माध्यम से यह दिखाने का प्रयास किया है कि स्त्री की शक्ति केवल त्याग में नहीं, बल्कि उसके विचारों, साहस और विकल्पों में भी निहित होती है। यह पुस्तक पाठकों को यह सोचने पर मजबूर करती है कि यदि इतिहास को स्त्रियों की दृष्टि से देखा जाए, तो उसकी कई परतें और अर्थ सामने आते हैं।
महिला दिवस के अवसर पर इस पुस्तक का प्रकाशन विशेष महत्व रखता है। यह हर एक महिला को यह याद दिलाती है कि जन्म से भले ही वह प्रिंसेस हो, लेकिन अपने साहस, निर्णय और कर्मों से वह इतिहास रचने की क्षमता रखती है।
प्रिंसेस बाय बर्थ, हिस्ट्री मेकर बाय चॉइस पुस्तक आज की महिलाओं के लिए एक प्रेरणा है अपने भीतर की शक्ति को पहचानने और अपनी कहानी खुद लिखने की प्रेरणा। ज्ञात हो कि पुस्तिका की लेखिका गीतांजलि के पिता के. के. झा झारखंड के बोकारो जिला के हद में सीसीएल कथारा क्षेत्रीय कार्यालय से विभागाध्यक्ष संरंक्षा (सेफ्टी) के पद से सेवानिवृत सीसीएल अधिकारी हैं।
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