एस. पी. सक्सेना/पटना (बिहार)। पटना (बिहार)। बिहार की राजधानी पटना के राजेंद्र नगर स्थित प्रेमचंद रंगशाला में आयोजित तीन दिवसीय कला, संस्कृति कार्यक्रम इंद्रधनुष का एक फरवरी को विधिवत समापन कर दिया गया। इस अवसर पर रंगारंग कार्यक्रम के माध्यम से एक से बढ़कर एक अद्भुत कला का प्रदर्शन किया गया।
जानकारी देते हुए कार्यक्रम के मीडिया प्रभारी मनीष महीवाल ने बताया कि पूर्व क्षेत्रीय सांस्कृतिक केंद्र, कोलकाता द्वारा उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र, प्रयागराज, उत्तर प्रदेश; संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार तथा कला, संस्कृति एवं युवा विभाग, बिहार सरकार के सहयोग से 30 जनवरी से 1 फरवरी तक तीन दिवसीय राष्ट्रीय नृत्य, शिल्प एवं व्यंजन महोत्सव इंद्रधनुष का आयोजन प्रेमचंद रंगशाला राजेंद्र नगर पटना किया गया।
महीवाल के अनुसार पूर्व क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र (ईजेडसीसी) कोलकाता, संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार द्वारा स्थापित सात ऐसे क्षेत्रीय सांस्कृतिक केंद्रों में से एक है, जिसका उद्देश्य राष्ट्रीय एकीकरण कार्यक्रम के हिस्से के रूप में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को सांस्कृतिक रूप से एकीकृत करना है। इस केंद्र के अंतर्गत असम, बिहार, झारखंड, मणिपुर, ओडिशा, सिक्किम, त्रिपुरा, पश्चिम बंगाल और केंद्र शासित प्रदेश अंडमान और निकोबार द्वीप समूह आते हैं।
क्षेत्रीय सांस्कृतिक केंद्र (जेडसीसी) सरकार और जनता की ओर से हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित और सुरक्षित रखने और इसे आमजनों के जीवन के करीब लाने के प्रयास का प्रतिनिधित्व करते हैं। सात क्षेत्रीय सांस्कृतिक केंद्रों के मुख्य उद्देश्यों में संगीत, नृत्य, रंगमंच, दृश्य कलाओं, साहित्यिक गतिविधियों और शिल्प परंपराओं के व्यापक अनुशासनों को शामिल करते हुए विभिन्न कला रूपों का संरक्षण, नवाचार और प्रचार- प्रसार शामिल हैं, जिसमें लुप्तप्राय कलारूपों पर विशेष ध्यान दिया जाता है।
महीवाल ने बताया कि वर्ष 1985 में अपनी स्थापना के बाद से पूर्व क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र देश के पूर्वी भाग में कई जातीय सांस्कृतिक केंद्रों तथा उत्कृष्ट समूहों के बीच सांस्कृतिक माध्यम के रूप में कार्य कर रहा है तथा लोक, आदिवासी और शास्त्रीय संगीत और नृत्य, प्रलेखन और प्रकाशन, कार्यशालाओं तथा कला एवं शिल्प प्रदर्शनियों के माध्यम से अपने क्षेत्र के साथ- साथ देश के अन्य हिस्सों की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को फैलाने में सक्षम रहा है।
कहा कि राष्ट्रीय नृत्य, शिल्प एवं व्यंजन महोत्सव इंद्रधनुष के सात पहलुओं यथा लोक नृत्य, लोक गीत, लोक नाटक, लोक चित्रकला, पारंपरिक वेशभूषा, लोकशिल्प और व्यंजनों को दर्शाता है। पूर्व क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र के इस प्रतिष्ठित महोत्सव में भारत के लगभग 500 लोक एवं आदिवासी कलाकार- शिल्पकारो ने भाग लिया तथा ओडिशा के घुबुकुडू नृत्य, पश्चिम बंगाल के बोरोमेच नृत्य, असम के बिहू नृत्य, राजस्थान के कालबेलिया नृत्य, उत्तर प्रदेश के होली और मयूर नृत्य, उत्तराखंड के छपेली नृत्य, बिहार के झिझिया और जट-जटिन आदि नृत्यों की ऊर्जापूर्ण सांस्कृतिक प्रस्तुति के साथ बिहार, बंगाल तथा उत्तर प्रदेश के पारंपरिक शिल्प और व्यंजन की जीवंत परंपराओं का समावेश किया गया।
बताया गया कि समापन समारोह का आयोजन एक फरवरी की संध्या 5:30 बजे उमेश सिंह एवं समूह द्वारा लोकगीत प्रस्तुत कर किया गया। संध्या 6 बजे रंग समूह पटना द्वारा बिहार का लोकनृत्य तथा 6:15 बजे भोजपुर माटी संस्कृति न्यास द्वारा बिदेसिया लोकगीत की प्रस्तुति की गयी। वहीं 6:45 बजे उदय सिंह एवं समूह ने बिहार का लोकनृत्य पेश किया तथा 7 बजे सभी राज्यों का पारंपरिक वेशभूषा प्रदर्शन, 7:30 बजे महोत्सव का समापन 7 राज्यों के लोक कलाकारों द्वारा कोरियोग्राफिक प्रस्तुति इंद्रधनुष का प्रदर्शन किया गया।
कार्यक्रम के अंत में तापस सामंतराय, उप निदेशक पूर्व क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र कोलकाता ने दर्शकों, आमंत्रित कलाकारों को धन्यवाद ज्ञापित कर तीन दिवसीय राष्ट्रीय नृत्य, शिल्प एवं व्यंजन महोत्सव इंद्रधनुष का समापन किया।
समापन कार्यक्रम में नृत्य संयोजन का काम राजीव कुमार रॉय ने किया। महोत्सव में अन्य राज्यों से आये कलाकारों यथा राजीब ठाकुर, राजासिंह ठाकुर, अनिल ठाकुर, कृष्णा नार्जिनरी, सुजीत ठाकुर, राजेन नार्जिनरी, लतिका नार्जिनरी, वीणापाणी ईश्वरारी, अर्थोना बसुमता, पुनुष्का ठाकुर, सादिया ठाकुर, देवी मोंगोर, माहिनी नार्जिनरी, सुपर्णा बोरो, रंजिला गबुर (पश्चिम बंगाल), बबीता सैकिया, देवव्रत सैकिया, देवप्रोतिम बोरा, भास्कर बोरा, रितुराज बोरा, पंकज कलिता, पल्लब बोरा, जिंटू सैकिया, गीताश्री गोगोई, नयना सैकिया, स्नेहा बोरा, टीना गोगोई, अनामिका महंता, प्रकृति दास (असम), पूनमजी निवास तथा कालबेलिया समूह (शामला, चंदा, जमना, कंसुबी, कांता, बिंदिया, गोरधननाथ, करननाथ, राजूनाथ, बाबुनाथ, जीवननाथ एवं भीमनाथ) (राजस्थान) ने भाग लिया। इस अवसर पर विभिन्न स्थानीय सांस्कृतिक संस्थाओं के प्रतिनिधि, कलाप्रेमी दर्शक आदि उपस्थित थे।
![]()













Leave a Reply