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आदिवासी अपना हक-अधिकार, अपनी मान्यता के लिए कर रहे संघर्ष-हेमंत

असम के तिनसुकिया में 21वीं आदिवासी महासभा में शामिल हुए सीएम हेमंत सोरेन

देश की अर्थव्यवस्था में झारखंड सबसे ज्यादा योगदान देने वाला राज्य-मुख्यमंत्री

एस. पी. सक्सेना/रांची (झारखंड)। झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने एक फरवरी को असम के तिनसुकिया में ऑल आदिवासी स्टूडेंट एसोसिएशन ऑफ आसाम द्वारा आयोजित 21वीं आदिवासी महासभा में शामिल हुए। मौके पर सीएम के साथ झारखंड के मंत्री, सांसद व् आदिवासी समुदाय के विधायक आदिवासी महासभा में शामिल थे।

आदिवासी महासभा को संबोधित करते हुए सीएम हेमंत सोरेन ने कहा कि यहां के आदिवासी समुदाय जो लगभग डेढ़ सौ वर्षों से यहां रह रहे हैं, उनसे रू-ब-रू होने का आज उन्हें मौका मिल रहा है। उन्होंने कहा कि झारखंड के वैसे सभी आदिवासी-मूलवासी समुदाय के जनमानस जो असम में रह कर अपना जीवन यापन कर रहे हैं उनकी तकलीफों, उन पर हो रहे अत्याचारों और व्यथा को सुनने के लिए वे आए हैं।

कहा कि कहीं न कहीं आप सभी का जुड़ाव भी झारखंड से बहुत पुराना रहा है। उन्होंने कहा कि झारखंड एक ऐसा प्रदेश है जब देश आजादी का सपना भी नहीं देखा था, उस समय हमारे पूर्वज अंग्रेजों के साथ आजादी की लड़ाई लड़ रहे थे। देश की आजादी में धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा, सिदो कान्हू, तिलका मांझी सहित झारखंड के अनगिनत वीर सपूतों का अहम योगदान रहा है, जिसे कभी भुलाया नहीं जा सकता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारे वीर सपूतों ने पीढ़ियों को बचाने, जल, जंगल, जमीन को बचाने के लिए अपना बलिदान दिया है। आदिवासी समाज ने ही अंग्रेजों से सबसे पहले लोहा लेने का काम किया था।आखिर किस कारण से आज देश के विभिन्न हिस्सों में आदिवासी समाज अपने हक-अधिकार की लड़ाई के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि आदिवासी, मूलवासी, दलित, पिछड़ा वैसे वर्ग है जो समाज के सबसे कमजोर एवं नीचे पायदान में रहने वाले हैं।

ऐसी क्या परिस्थिति आ गई जो यहां के आदिवासी-मूलवासी अलग-थलग होकर बिखरने को मजबूर हुए हैं। कहा कि देश के कई हिस्सों में आदिवासी समुदाय हाशिए पर रहकर अपना जीवन जी रहे हैं। इन विषयों पर गंभीर चिंतन की जरूरत है।
मौके पर मुख्यमंत्री सोरेन ने असम के कद्दावर आदिवासी नेता स्व. प्रदीप नाग एवं प्रसिद्ध गायक स्व. जुबिन गर्ग को श्रद्धांजलि अर्पित की।

मुख्यमंत्री सोरेन ने कहा कि देश आजाद हुए 75 साल हो गए हैं। देश में कई नीतियां-कानून बने। देश के संविधान से हमें रक्षा कवच मिला, बावजूद इसके आज हम कहां खड़े हैं। आज हमारा समाज कितना संघर्ष कर रहा है। यह बहुत बेहतर तरीके से आप सभी जानते हैं। कहा कि आज सामाजिक, आर्थिक और बौद्धिक रूप से आदिवासी समुदाय कमजोर है।

इसी कमजोरी का फायदा बड़े एवं सामंती विचारधारा वाले बहुत चालाकी से उठाते हैं। सीएम ने कहा कि उनके पिता दिशोम गुरु शिबू सोरेन आज हमारे बीच नहीं हैं, जब उन्होंने अलग राज्य की परिकल्पना की तो कुछ तथाकथित मजाक उड़ाते थे कि आदिवासी अलग राज्य बनाएंगे। आज सच्चाई पूरे देश के सामने हैं। वर्ष 2000 में अलग झारखंड राज्य बना। यह बात सही है कि उस समय क्या नारा लगता था, कैसे लेंगे झारखंड, लड़के लेंगे झारखंड। उस समय न मोबाइल, न गाड़ी, न मोटर उसके बावजूद झारखंड के रहिवासी जल, जंगल, जमीन की रक्षा के लिए चीटियों की तरह एकजुट हो जाते थे।

राज्य अलग हुआ लेकिन इसका फायदा आदिवासी समुदाय को नहीं मिला। हम सबको तो राज्य लेना था, हमारे अग्रणी नेताओं ने सोचा कि राज्य अलग होगा तो यहां के आदिवासियों-मूलवासियों का विकास होगा। झारखंड राज्य अलग होने के बाद बौद्धिक रूप से मजबूत वर्ग ने 15 वर्ष से ज्यादा समय तक झारखंड को पीछे धकेलने का काम किया। नतीजा यह हुआ कि राशन कार्ड लेकर रहिवासी भात-भात कहते हुए भूख से मरने को विवश हुए। फिर हमने प्रखंड-प्रखंड, गांव-गांव, टोला-टोला पहुंचकर आमजनों को जागरूक करने का काम किया। हमें राज्य की बागडोर संभालने का मौका दिया गया। राज्य का बागडोर संभालते ही हमने 5 साल के भीतर स्थिति को बदलने की कोशिश की और हमें सफलता भी मिली।

उन्होंने कहा कि वैसे गरीब, पीड़ित, शोषित, आदिवासी, मूलवासी समुदाय जो कभी जिला ऑफिस, प्रखंड कार्यालय नहीं देखे थे, बीडीओ, सीओ, डीसी, एसपी को नहीं जानते थे। उनतक हमने राज्य सरकार की कल्याणकारी योजनाओं को पहुंचाने का काम किया है।

आदिवासी अपना हक-अधिकार, अपनी मान्यता के लिए कर रहे संघर्ष

आदिवासी महासभा में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि देश में रहते हुए हमारे यहां के आदिवासी अपना हक-अधिकार, अपनी मान्यता के लिए संघर्षशील हैं। आज आदिवासियों के हितैषी बनने वाले आदिवासियों को ही हाशिए पर रखने के लिए उतारू हैं। वे जानते हैं कि आदिवासी समाज अगर आर्थिक और बौद्धिक रूप से मजबूत हो गया तो वे अपनी हक-अधिकार, जल-जंगल-जमीन की बात करेंगे।

उन्होंने कहा की जरूरत पड़ने पर आसाम में रहने वाले आदिवासियों की मदद करने के लिए पूरा झारखंड का आदिवासी समाज आगे आकर खड़ा होगा। सोरेन ने कहा कि आदिवासी समुदाय की एकजुटता ही हमारी पहचान है। पहले दुनिया हमारी एकजुटता का लोहा मानती थी। हिंदू, मुस्लिम, सिख, इसाई सभी वर्ग-समुदाय के रहिवासियों की एकजुटता देश को मजबूती प्रदान करती है, लेकिन पिछले कुछ समय से बौद्धिक और आर्थिक रूप से समृद्ध वर्ग ने हमारी एकजुटता पर प्रहार करने का काम किया है।

मुख्यमंत्री सोरेन ने कहा कि देश की अर्थव्यवस्था में झारखंड सबसे ज्यादा योगदान देने वाला राज्य है। हमारी सरकार ने यह तय किया है कि इस राज्य ने बहुत कुछ दिया है अब इस राज्य को वापस देने की जरूरत है। हमारे राज्य के संसाधन का सही मूल्य मिले, इस पर हम बेहतर कार्यपद्धति से आगे बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि पहली बार विश्व आर्थिक मंच (वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम) के वार्षिक सम्मेलन में एक आदिवासी मुख्यमंत्री के नेतृत्व में झारखंड ने अपनी ऐतिहासिक उपस्थिति दर्ज किया है।

आज झारखंड ने वैश्विक पटल पर अपनी बातें पहुंचाई है। कहा कि हमारी सरकार ने राज्य की आधी आबादी को आत्मनिर्भरता की राह पर ले जाने का काम कर दिखाया है। प्रत्येक माह राज्य की लगभग 55 लाख महिलाओं को मुख्यमंत्री मंईयां सम्मान योजना के तहत उनके बैंक खाते में 2500 रुपए की राशि भेजी जा रही है। सीएम ने कहा कि अब हमारे विकास मॉडल की कॉपी दूसरे राज्य कर रहे हैं। मुख्यमंत्री मंईयां सम्मान योजना की राशि पिछले दो वर्षों से निरंतर यहां की महिलाओं को मिल रहा है। कहा कि हमारी सरकार ने झारखंड के नौजवानों के लिए कई महत्वाकांक्षी स्कीम्स लागू किए हैं। यहां के विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के लिए 15 लख रुपए तक का एजुकेशन लोन बिना कोई गारंटी के उपलब्ध कराई जा रही है।

इस अवसर पर झारखंड सरकार के मंत्री चमरा लिंडा, सांसद विजय हांसदा, विधायक मो. ताजुद्दीन उर्फ एमटी राजा, एएसएसएए सेंट्रल कमेटी के अध्यक्ष रेजन होरो, उपाध्यक्ष डेविड तिर्की, अमरजीत केरकेट्टा, अल्बर्ट ओरिया सहित अन्य सदस्यगण, असम के कोने-कोने से बड़ी संख्या में पहुंचे महिला, पुरुष, नौजवान, बच्चे, बच्चियां सहित आदिवासी समुदाय के गणमान्य उपस्थित थे।

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