रंजन वर्मा/गोमियां (बोकारो)। स्वास्थ्य एवं पर्यावरण संरक्षण संस्थान द्वारा झारखंड के अमर स्वतंत्रता सेनानियों की स्मृति को चिरस्थायी बनाने के उद्देश्य से चलाए जा रहे अभियान के तहत 5 फरवरी को अमर स्वतंत्रता सेनानी शहीद वीर बुधु भगत तथा उनके शहीद पुत्र-पुत्रियों की जन्मस्थली से पवित्र मिट्टी एकत्र की गई।
संस्थान की चार सदस्यीय टीम ने महासचिव शशि भूषण ओझा ‘मुकुल’ के नेतृत्व में रांची जिला के हद में चानहो प्रखंड के सीलागाई गांव स्थित वीर बुधु भगत के जन्मस्थल पर पहुंचकर उनके परिजनों बिंदेश्वर भगत एवं रामदेनी भगत के कर कमलों से पवित्र मिट्टी प्राप्त की। यह मिट्टी बोकारो एवं रांची में वृक्षारोपण हेतु उपयोग की जाएगी, जहां लगाए गए पौधों को अमर स्वतंत्रता सेनानियों के नाम से जाना जाएगा।
जानकारी के अनुसार पवित्र मिट्टी संग्रह के उपरांत संस्थान द्वारा शहीद वीर बुधु भगत के परिजनों को आम का पौधा भेंट किया गया तथा आग्रह किया गया कि इसे शहीदों की स्मृति में रोपित किया जाए। इस अवसर पर टीम में शशि भूषण ओझा ‘मुकुल’ के अलावा रोहित कुमार सिंह, अनुराग मिश्र एवं मिथिलेश सिंह शामिल रहे।
ज्ञात हो कि वर्ष 1792 में जन्मे वीर बुधु भगत ने अंग्रेजी हुकूमत के अत्याचारों के विरुद्ध 1831-32 ईस्वी में कोल विद्रोह एवं लेरिका विद्रोह का नेतृत्व करते हुए अंग्रेजों को इस क्षेत्र से खदेड़ दिया था। अंग्रेजों ने कैप्टन इंपी के नेतृत्व में बड़ी सेना भेजकर वीर बुधु भगत, उनके पुत्र गिरधर एवं हलधर तथा पुत्रियां रुनिया और झुनिया को पकड़ने का प्रयास किया, लेकिन सभी देश की रक्षा करते हुए वीरगति को प्राप्त हुए। वीर बुधु भगत का पूरा परिवार बलिदान देकर अमर हो गया।
इसके बाद अंग्रेजों द्वारा उनका घर तोड़ दिया गया, संपत्ति हड़प ली गई तथा परिवार के अन्य सदस्यों को भी अमानवीय यातनाएं दी गईं। आजादी के इतने वर्षों बाद भी वीर बुधु भगत के परिजन सरकारी उपेक्षा का दंश झेल रहे हैं। न तो उनके पास पक्का आवास है और न ही परिवार के किसी सदस्य को सरकारी नौकरी मिली है। खेती-बाड़ी पर निर्भर ये परिवार अत्यंत कष्टमय जीवन व्यतीत कर रहा है।

परिजनों ने मांग की कि सरकार द्वारा सिंचाई के लिए पंपिंग सेट एवं ट्रैक्टर उपलब्ध कराया जाए। साथ ही गांव में अस्पताल और बैंक की स्थापना की जाए तथा झखरा कुंबा एवं स्मारक स्थल पर वृक्षारोपण कराया जाए। वीर बुधु भगत के जन्मस्थल पर बना घर पूरी तरह खंडहर में तब्दील हो चुका है, जिसे लेकर ग्रामीणों ने वहां उनके नाम पर स्मृति भवन निर्माण की मांग की है।
इस अवसर पर संस्थान के महासचिव शशि भूषण ओझा ‘मुकुल’ ने कहा कि यह अत्यंत दु:खद और चिंताजनक है कि जिन स्वतंत्रता सेनानियों ने देश की आज़ादी के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया। आज उनके परिजन बुनियादी सुविधाओं से भी वंचित हैं। सरकार को अविलंब ऐसे शहीद परिवारों के पुनर्वास, सम्मान और संरक्षण की दिशा में ठोस कदम उठाने चाहिए। कहा कि शहीदों की स्मृति को जीवित रखना केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि उनके परिजनों के सम्मानजनक जीवन की व्यवस्था करना ही सच्ची श्रद्धांजलि है।
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