रेड क्रास बोकारो को रक्त संग्रह व् डिसट्रिब्यूसन को हाइटेक करने का दिया निर्देश
एस. पी. सक्सेना/बोकारो। बोकारो जिला उपायुक्त (डीसी) अजय नाथ झा ने 28 अक्टूबर को जिले में संचालित विभिन्न ब्लड बैंकों (सदर अस्पताल, रेड क्रास बोकारो, बोकारो जनरल अस्पताल एवं केएम मेमोरियल अस्पताल) का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने रक्त संग्रहण की प्रक्रिया, भंडारण क्षमता, रख-रखाव व्यवस्था, रक्त वितरण प्रणाली एवं सुरक्षा मानकों का बारीकी से अवलोकन किया।
इस अवसर पर डीसी ने संबंधित अधिकारियों से रक्त की गुणवत्ता जांच के मानकों, कोल्ड चेन व्यवस्था, रिकॉर्ड प्रबंधन तथा ब्लड डोनर रजिस्ट्रेशन की अद्यतन स्थिति की जानकारी ली। इसी क्रम में रेड क्रास में अव्यवस्था देख तत्काल प्रभाव से डॉ मैथिली को रेड क्रास का प्रभारी प्रतिनियुक्त किया।
निरीक्षण के उपरांत डीसी अजय नाथ झा ने गोपनीय शाखा कार्यालय कक्ष में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की।
बैठक में सिविल सर्जन डॉ ए. बी. प्रसाद, सदर अस्पताल उपाधीक्षक डॉ एन पी सिंह, सहायक जनसंपर्क पदाधिकारी अविनाश कुमार सिंह, विभिन्न अस्पतालों के प्रतिनिधि, रेड क्रॉस बोकारो के सचिव एवं अन्य संबंधित पदाधिकारी उपस्थित थे। बैठक में डीसी ने निर्देश दिया कि सभी ब्लड बैंक अपने कार्य में निर्धारित मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करें।
उन्होंने कहा कि अगले 5 दिनों में जिले के सभी ब्लड बैंकों का ऑडिट कराया जाए तथा ऑडिट रिपोर्ट उनके कार्यालय एवं विभाग को समर्पित किया जाए। निरीक्षण के दौरान डीसी ने रेड क्रॉस सोसाइटी बोकारो को रक्त संग्रहण और वितरण प्रक्रिया को तकनीकी रूप से अधिक सक्षम एवं आधुनिक बनाने का निर्देश दिया। कहा कि रेड क्रॉस ब्लड बैंक/सेंटर एवं सदर अस्पताल में एनएटी (नुक्लेक एसिड टेस्टिंग) मशीन का शीघ्र अधिष्ठापन किया जाए।

उक्त मशीन के माध्यम से रक्त की जांच और अधिक सटीक एवं सुरक्षित हो सकेगी, जिससे संक्रमण जनित बीमारियों के खतरे को न्यूनतम किया जा सकेगा। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिया कि किसी भी परिस्थिति में रैपिड किट से रक्त की जांच नहीं की जाए। जब तक एनएटी मशीन का अधिष्ठापन नहीं होता, तब तक केवल ईएलआइएसए पद्धति से ही रक्त की जांच की जाए, ताकि रक्त की गुणवत्ता एवं सुरक्षा सुनिश्चित रह सके।
डीसी ने निर्देश दिया कि जिले में संचालित सभी मान्यता प्राप्त निजी एवं सरकारी अस्पतालों की अद्यतन सूची तैयार कर प्रत्येक ब्लड बैंक में प्रमुख स्थान पर प्रदर्शित की जाए, ताकि आमजन के साथ ही साथ ब्लड बैंक कर्मियों को जानकारी मिल सके कि कौन-कौन से अस्पताल रक्तदान एवं रक्त प्राप्ति के लिए अधिकृत हैं। उन्होंने कहा कि प्रोफेशनल डोनरों की पहचान कर उनकी सूची भी तैयार कर ब्लड बैंकों/सेंटरों को रखने को कहा। ताकि, उनकी पहचान सुनिश्चित हो सके।
इस कदम से रक्तदान प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ेगी और अनैतिक गतिविधियों पर अंकुश लगेगा। डीसी ने सिविल सर्जन डॉ ए बी प्रसाद को निर्देश दिया कि जिले में सभी थैलेसीमिया पीड़ित बच्चों की अद्यतन सूची तैयार की जाए तथा उन्हें नियमित रक्त की उपलब्धता सुनिश्चित करने हेतु संबंधित ब्लड बैंकों को आवंटित किया जाए। उन्होंने कहा कि ऐसे बच्चों को समय पर रक्त उपलब्ध कराना जिला प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है। इस दिशा में समन्वित कार्य योजना बनाकर कार्य किया जाए।
डीसी ने सिविल सर्जन को निर्देश दिया कि वे एक विशेष जांच टीम गठित करें, जो प्रत्येक सप्ताह जिले के किसी एक मान्यता प्राप्त अस्पताल या ब्लड बैंक का औचक निरीक्षण करें। निरीक्षण में ब्लड बैंक की कार्यप्रणाली, रक्त की गुणवत्ता, स्टोरेज व्यवस्था और दाताओं के रिकॉर्ड, साफ – सफाई की जांच की जाएगी। उन्होंने कहा कि प्रत्येक निरीक्षण के उपरांत रिपोर्ट जिला प्रशासन को प्रस्तुत की जाए, ताकि समय पर आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाए जा सके।
बैठक के अंत में डीसी ने कहा कि रक्तदान एक महान एवं मानवीय कार्य है, लेकिन इसके संचालन में वैज्ञानिक दृष्टिकोण, पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी भी परिस्थिति में रक्त की कमी से किसी मरीज का उपचार प्रभावित नहीं होना चाहिए। साथ ही, किसी भी स्तर से कोई चूक – लापरवाही नहीं होनी चाहिए। किसी को भी रक्त चढ़ाने से पूर्व क्रास जांच जरूरी है, इसके लिए एक साधारण प्रपत्र सिविल सर्जन को जारी करने को कहा।
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