केंद्र एवं राज्य सरकारें ऐसी परिस्थितियों पर लें संज्ञान
प्रहरी संवाददाता/मुंबई। झारखंड के एक ऑटो रिक्शा चालक शुभंकर पासवान ने फांसी लगाकर अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली। वह गिरिडीह जिला अंतर्गत ग्राम देवरी के निवासी थे। शुभंकर अपने परिवार की रोज़ी-रोटी के लिए हज़ारों किलोमीटर दूर मुंबई आए थे, लेकिन परिस्थितियां ऐसी बनीं कि एक युवा को असमय मौत को गले लगाना पड़ा। यह घटना केवल एक व्यक्ति की नहीं है, बल्कि यह एक गंभीर सामाजिक प्रश्न है, आखिर क्यों आज के युवा ऐसे कदम उठाने पर विवश हो रहे हैं? कहीं ऐसा तो नहीं कि आर्थिक और सामाजिक दबाव ही आत्महत्या जैसी घटनाओं को जन्म दे रहे हैं? यह समस्या अब प्रचलन का रूप लेती जा रही है, जो हमारे समाज और शासन के लिए चिंता का विषय है।
इस घटना झारखंड के प्रवासी मजदूरों को हिला कर रख दिया है। वहीं दूसरी तरफ इस घटना में झारखंडवासी परिवर्तन संघ एवं मृतक के साथियों की पहल से शुभंकर का पार्थिव शरीर उनके पैतृक गांव तक पहुंचाया गया। इस दौरान माननीय केन्द्रीय मंत्री महिला एवं बाल विकास, कोडरमा सांसद तथा जमुआ के स्थानीय विधायक ने मृतक परिवार को हर संभव सहयोग करने का आश्वासन दिया है। हालांकि खेदजनक है कि महाराष्ट्र प्रशासन की ओर से किसी प्रकार की सहायता का कदम नहीं उठाया गया। यह घटना सरकारों की नीतियों पर भी प्रश्न खड़ा करती है।
आवश्यक है कि: केंद्र एवं राज्य सरकारें ऐसी परिस्थितियां बनने ही न दें, जहां युवा इस तरह का कठोर कदम उठाने को मजबूर हों। इसके साथ ही झारखंड सरकार को विशेष पहल करनी होगी, ताकि राज्य से होने वाला पलायन रुके और युवाओं को अपने ही प्रदेश में सम्मानजनक रोजगार मिल सके। मानसिक स्वास्थ्य, रोजगार सुरक्षा और प्रवासी श्रमिकों की समस्याओं केंद्र सरकार को भी ठोस योजना बनानी होगी।
झारखंडवासी परिवर्तन संघ के फाउंडर अध्यक्ष अरविंद आर्य एवं ऑर्गनाइजिंग सेक्रेटरी मनोज कुमार का मानना है कि आज समय आ गया है जब शासन और समाज मिलकर युवाओं के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए गंभीर कदम उठाया जाए, ताकि कोई और शुभंकर अपनी जान न गंवाए। मृतक शुभंकर के पार्थिव शरीर को उसके घर तक पहुंचने में विशेष सहयोग प्रदीप साहू, सुधीर पासवान, हेमंत भाई, मनीष जायसवाल, नीलेश जायसवाल, सुरेश पासवान, दीपक पासवान आदि लोगों का रहा जिसके लिए वो साधुवाद के पात्र हैं।
Tegs: #Auto-drivers-suicide-case-question-on-the-compulsions-of-youth
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