पीयूष पांडेय/बड़बिल (ओडिशा)। ओडिशा सरकार ने अगले पांच वर्षों में राज्य के शहरी क्षेत्रों में वायु प्रदूषण के स्तर को कम से कम 40 प्रतिशत तक कम करने के लिए अपने नए लॉन्च किए गए राज्य स्वच्छ वायु कार्यक्रम (एससीएपी) के तहत 150 करोड़ रुपये खर्च करने की योजना की घोषणा की है।
इसे लेकर राज्य स्तरीय वायु गुणवत्ता निगरानी समिति (एक्यूएमसी) की 10वीं बैठक में इस निर्णय की समीक्षा की गई। गौरतलब है कि राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (एनसीएपी) के अंतर्गत शामिल न होने वाले शहरों को शामिल करने के लिए एससीएसी को 5 जून को मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने लॉन्च किया था।
जारी रिपोर्टों के अनुसार, एससीएपी के पहले चरण में संबलपुर, बेरहमपुर, श्रीजगन्नाथ पुरी, पारादीप, क्योंझर, जोड़ा, बड़बिल, बोनाई, राजगांगपुर, झारसुगुड़ा, ब्रजराजनगर और बेलपहाड़ शामिल होंगे। यह कार्यक्रम शहर-स्तरीय कार्य योजनाओं, सड़क धूल नियंत्रण, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन और औद्योगिक एवं वाहन उत्सर्जन के नियमन के माध्यम से कण पदार्थ (पीएम 10 और पीएम 2.5) के स्तर को कम करने पर केंद्रित होगा।
राज्य के वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग पिछले पाँच वर्षों के निगरानी आँकड़ों का उपयोग कर इस योजना को क्रियान्वित करेगा। अधिकारियों ने बताया कि वित्त पोषण का प्रस्ताव वित्त विभाग को सौंप दिया गया है और अनुमोदन की प्रतीक्षा है। गौरतलब है कि ओडिशा पहले से ही भुवनेश्वर, कटक, राउरकेला, अनुगुल, तालचर, कलिंग नगर और बालासोर में एनसीएपी को लागू कर रहा है। इसके अनुसार, बैठक में प्रस्तुत आँकड़ों से कुछ शहरों में सुधार तो कुछ में गिरावट दिखाई दी।
वित्तीय वर्ष 2019-20 और 2024-25 के बीच कटक में पीएम 10 सांद्रता में 29 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई, उसके बाद अनुगुल 28 प्रतिशत और बालासोर 26 प्रतिशत का स्थान रहा है। इसके विपरीत, कलिंग नगर में 13 प्रतिशत, तालचेर में 12 प्रतिशत और राउरकेला में 2.7 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई। बैठक में अधिकारियों ने यांत्रिक सड़क सफाई मशीनों, बेहतर अपशिष्ट प्रबंधन और औद्योगिक उत्सर्जन को कम करने के उपायों सहित हस्तक्षेपों के माध्यम से कम प्रदर्शन करने वाले शहरों में वायु गुणवत्ता में सुधार की आवश्यकता पर बल दिया गया।
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