अवध किशोर शर्मा/सारण (बिहार)। सारण जिला के हद में सोनपुर में लगने वाला विश्व प्रसिद्ध हरिहरक्षेत्र पशु मेला का बैल बाजार देश ही नहीं, बल्कि दुनिया का सबसे बड़ा बैल बाजार रहा है।
वर्ष 1920 से 1955 एवं वर्ष 1990 से 1998 तक के आंकड़े बताते हैं कि इस दौरान मेला के दोनों बैल बाजारों की स्थिति कुल मिलाकर ठीक – ठाक थी। बैलों की खूब खरीद – बिक्री होती थी। किसान सुदूर क्षेत्रों से बैल खरीदने एवं बेचने यहां आते थे। बैल गाड़ी के साथ बैलों की जोड़ी जब कतारबद्ध होकर बैल बाजारों में पहुंचता तो मेला दर्शक देखते रह जाते। मेला में बैलो के पैरो में लगे घुंघरुओं की आवाज वातावरण को गुंजायमान कर बरबस दर्शकों को अपनी ओर खींचने में समर्थ होती थी।
अब उस दौर के कुछ आंकड़ों पर नजर डालें तो वर्ष 1920 से 1955 तक के मेले में कुल 12, 46,421 बैलों का आगमन हुआ था। जबकि वर्ष 1990 से 1998 तक के आंकड़े बताते हैं कि इस दौरान मेले में 3,75,741 बैल बिक्री के लिए लाए गए थे। इसके बाद प्रत्येक वर्ष धीरे -धीरे बैल बाजारों में बैलों का आगमन कम होने लगा। वर्ष 1998 के मेले में 13 दिनों के भीतर मात्र 12,373 बैल लाये गये थे।
वर्ष 1920-1930 तक के सरकारी आंकड़ों पर नजर डालें तो इस अवधि में 3,63, 300 बैल और बछड़े बिक्री के लिए लाये गये थे। वर्ष 1931-1940 के मेले में 289,077, वर्ष 1941 -1950 में 3,33000, वर्ष 1951 में 50000, वर्ष 1952 में 50850, वर्ष 1953 में 47,050, वर्ष 1954 में 45,094 तथा वर्ष 1955 में 58094 बैल और बछड़े मेले में बिक्री के लिए लाये गये थे।
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