फूलों की रंगोली और तोरणों से सजा सोनपुर स्थित श्रीगजेन्द्र मोक्ष मंदिर प्रांगण
अवध किशोर शर्मा/सारण (बिहार)। सारण जिला के हद में विश्व प्रसिद्ध हरिहरक्षेत्र सोनपुर स्थित श्रीगजेंद्र मोक्ष देवस्थानम दिव्य देश नवलखा मंदिर में 31 जनवरी को 27वें श्रीब्रह्मोत्सव सह श्रीलक्ष्मी नारायण महायज्ञ के पांचवें दिन भगवान बालाजी के कल्याणम् (विवाह) का आयोजन किया गया।
पूरे मंदिर परिसर को शादी – समारोह की तरह सुसज्जित किया गया। फूलों की रंगोली और तोरणों से सजे मंदिर में शहनाइयों की गूंज के बीच प्रकांड विद्वानों द्वारा तेलगु रीति-रिवाज के अनुसार भगवान तिरुपति बालाजी वेंकटेश का देवी पद्मावती के साथ विवाह संपन्न कराया गया।
इस कल्याण महोत्सव – विवाह महोत्सव के अवसर पर संध्याकालीन बेला में हल्दी की विधि पूर्ण की गई।
विवाह से पूर्व की विधियों को संपन्न करने के उपरांत दुल्हावेशधारी भगवान श्रीबालाजी वेंकटेशजी रथ पर बैठ कर बरातियों के संग देवी पद्मावती के महल में अवस्थित विवाह मंडप पहुंचे। वैदिक विद्वानों के द्वारा द्वार – पूजा की रस्म, वर द्वारा कन्या निरीक्षण का कार्य संपन्न किया गया। उसके बाद विश्वकसेन पूजन, कलश स्थापन आदि किया गया। इसके बाद यज्ञ के यजमान दिलीप झा आदि के द्वारा कन्यादान की रश्म पूर्ण की गई।
इससे पूर्व जयमाला का कार्यक्रम किया गया। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु महिलाओं व पुरुष भक्तों ने नृत्य एवं गीत करते हुए भगवान के कल्याण महोत्सव को जीवंत बना दिया। विवाह मंच पर विद्वानों की टोली के साथ -साथ भजन गायकों की टोली की उपस्थिति मनोरम दृश्य उपस्थित कर रहा था।
मौके पर श्रीगजेंद्र मोक्ष देवस्थानम दिव्य देश पीठाधीश्वर जगद्गुरु रामानुजाचार्य स्वामी लक्ष्मणाचार्यजी महाराज द्वारा विवाह उत्सव में मौजूद सभी संत – महंतों एवं विद्वानों को मिथिला की परंपरा के अनुसार वरागत (बाराती) को पाग एवं शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया गया।
जनकपुर से पहुंचे संत स्वामी दाशरथीजी महाराज, चक्रपुर नेपाल से पहुंचे संत भक्ति सारजी महाराज, पालीगंज मठाधीश स्वामी कमलनयनाचार्यजी महाराज, डॉ रामचंद्राचार्यजी बाल व्यास के अलावा यज्ञ के यजमान दिलीप झा, सुधांशु सिंह, रत्न कुमार कर्ण, भोला सिंह, शंभूनाथ पांडेय, मनोज चौधरी, घनश्याम कर्ण, दिनेश कुमार दास,आशा पाठक आदि ने विवाहोत्सव में बड़ी भागीदारी निभाई।
जहां पर नारियों की पूजा नहीं होती है वहां देवता का वास नहीं होता-स्वामी लक्ष्मणाचार्य
हरिहरक्षेत्र के श्रीगजेन्द्र मोक्ष देव स्थानम दिव्यदेश पीठाधीश्वर जगद्गुरु रामानुजाचार्य स्वामी लक्ष्मणाचार्यजी महाराज ने भगवान श्रीबालाजी वेंकटेश एवं देवी पद्मावती के विवाह उत्सव के अवसर पर श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि जहां नारियों की पूजा नहीं होती है, वहां देवता का वास नहीं होता है। उन्होंने कहा कि सनातन हिन्दू समाज में विवाह महोत्सव से बड़ा कोई यज्ञ नहीं है।
यह 16 संस्कारों में से एक प्रमुख संस्कार है। कहा कि मनुष्य जीवन में पति और पत्नी का अन्योन्याश्रय संबंध होता है। पत्नी रथ है तो पति रथी। उन्होंने पति और पत्नी दोनों को एक दूसरे का पूरक बताते हुए कहा कि कभी एक दूसरे को धोखा नहीं दे। कभी भी अपने रिश्ते को कलंकित नहीं करें। एक दूसरे पर विश्वास रखें। केवल पत्नी ही पतिव्रता नहीं, पति भी एक पत्नी के व्रत का पालन करें।
उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम से बड़ा उदाहरण और क्या हो सकता है। कहा कि जो पत्नी अपने पति की अवहेलना करती है या पति दुष्कृत कर्म करता है, उसे इस लोक में निंदित होकर परलोक में यम यातना भोगना पड़ता है।
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