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समाज की दिशा तय करते हैं साहित्यकार-चौधरी रत्नेश कुमार सुधांशु

एस. पी. सक्सेना/बोकारो। बोकारो के जनवृत पांच स्थित पुस्तकालय प्रांगण में बीएसएल तथा अखिल भारतीय चेतना दर्पण के संयुक्त तत्वाधान में बीते 27 नवंबर की संध्या काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। काव्य गोष्ठी में बोकारो महानगर के साहित्यकारों और कवियों ने भाग लिया।

इस अवसर पर साहित्यकारों और कवियों को संबोधित करते हुए कार्यक्रम के मुख्य अतिथि बीएसएल के महाप्रबंधक (संपर्क एवं प्रशासन) चौधरी रत्नेश कुमार सुधांशु ने कहा कि सदैव से साहित्यकारों के कंधे पर समाज की दिशा तय करने का दायित्व होता है, जिसे साहित्यकारों ने सफलता के साथ पूरा भी किया है। उन्होंने कहा कि समय-समय पर साहित्यकार, कवि और रचनाकार अपनी रचनाओं के माध्यम से राष्ट्र और समाज सेवा करते रहे हैं।

मौके पर कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि बेरमो के अनुमंडलाधिकारी मुकेश मछुवा ने कवियों के प्रयासों की प्रशंसा करते हुए अपनी कविता कवियों का एक सम्मेलन देखा ज्ञान कथा का सागर मंथन देखा प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि बीएसएल ने साहित्यकारों को मंच देकर अनुकरणीय कार्य किया है। विशिष्ट अतिथि सहायक प्रबंधक मानस चंद्र रजवार ने भी कवियों को संबोधित करते हुए उनके द्वारा किए जा रहे प्रयासों की सराहना की।

अध्यक्षता करते हुए अखिल भारतीय चेतना दर्पण के अध्यक्ष डॉ नरेंद्र कुमार राय ने बीएसएल को साधुवाद दिया। साथ हीं कहा कि बोकारो में रहने वाले साहित्यकारों एवं कवियों को मंच प्रदान कर रचना के क्षेत्र में सीखने- सिखाने का एक वातावरण तैयार किया गया है। इस अवसर पर सर्वसम्मति से यह आयोजन बोकारो पुस्तकालय जनवृत्त पांच के प्रांगण में प्रत्येक माह के तीसरे बृहस्पतिवार को सायं 4 से करने का निर्णय लिया गया। कहा गया कि शहरवासी इसमें सादर आमंत्रित हैं।

इससे पुर्व काव्य गोष्ठी का शुभारंभ कवि गंगेश कुमार पाठक के मधूर गायन सरस्वती वंदना विद्या वाहिणी हंस वाहिनी माँ शारदे वर दे वर दे से माहौल को भक्तिमय किया गया। कस्तुरी सिन्हा ने काव्य गोष्ठी का संचालन किया। उनकी कविता दायरों में बंध कर जिंदगी कही न रह जाए, डॉ आशा पुष्प की आवाज मेरे दिल की, गीता कुमारी गुस्ताख की मेरे यादों के पन्नों में, डॉ रेणुका सिन्हा की मानवता का अमर संदेश, अमृता शर्मा की जब राम रोये गाकर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया गया।

साथ हीं गंगेश कुमार पाठक का हास्य व्यंग्य इ जूनि बुझी मुन्ना झुठ बजै छी, सुनकर श्रोतागण लोट पोट हो गये। पद्मावती कोमल की वर्तमान समाज ने सामाजिक समसामयिक स्थति को उजागर किया। ऋचा प्रियदर्शनी की मैं बेटी हूँ, लव कुमार की पेंसिल की आत्मा, कृपा नंद सिन्हा की भगवान तू ना बदला, करुणा कलिका की छूपा कर नजर से नजर देखियेगा, रिंकू गिरि रतन की हास्य बेटी बचाओ बेटी पढाओ, संजू गिरि की मंजील रास्ता देख रही है, सुप्रिया कुमारी सरस की रिसते हुए रिश्ते गाकर वातावरण को गंभीर बनाया।

वहीं राबिया की बचपन, सोनी कुमारी की सात फेरे ने भी अमिट छाप छोड़ा।मौके पर सहायक प्रबंधक आर के सिंह, एम के अभिमन्यु, राजू बाउरी, प्रकाश कुमार, विक्रम व् अन्य उपस्थित थे। अंत में लव कुमार ने सभी धन्यवाद ज्ञापित किया।

 

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