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महज एक शिक्षक के भरोसे 101 छात्रों का भविष्य

75 साल पुराने स्कूल के प्रति शिक्षा विभाग मौन, टीडीएफ के अध्यक्ष जंगले ने उठाये सवाल

कार्यालय संवाददाता/मुंबई। राज्य सरकार द्वारा संचालित गोरेगांव (पूर्व ) की एक 75 साल पुरानी रात्री विद्यालय मौजूदा समय अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही है। इसकी विद्यालय की हालात बद से बत्तर हो चुके हैं। इस विद्यालय में 101 छात्रों के लिए सिर्फ एक ही शिक्षक ज्ञानदेव घुगे हैं, जो वर्ग 8वीं से 10 तक के सभी विषयों को पढ़ाने के साथ-साथ पूरी प्रशासनिक जिम्मेदारियों को भी संभाल रहे हैं। यह विद्यालय साल 1950 में स्थापित हुई थी और मुंबई की सबसे पुरानी रात्री विद्यालयों में से एक है। यहां पढ़ने वाले ज्यादातर कामकाजी वर्ग के छात्र हैं, जो दिनभर मेहनत मजदुर करने के बाद यहं पढ़ने आते हैं, ताकि उन्हें पदोन्नति, वेतन वृद्धि और बेहतर कैरियर के अवसर मिल सकें।

101 छात्रों के लिए सिर्फ एक शिक्षक

इस शैक्षणिक वर्ष में कुल 101 छात्रों का नामांकन हुआ हैं। लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि इस विद्यालय में कोई प्रधानाध्यापक नहीं है, और लिपिक या चपरासी का भी कोई अता पता नहीं रहता है। इस तरह पूरा प्रतिष्ठान एक ही शिक्षक के भरोसे चल रहा है। यहां के छात्रों का कहना है कि इससे उनकी पढ़ाई और परीक्षा की तैयारियों पर बुरा असर पड़ रहा है।

एक छात्र ने बताया, “हम दिन में काम करते हैं और रात को पढ़ाई करने आते हैं, ताकि “भविष्य सुरक्षित किया जा सके। लेकिन जब हर विषय के लिए सिर्फ एक शिक्षक है, तो उचित समझ और सवालों के हल ढूंढना या संदेह दूर करना मुश्किल हो जाता है। परीक्षा में कैसे अच्छा अंकों से पास करेंगे? यह शिक्षा संकट की स्थिति का साफ उदाहरण है, जहां सरकारी स्कूल की आधारभूत संरचना पूरी तरह से गिरने के कगार पर है।

मुंबई नाइट स्कूल में बड़ी गड़बड़ी

मुंबई की नाइट स्कूल सिस्टम मुख्य रूप से कामकाजी बच्चों युवाओं और वयस्कों के लिए शाम 5:30 से रात 10:30 बजे तक संचालित किया जाता है ,जोकि औपचारिक शिक्षा प्रणाली है। गोरेगांव की यह स्थिति एकाकी मामला नहीं है। शिक्षक लोकतांत्रिक शिक्षक मोर्चा (TDF) मुंबई के अनुसार, मुंबई की 92 रात्रि विद्यालयों में से 21 विधालय बंद होने के कगार पर हैं। वहीं एक गैर सरकारी संस्था (NGO ) स्थायी समाधान का समर्थन करता है। संस्था का मानना है कि नियमित शिक्षक, प्रधानाध्यापक, लिपिक और चपरासी की नियुक्ति जरूरी है, तभी विद्यालय सुचारू रूप से संचालित हो पाएगा।

टीडीएफ का आरोप वेतन भी नहीं मिली

डेमोक्रेटिक टीचर्स फ्रंट के मौजूदा अध्यक्ष जनार्धन जंगले ने खुलासा किया है कि गोरेगांव रात्री स्कूल के एकमात्र अध्यापक को पिछले कुछ महीनों से वेतन भी नहीं मिली है। उन्होंने सवाल उठाया, “अगर एक मात्र शिक्षक बीमार पड़ जाए या किसी वजह से अनुपस्थित हो जाए, तो 101 छात्रों का क्या होगा?” इस मुद्दे पर टीडीएफ ने 2024 में सरकार को कानूनी नोटिस भेजा था और 2025 में मुंबई हाई कोर्ट में जनहित याचिका (PIL) भी दायर की। अदालत के निर्देश पर प्रधान सचिव रणजीत सिंग देओल के साथ बैठक भी हुई, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई पर्याप्त सुधार नहीं हुआ।

छात्रों के लिए मानदंड और शिक्षक समस्या

कई रात्री विधालय में निर्धारित छात्रों के मानदंड को पूरी नहीं कर पा रही हैं। इसका नतीजा यह है कि जरूरत होने के बावजूद शिक्षक को अतिरिक्त बता कर हटा दिया जाता है, बजाय इसके कि उन्हें जरूरत के अनुसार कमी वाले स्कूल में स्थाई रूप से बहाल किया जाए। विशेषज्ञों का मानना है कि रात्रि विधालयों के लिए अलग नीति ढांचा होना चाहिए, क्योंकि इनका कामकाज का समय और चुनौतियां अलग होते हैं।

विरोध प्रदर्शन की चेतावनी

Teachers Democratic Front (TDF) ने रिक्त पदों को तुरंत भरने की मांग की हैl जिसमें शिक्षक, प्रधानाध्यापक, लिपिक और चपरासी भी शामिल हैं। संस्था ने साफ चेतावनी दी है कि अगर सरकार ने तत्काल सुधारात्मक कदम नहीं उठाए, तो आंदोलन तय है।

अध्यक्ष जनार्धन जंगले

गोरेगांव रात्रि विद्यालय का मामला सिर्फ एक विद्यालय की कहानी नहीं है, बल्कि मुंबई में चल रहे सभी रात्रि विद्यालयों और प्रणाली की जमीनी हकीकत को उजागर करता है। जहां एक तरफ कौशल विकास, शिक्षा सुधारऔर डिजिटल इंडिया जैसे विशिष्ट शब्द चर्चा में हैं, वहीं दूसरी तरफ 101 छात्रों का भविष्य सिर्फ एक शिक्षक के भरोसे है। अब देखना होगा कि राज्य सरकार और शिक्षा विभाग इस मुद्दे पर क्या कदम उठाते हैं।

Tegs: #The future of 101 students depends on just one teacher

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