नवरात्रि में देवी आराधना,कलश स्थापना व् अखंड ज्योति का विशेष महत्व-संजय
सिद्धार्थ पांडेय/चाईबासा (पश्चिम सिंहभूम)। झारखंड का लौहांचल क्षेत्र अपनी धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं के लिए जाना जाता है। इनमें पश्चिम सिंहभूम जिला के हद में बड़ाजामदा की दुर्गा पूजा विशेष पहचान रखती है।
बताया जाता है कि इस वर्ष भी श्रीश्री सार्वजनिक दुर्गा पूजा समिति फुटबॉल मैदान बड़ाजामदा में दक्षिण भारत की प्राचीन मंदिर शैली पर आधारित भव्य पंडाल का निर्माण किया गया है। समिति के संरक्षक संजय कुमार सारदा और अध्यक्ष राजेश सिंह के नेतृत्व में पदाधिकारियों एवं सदस्यों की सक्रियता से तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं।
पूजा स्थल को झूलों और आकर्षक दुकानों से सजाया व् लगाया गया है, ताकि श्रद्धालुओं के साथ-साथ आम जन भी सांस्कृतिक और पारिवारिक आनंद का अनुभव कर सकें।
ज्ञात हो कि, दशकों से सारदा परिवार इस पूजा आयोजन में अग्रणी भूमिका निभाता रहा है। पूजा कार्यक्रम 27 सितम्बर को पंचमी के दिन मां एर बोधन से शुरू किया गया। 28 सितम्बर को शाम 6 बजे षष्ठी पूजा की गयी। वहीं 29 सितम्बर की सुबह 5 बजे बोकना के कारो नदी से 108 कन्याओं द्वारा कलश शोभायात्रा निकाली जाएगी।
उसी दिन सुबह 8 बजे पूजा, 10:30 बजे पुष्पांजलि और शाम 7:30 बजे संध्या आरती होगी। 30 सितम्बर को अष्टमी पर महा संधि पूजा दोपहर 1:20 से 2:08 बजे तक विशेष आकर्षण का केंद्र रहेगी। वहीं आगामी एक अक्टूबर को नवमी पर हवन और संध्या आरती होगी। जबकि 2 अक्टूबर को दशमी के दिन दर्पण विसर्जन, अपराजिता पूजा, कलश विसर्जन और शाम को रावण दहन का आयोजन किया जाएगा। इसके बाद 3 अक्टूबर को माता रानी का जागरण (टी-सीरीज़ कलाकारों द्वारा) तथा 4 अक्टूबर को सिन्दूर खेला और प्रतिमा विसर्जन के साथ कार्यक्रम संपन्न होगा।
माता दुर्गा के प्रति अनन्य श्रद्धा के साथ भक्ति करने वाले समाजसेवी संजय कुमार सारदा ने जनकल्याण की कामना करते हुए कहा कि मां दुर्गा की असीम कृपा पूरे पश्चिम सिंहभूम जिला क्षेत्र के रहिवासियों पर बनी रही है। सबों के घर में खुशहाली एवं उत्थान मां दुर्गा प्रदान करें। कहा कि नवरात्रि में देवी आराधना, कलश स्थापना और नौ दिनों तक अखंड ज्योति जलाने का विशेष महत्व होता है।
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