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डीएमएफटी न्यास परिषद की बैठक में विभिन्न योजनाओं के प्रस्ताव पर चर्चा

गिरिडीह सांसद ने पूर्व में किए गये कार्यों की जांच में विलंब को ले दिखाई तल्खी

मुखिया व् प्रमुखो ने केवल दर्शक बनाये जाने का लगाया आरोप

एस. पी. सक्सेना/बोकारो। बोकारो के कैंप टू स्थित शिबू सोरेन समृति भवन (टाउन हाल) सभागार में 29 नवंबर को जिला खनीज फाउंडेशन ट्रस्ट (डीएमएफटी) न्यास परिषद की बैठक आयोजित की गयी। बैठक की अध्यक्षता जिला उपायुक्त सह डीएमएफटी न्यास परिषद अध्यक्ष अजय नाथ झा ने किया।

बैठक में राज्य के पेयजल एवं स्वच्छता मंत्री योगेंद्र प्रसाद, गिरिडीह सांसद सीपी चौधरी, धनबाद सांसद ढुलू महतो, बेरमो विधायक कुमार जय मंगल (अनुप सिंह), चंदनकियारी विधायक उमाकांत रजक, बोकारो विधायक श्वेता सिंह, डुमरी विधायक जयराम कुमार महतो, जिप सदस्यगण, विभिन्न प्रखंडों के प्रमुख/ विभिन्न पंचायतों के मुखिया, जिले के वरीय पदाधिकारीगण आदि उपस्थित थे।

बैठक का संचालन जिला खनन पदाधिकारी सह डीएमएफटी के प्रभारी पदाधिकारी रवि कुमार ने किया। बैठक में गिरिडीह सांसद द्वारा पुर्व में डीएमएफटी में किए गये कार्यों की जांच में विलंब को लेकर तल्खी दिखाई गयी, जिसके कारण देर तक सांसद व् उपायुक्त के बीच नोकझोंक होता रहा। सांसद ने 15 दिनों के भीतर जांच रिपोर्ट देने की मांग की। बैठक से मीडिया कर्मियों को दुर रखा गया और बैठक स्थल के बाहर मीडिया सेंटर में मीडिया कर्मियों को बैठाया गया, जिससे मीडिया कर्मियों में कार्यक्रम को लेकर नाराजगी उभरकर सामने आया, जबकि प्रखंड प्रमुख व् कई मुखिया ने जिला प्रशासन पर अनदेखी का आरोप लगाया गया।

जानकारी के अनुसार बैठक में शामिल सांसद व् विधायकगणों द्वारा पूर्व में डीएमएफटी के तहत किए गए कार्यों में नियमों की अनदेखी करने की बात कहीं गई। उपायुक्त सह परिषद के अध्यक्ष ने कहा कि पूर्व में किए गए सभी कार्यों की जांच/ऑडिट/सीएजी ऑडिट/सोशल इंम्पैक्ट ऑडिट कराई जा रही है। जांच में जो भी तथ्य सामने आएगा, उसकी रिपोर्ट कार्रवाई के लिए सरकार को प्रेषित की जाएगी। उपायुक्त ने कहा कि सोशल ऑडिट में जन प्रतिनिधिगण, पंचायत प्रतिनिधिगण भी शामिल होंगे।

उन्होंने बैठक में उपस्थित अधिकारियों को कहा कि कार्यों का निष्पादन नियम के तहत होगा। अगर कहीं कोई गड़बड़ी पाई जाती है, तो संबंधित पदाधिकारी को चिन्हित करते हुए दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने सभी सदस्यों को सरकार द्वारा जारी अद्यतन दिशा निर्देश डीएमएफटी के तहत उपलब्ध राशि की खर्च करने/कौन सी योजनाओं को लिया जा सकता है की जानकारी दी। कहा कि डीएमएफटी की राशि खनन प्रभावित पंचायत क्षेत्रों (प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से) में ही किया जाना है। राशि का व्यय, प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित क्षेत्रों में स्थित खदानों से जिस अनुपात में राशि का संग्रहण किया गया है, उसी आनुपातिक आधार पर किया जाएगा।

बैठक में तैयार रिपोर्ट में सांसदो व् विधायकगणों ने अनुशंसित योजनाओं किनके द्वारा है, इसे स्पष्ट करने की बात कही। जिस पर अध्यक्ष सह उपायुक्त ने कहा कि 15 दिनों के अंदर उन्हें इसकी विस्तृत जानकारी उपलब्ध करा दी जाएगी एवं अगली बैठक से तैयार प्रतिवेदन में ही इसका स्पष्ट उल्लेख होगा कि किनके द्वारा कौन सी योजना अनुशंसित की गई है।
बैठक में सरकार से प्राप्त दिशा निर्देश के अनुसार खनन प्रभावित क्षेत्रों (प्रत्यक्ष – अप्रत्यक्ष पंचायतों/गांवों) का बेस लाइन सर्वे कराने पर सर्वसम्मति से पारित किया गया।

साथ ही, उन क्षेत्रों का आगामी 5 वर्ष का प्रोसप्क्टिव प्लान तैयार करने का निर्णय लिया गया। वहीं, छूटे हुए पंचायतों – गांवों को प्रभावित क्षेत्रों की सूची में शामिल करने के लिए बीडीओ व् सीओ को पत्र लिखकर प्रस्ताव प्राप्त करने और उन्हें पुनः प्रबंधकीय समिति के समक्ष रखने का निर्देश दिया।
बैठक में सांसदों, विधायकगणों, प्रखंड प्रमुखों, मुखियागणों आदि द्वारा प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित क्षेत्रों के लिए योजनाओं को अनुशंसित किया गया था। सर्वसम्मति से उक्त सभी योजनाओं को ग्राम सभा से पारित कराते हुए प्रबंधकीय समिति के समक्ष प्रस्तुत करने का अनुमोदन किया गया। साथ ही, उससे सभी सदस्यों को अवगत कराने को निर्देशित किया गया।

बैठक में पेयजल एवं स्वच्छता मंत्री, गिरिडीह सांसद, धनबाद सांसद, चंदनकियारी विधायक, बेरमो विधायक, बोकारो विधायक, डुमरी विधायक, जिप सदस्यों, विभिन्न प्रखंडों के प्रमुख, विभिन्न पंचायतों के मुखिया आदि ने अपनी बात रखी।
इस अवसर पर बैठक में तल्खी को लेकर पुछे गये सवालों पर मंत्री ने बचाव करने तथा डैमेज कंट्रोल करने का प्रयास किया। वहीं बेरमो प्रखंड प्रमुख गिरिजा देवी ने प्रशासन द्वारा योजनाओं की पुर्व जानकारी नहीं दिए जाने का आरोप लगायी। जबकि, लगभग आधा दर्जन मुखिया ने अपनी बात नहीं रखने देने का आरोप जिला प्रशासन पर लगाया तथा कहा गया कि उन्हें केवल दर्शक दीर्घा में बैठाया गया था। साथ हीं जिला प्रशासन द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट में कई गड़बड़ियों की बात कही गयी।

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