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भारत-दक्षिण अफ्रीका मैच एक सुनियोजित टिकट लूट महोत्सव-विजय शंका नायक

एस. पी. सक्सेना/रांची (झारखंड)। झारखंड की राजधानी रांची में भारत बनाम दक्षिण अफ्रीका मैच नहीं, बल्कि यह एक सुनियोजित टिकट लूट महोत्सव है। रांची में क्रिकेट प्रेमियों के साथ धोखा किया गया है। यह खेल नहीं, लूट का कारोबार है। इडी और सीबीआई इसकी जाँच करे।

उपरोक्त बाते 27 नवंबर को आदिवासी मुलवासी जनाधिकार मंच के केन्द्रीय उपाध्यक्ष विजय शंकर नायक ने कही। उन्होंने कहा कि रांची के झारखंड स्टेट क्रिकेट एसोसिएशन (जेएससीए) इंटरनेशनल स्टेडियम में आगामी 30 नवंबर को होने वाले भारत बनाम दक्षिण अफ्रीका पहले ओडीआई मैच ने झारखंड के क्रिकेट जगत को पूरी तरह हिला दिया है।

जहां एक तरफ क्रिकेट प्रेमी उत्साह से भरे हैं, वहीं टिकट बिक्री की अव्यवस्था, कालाबाजारी और अमानवीय नीतियों ने (झारखंड क्रिकेट एसोसिएशन) की साख पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। दर्शकों के आरोप बताते हैं कि यह मैच नहीं, बल्कि एक सुनियोजित टिकट लूट महोत्सव है। इसके पीछे जेसीए के शीर्ष पदाधिकारियों की मिलीभगत की आशंका है।
नायक ने कहा कि टिकट की व्यापक कालाबाजारी से अध्यक्ष-उपाध्यक्ष पर सीधी उंगली उठ रहा है, जिससे वे अपनी जिम्मेवारी से नहीं बच सकते।

टिकट ब्लैक में 3 से 5 गुना अवैध वसूली में पुलिस के सामने बिक रहा था और ऑनलाइन टिकट मिनटों में गायब हो गए थे। काउंटर पर पहुंचो तो सोल्ड आउट, लेकिन बाहर ब्लैक मार्केट में ₹1,600 का टिकट ₹4,000 से ₹5,000 में और ₹2,200 का ₹4,000 में बिक रहा था। क्रिकेट प्रेमियों ने आरोप लगाया कि जेसीए के टॉप अधिकारी चुप नहीं, बल्कि इस खेल के सूत्रधार थे। ब्लैकर्स ने मजदूरों और ग्रामीण महिलाओं को 300 रुपये दिहाड़ी पर लाइन में खड़ा कर टिकट खरीदवाए और मुनाफा कमाया।

क्या यह सिस्टम की गलती है या मिलीभगत? जेसीए की मॉनिटरिंग टीम कहां सो रही है? जिसका जवाब झारखंड की जनता मांग रही है। नायक ने आक्रोश भरे शब्दों में कहा कि गोद के मासूमों पर टिकट का बोझ ने इंसानियत की हद पार कर दिया है। एक महीने के बच्चे तक को नहीं छोड़े गये। जेसीए की नीति ने मानवता को शर्मसार कर दिया है। गोद में बच्चा हो या एक महीने का शिशु, हर किसी को पूरा टिकट चाहिए। यह साफ साफ जेब काटने का नीति है।

यह शायद देश में पहली बार लागु किया गया था। पहली बार ऐसी अमानवीय पॉलिसी, थी जिसकी वे कड़े शब्दों में तीव्र भर्त्सना करते है। उन्होंने कहा कि बाहर निकले तो नया टिकट: रि-एंट्री बंद, जनता का खून निचोड़ने का खेल है। स्टेडियम से पानी पीने, खाना खाने या शौच के लिए बाहर निकले, तो वापस आने के लिए नया टिकट खरीदो। जेसीए की यह नीति दर्शकों को सुविधा नहीं, बल्कि परेशानी दे रही है। एक टिकट सिर्फ एक एंट्री की अनुमति क्या यह प्रबंधन का लक्ष्य है या लूट का बहाना है।

नायक ने कहा कि वर्ष 2013 से ही टिकट की कालाबजारी की शुरुआत की गई थी और आज भयावह रूप देखने को मिल रहा है। उन्होंने कहा कि इस कालाबजारी का मास्टरमाइंड कौन है? अध्यक्ष तथा उपाध्यक्ष को जवाब देना होगा। आखिर टिकट कहां गायब हो गये? ब्लैकिंग का अड्डा किसके संरक्षण में? बच्चों पर टिकट की घटिया नीति किसकी? रि-एंट्री रोक किसकी साजिश? स्टेडियम में अराजकता क्यों? जनता को अब मूर्ख बनाना बंद कीजिये। स्पष्ट रूप से कहता हूं कि रांची में क्रिकेट प्रेमियों के साथ धोखा हुआ है।

यह खेल नहीं, लूट का कारोबार है। वे मांग करते है कि जेसीए अध्यक्ष-उपाध्यक्ष से तत्काल जवाब तलब किया जाये। साथ हीं टिकट ब्लैकिंग पर उच्चस्तरीय जांच सीबीआई और इडी से हो। जिम्मेदारों पर कड़ी कार्रवाई है।बच्चों से टिकट वसूली नीति रद्द करो। रि-एंट्री प्रतिबंध खत्म करना होगा।

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