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रस रंग द्वारा पटना के प्रेमचंद रंगशाला में पगला घोड़ा नाटक का मंचन

एस. पी. सक्सेना/पटना (बिहार)। बिहार की राजधानी पटना के राजेंद्र नगर स्थित प्रेमचंद रंगशाला में 31 अगस्त की संध्या पगला घोड़ा नाटक का मंचन किया गया। उक्त जानकारी चर्चित टीवी कलाकार सह रस रंग के मीडिया प्रभारी मनीष महीवाल ने दी।

महीवाल ने बताया कि रस रंग द्वारा बादल सरकार लिखित एवं राज कपूर निर्देशित नाटक पगला घोड़ा का सफल मंचन किया गया। जिसमें बड़ी संख्या में दर्शक शामिल हुए।
महीवाल के अनुसार नाटक पगला घोड़ा का कथासार में बादल सरकार का नाटक पगला घोड़ा एक निर्जन श्मशान घाट में जलाए जा रहे एक अज्ञात युवती के शव के इर्द-गिर्द बुना गया है, जो प्रेम में हुई असफलता के कारण आत्महत्या कर लेती है।

शराब पीते हुए उसके अंतिम संस्कार में आए चार पुरुष अपनी अतीत की प्रेम कहानियों और महिलाओं के साथ किए गए अन्याय पर चिंतन करते हैं, जबकि मृत युवती की आत्मा उनकी बातचीत सुनती है। कहानी में चारों चरित्र ने प्रेम किया है किन्तु निजी स्वार्थ, अहंकार, भीरुता, झूठी सामाजिक प्रतिष्ठा और पारिवारिक परंपरा के कारण अपने प्रेम का प्रतिकार किया है। चारो अस्वीकृत स्त्रियाँ आत्महत्या कर, इसी तरह किसी श्मशान में चिता की भेंट चढ़ चुकी हैं। चौथी लड़की वही है जो अभी जल रही है।

नाटक में उपस्थित चारों किरदार लड़की की जलती चिता को देखते हैं। चिता की आग आँखों के रास्ते उनके अन्तस्तल में उतर कर उनके द्वारा की गई अपरोक्ष हत्याओं की आत्मग्लानि और पश्चाताप की लपटों में बदल जाती है। एक भयंकर मानसिक द्वन्द इनके मन मस्तिष्क को झकझोरने लगता है।इसी मानसिक द्वंद्व की प्रतिछाया के रूप में जलती चिता से उठ कर लड़की की आत्मा सामने आती है और उन सबों के मन में छुपे रहस्यों को कुरेद – कुरेद कर बाहर निकालती है।

महीवाल ने बताया कि प्रस्तुत नाटक पगला घोड़ा को ऊपरी तौर पर वर्तमान समाज के नजरिये से देखा जाए तो ऐसा लगता है कि प्रेम में पराजित स्त्रियों ने आत्महत्या की है। किन्तु अंतरात्मा की आँख से देखने पर ऐसा लगता है कि यह पुरुष के अत्याचार, अपमान, अस्वीकार रूपी हथियारों से की गई हत्याएँ हैं। कहा कि उक्त नाटक स्त्री-पुरुष संबंधों, पितृसत्तात्मक व्यवस्था और मानवीय भावनाओं की तर्कहीनता पर केंद्रित है। जहाँ अंध प्रेम रूपी पगला घोड़ा जुनून की अनियंत्रित प्रकृति का प्रतीक है। प्रस्तुत नाटक के मंच पर स्त्री लक्ष्मी, मिली, मालती और प्रगति शर्मा, पुरुष कार्तिक (ब्रजेश शर्मा), शशि (ज़फ्फर आलम), सातु (कुणाल कुमार) हिमाद्री शशि रंजन (भानु), चांडाल सुशील देव ने उत्कृष्ट किरदार निभाया हैं।

जबकि मंच से परे नैपथ्य में ध्वनि संयोजक अजीत कुमार, वस्त्र विन्यास प्रगति शर्मा, अंकिता शर्मा, मेकअप लाडली राय, पिंकी देवी, सेट और प्रॉप्स ब्रजेश शर्मा, शशि रंजन, सेट डिजाइन प्रेमचंद महतो, सेट निर्माण सुनील शर्मा, पोस्टर डिजाइन रोमी सेन, पोस्टर डिजाइन एवं फ्लेक्स डिजाइन ज़फ्फर आलम, मीडिया प्रभारी मनीष महिवाल, प्रस्तुति नियंत्रक साहिल सिंह, मंच संयोजक कुणाल कुमार, मंच संचालन निहाल कुमार सिंह निर्मल, संयोजक शिवचंद प्रसाद गुप्ता, संरक्षक सुरेंद्र प्रसाद, मृत्युंजय कुमार, आलेख बादल सरकार, हिंदी अनुवाद डॉ प्रतिभा अग्रवाल, सहायक निर्देशक ब्रजेश शर्मा, परिकल्पना एवं निर्देशन राज कपूर द्वारा किया गया हैं।

रस रंग मीडिया प्रभारी महीवाल ने बताया कि मंच नाटक से पूर्व रणधीर कुमार लिखित तथा निशा कुमारी निर्देशित महिला हिंसा पर आधारित नुक्कड़ नाटक आख़िर कब तक की प्रस्तुति की गयी। उक्त नाटक में श्रेया राज, रिया कुमारी, पंकज कुमार, स्नेहा कुमारी, ईशा कुमारी सोनी, जिया कुमारी, अर्चना कुमारी, अंबुज कुमारी, अनीशा कुमारी, वैष्णवी कुमारी, शिवम कुमार, गैरव कुमार, पल्लवी कुमारी, सुप्रिया कुमारी, मनिषा सोनी, संजना, स्तुति ग्वालिया सिन्हा, बिकेश शाह एवं रवि कुमार ने अभिनय किया। वहीं एक सितम्बर को संध्या 7 बजे से प्रेमचंद रंगशाला राजेंद्र नगर पटना में इसी नाटक की पुनः प्रस्तुति होगी।

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