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परिवहन का माध्यम ही नहीं, लोक संस्कृति व् आस्था का संवाहक भी है रेलवे

मोबाइल पर रेल यात्रियों को सुनाई पर रहा भक्ति भाव से ओत-प्रोत छठ गीत

अवध किशोर शर्मा/सारण (बिहार)। भारतीय रेल केवल परिवहन का माध्यम ही नहीं, बल्कि भारतीय लोक संस्कृति और आस्था का संवाहक भी है। यही कारण है कि छठ व्रत के अवसर पर सारण जिला के हद में सोनपुर रेल मंडल छठ मईया के गीतों से गूंज रहा है।

जानकारी के अनुसार इस बार रेलवे ने अनूठा प्रयोग करते हुए रेल यात्रियों को आवश्यक तकनीकी व्यवस्थाएं सुनिश्चित करते हुए यह व्यवस्था की है कि अब यदि कोई भी यात्री रेलवे के विभिन्न कार्यालयों अथवा पूछताछ नंबरों से संपर्क करेगा, तो उसे सामान्य कॉलर ट्यून के स्थान पर भक्ति भाव से ओत-प्रोत छठ गीत सुनाई देंगे। सोनपुर मंडल के इस पहल की रेल यात्रियों ने भी प्रशंसा की है।

रेल यात्रियों एवं रेलकर्मियों के साथ इस लोकपर्व को हर्षोल्लासपूर्वक मनाने के लिए की गई इस विशेष पहल को लगभग सभी रेल मंडल ने आवश्यक तकनीकी व्यवस्थाएं सुनिश्चित करते हुए यह व्यवस्था की है कि अब यदि कोई भी यात्री रेलवे के विभिन्न कार्यालयों अथवा पूछताछ नंबरों से संपर्क करेगा, तो उसे सामान्य कॉलर ट्यून के स्थान पर भक्ति भाव से ओत-प्रोत छठ गीत सुनाई देंगे।

सोनपुर रेल मंडल द्वारा यह अभिनव पहल यात्रियों के साथ छठ पूजा के सांस्कृतिक उल्लास को साझा करने का एक प्रतीकात्मक प्रयास है। इस तकनीकी व्यवस्था के माध्यम से रेलवे ने यह संदेश दिया है कि रेलवे केवल परिवहन का माध्यम ही नहीं, बल्कि भारतीय लोक संस्कृति और आस्था का संवाहक भी है।

सोनपुर मंडल के सभी प्रमुख रेलवे स्टेशनों पर छठ के पारंपरिक गीतों का हो रहा प्रसारण

ज्ञात हो कि, छठ पर्व के आरंभ से ही यथा पिछले एक सप्ताह से सोनपुर रेल मंडल के सभी प्रमुख रेलवे स्टेशनों पर छठ के पारंपरिक गीतों का प्रसारण किया जा रहा है, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय और उत्सवमय हो उठा है। स्टेशनों के होल्डिंग एरिया को भी ऐसे स्थानों के रूप में सजाया गया है जहां रेल यात्री और स्थानीय रहिवासी बैठकर छठ गीतों का आनंद ले रहे हैं और छठ मईया की आराधना में शामिल हो रहे हैं। सोनपुर मंडल प्रशासन का यह प्रयास यात्रियों में हर्ष और सांस्कृतिक जुड़ाव की भावना को और प्रगाढ़ कर रहा है।
मंडल प्रबंधन का इस बारे में कहना है कि रेलवे केवल यात्रा का साधन नहीं, बल्कि जन-जन की भावनाओं का प्रतिबिंब है। छठ जैसे लोकपर्वों के माध्यम से इस बंधन को और भी मजबूत बनाया जा रहा है।

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