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हम जीवन को बचाने वाले है, आदिवासी होने पर करें गर्व-उपायुक्त

जाहेर थान में आयोजित दिशोम बाहा महोत्सव में शामिल हुए उपायुक्त

एस. पी. सक्सेना/बोकारो। बोकारो के सेक्टर चार स्थित जाहेर थान में दिशोर जाहेर सेवा ट्रस्ट द्वारा आयोजित दिशोम बाहा महोत्सव श्रद्धा, आस्था और सांस्कृतिक उल्लास के साथ एक मार्च को संपन्न हो गया। कार्यक्रम में जिला उपायुक्त (डीसी) अजय नाथ झा मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए और आदिवासी समाज को बाहा महोत्सव की शुभकामनाएं दी।

इस अवसर पर उपायुक्त झा ने कहा कि आदिवासी समाज प्रकृति का रक्षक और जीवन मूल्यों का संवाहक है। हम जीवन को बचाने वाले हैं। आदिवासी होना हमारी पहचान ही नहीं, हमारा गर्व है। उन्होंने कहा कि बाहा महोत्सव प्रकृति के प्रति कृतज्ञता प्रकट करने का पर्व है, जो सामुदायिक एकता, परंपरा और सांस्कृतिक गौरव को सशक्त करता है।

उन्होंने कहा कि झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के मार्गदर्शन में बोकारो में एक भव्य और विश्वस्तरीय आदिवासी सांस्कृतिक केंद्र स्थापित करने का लक्ष्य है। कहा कि यह ऐसा केंद्र बनेगा जहां विश्व भर की आदिवासी संस्कृति का विदर्शन होगा। देश-विदेश से जिज्ञासु आकर आदिवासी संस्कृति, इतिहास, कला, परंपरा और जीवन शैली को करीब से देख और समझ सकेंगे। यह पहल आने वाली पीढ़ियों को अपनी जड़ों से जोड़ने का माध्यम बनेगी तथा बोकारो को सांस्कृतिक पहचान के नए आयाम प्रदान करेगी।

डीसी झा ने दिशोम गुरु शिबू सोरेन के बताए मार्ग को जीवन में आत्मसात करने की युवा पीढ़ी से अपील की। उन्होंने कहा कि समाज की उन्नति शिक्षा, जागरूकता और सामाजिक सुधार से ही संभव है। उन्होंने युवाओं से रात्रि पाठशाला (नियमित पठन-पाठन) और नशा मुक्ति अभियान को अपनाने का आह्वान किया, ताकि आदिवासी समाज मजबूत और सशक्त बन सके। झा ने उपस्थित महिलाओं, बेटियों और माताओं को संबोधित करते हुए कहा कि वे समाज की सबसे बड़ी शक्ति हैं। उन्होंने कहा कि बेटी, बहन और मां केवल परिवार की आधारशिला नहीं, बल्कि वे समाज और राष्ट्र निर्माण की प्रेरक शक्ति हैं। हमें पढ़ना है और पढ़ाना है। कहा कि शिक्षा ही वह माध्यम है, जो समाज को जागरूक, आत्मनिर्भर और सशक्त बनाती है।

उन्होंने उपस्थित युवतियों से आग्रह किया कि वे शिक्षा को अपना सबसे बड़ा हथियार बनाएं और आत्मनिर्भर बनने की दिशा में निरंतर प्रयास करें। साथ ही अभिभावकों से भी अपील की कि वे बेटियों की शिक्षा को प्राथमिकता दें और उन्हें आगे बढ़ने का अवसर प्रदान करें। कहा कि अपने देश व अपनी मातृभूमि के लिए हमें अपना योगदान देना है। हमें अपने जीवन को राष्ट्र के प्रति समर्पित करने का संकल्प लेना चाहिए।

उपायुक्त ने कहा कि आदिवासियत को जीवंत रखना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। कहा कि हम सब मिलकर जीवंत बोकारो का निर्माण करेंगे और अपनी सांस्कृतिक धरोहर को सुरक्षित रखेंगे। उन्होंने कहा कि बाहा महोत्सव केवल उत्सव नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता, भाईचारे और सांस्कृतिक चेतना का प्रतीक है।

कार्यक्रम के दौरान पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ पूजा-अर्चना की गई। लोकनृत्य एवं सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने पूरे वातावरण को उत्साह और भक्ति से भर दिया। मौके पर ट्रस्ट के अध्यक्ष रविंद्र नाथ हांसदा, सचिव कृष्णा सोरेन एवं बड़ी संख्या में समाज के गणमान्य, ट्रस्ट के पदाधिकारी एवं सैकड़ो की संख्या में श्रद्धालुगण उपस्थित रहे।

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