ममता सिन्हा/ तेनुघाट (बोकारो)। कोरोना वायरस (Coronavirus) महामारी के कारण इस लॉकडाउन के अंतर्गत सबसे ज्यादा असर रोज कमाने वाले पर पड़ रहा है। राज्य भर के लगभग तीस हजार अधिवक्ताओं एवं अधिवक्ता लिपिक पर भी इसका व्यापक असर देखा जा रहा है। लगभग डेढ़ महीने से न्यायालय बंद रहने के कारण उनके समक्ष आर्थिक संकट भी आ खड़ा हुआ है।
झारखंड बार काउंसिल के निर्देश पर तेनुघाट (Tenughat) अधिवक्ता संघ के सदस्यों ने 30 अप्रैल को सुबह 10:00 बजे से शाम 4:00 बजे तक अपने घरों में घर के परिवारों के साथ उपवास पर रहे। अधिवक्ता संघ के द्वारा राज्य सरकार से राहत पैकेज की मांग की गई। अधिवक्ता संघ के द्वारा राहत पैकेज की मांग का समर्थन कई राजनीतिक दलों ने भी किया है। राज्य सरकार के द्वारा अधिवक्ताओं के लिए किसी भी तरह का राहत पैकेज की घोषणा नहीं किया जाना निराशाजनक है। जिस कारण झारखंड बार काउंसिल 30 अप्रैल को राज्य भर के अधिवक्ताओं से उपवास के लिए आग्रह किया था। स्टेट बार काउंसिल के अध्यक्ष राजेंद्र कृष्णन के निर्देश पर बेरमो अधिवक्ता संघ के सदस्यों के द्वारा राज्यव्यापी उपवास का समर्थन किया गया। अधिवक्ता संघ के सदस्यों ने अपने घरों में ही सोशल डिस्टेंस का पालन कर उपवास किया।
इस बारे में संघ के अध्यक्ष कुमार अनंत मोहन सिन्हा उर्फ अंतू बाबू ने बताया कि अधिवक्ता की सुध बुध लेने वाला कोई नहीं है। न्यायालय बंद रहने के कारण अधिवक्ता एवं अधिवक्ता लिपिक की आर्थिक स्थिति खराब हो गई है। विरोध में राज्य भर के अधिवक्ताओं ने अपने अपने घरों में रहकर सामूहिक उपवास किया है। यहां मुख्य रूप से अधिवक्ता अरुण कुमार सिन्हा, जगदीश मिस्त्री, डीएन तिवारी,रमेंद्र कुमार सिंहा,सुभाष कटरियार,रतन कुमार सिन्हा,कुंदन कुमार, वैद्यनाथ शर्मा, राजीव कुमार तिवारी, सुशील सिंह, संजय सिंह, प्रमोद सिंह, राजेश सिंह सहित अन्य अधिवक्ता संघ के सदस्यों ने अपने-अपने घरों में रहकर सामूहिक उपवास रखा।
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