लोकसेवा आश्रम में चुनरी और प्रसाद भेंट कर किया गया सम्मानित
अवध किशोर शर्मा/सारण (बिहार)। हाल हीं में अपने मुल सनातन धर्म अपनाने वाली बिहार के पूर्व मंत्री स्व. इलियास हुसैन की पुत्री डॉक्टर आसमां परवीन ने श्रावणी पूर्णिमा एवं रक्षा बंधन के अवसर पर 9 अगस्त को सारण जिला के हद में सोनपुर स्थित बाबा हरिहरनाथ मंदिर, सूर्य मंदिर एवं शनि मंदिर पहुंचकर दर्शन की।
हरिहरनाथ मंदिर में जहां मंदिर न्यास की ओर से कोषाध्यक्ष निर्भय कुमार ने डॉ आसमां को चुनरी और प्रसाद भेंट कर हृदय से स्वागत किया गया, वहीं लोक सेवा आश्रम में बिहार प्रदेश उदासीन संप्रदाय के प्रदेश अध्यक्ष संत विष्णु दास उदासीन उर्फ मौनी बाबा ने अपनी मुंह बोली बेटी को रक्षाबंधन के अवसर पर गले से लगाया और वस्त्र भेंट कर सम्मानित किया।
डॉ आसमा परवीन जिन्होंने पिछले सप्ताह ही वैशाली जिला में आयोजित एक कार्यक्रम में सनातन धर्म में आने की घोषणा की थी, रक्षाबंधन पर्व के अवसर पर हरिहरनाथ मंदिर का दर्शन करते हुए लोक सेवा आश्रम में सूर्य मंदिर व शनि मंदिर में भी माथा टेका। मौके पर बड़ी संख्या में हिंदू समाज सेवियों ने आसमां का स्वागत किया।
आसमां ने बांधी हिन्दू भाइयों को राखी, लिया आशीर्वाद
डॉ आसमां ने मौनी बाबा, वरिष्ठ पत्रकार विश्वनाथ सिंह, हिंदू जागरण मंच के क्षेत्र संयोजक विनोद कुमार सिंह यादव, वैद्यनाथ सिंह, अनिल कुमार, दीनबंधु सिंह (खबरा), केदार कुमार राय, विभा देवी (मुजफ्फरपुर), प्रह्लाद कुमार पांडेय (मुजफ्फरपुर), नवल किशोर सिंह, कृष्णा प्रसाद (चिड़िया बाजार), यशवंत यादव (खरिका), दीपक कुमार (सोनपुर), विराटजी (बरबट्टा), राहुल चौधरी (सोनपुर), लाल बाबा, राजेशजी?मीना बाजार), हिंदू जागरण के पदाधिकारी एवं इस्कॉन के प्रचारक संत सीता रामेश्वर दास को राखी बांधकर सभी से आशीर्वाद लिया। इस अवसर पर हिंदू समाज ने डॉ आसमां को सुरक्षा का वचन दिया तथा जीवन के हर कदम पर समर्थन देने की घोषणा की।
डॉ आसमां प्रवीण ने लोक सेवा आश्रम मंदिर के निर्माण पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए मंदिर के निर्माण में सहयोग का संकल्प लिया। मौनी बाबा की ओर से सभी आगंतुक भक्तजनों को प्रसाद खिलाया गया तथा प्रत्येक आगंतुक को मंदिर का दिया गया। मौके पर हिंदू जागरण के क्षेत्र संयोजक विनोद कुमार सिंह यादव ने कहा कि डॉ आसमां का सनातन धर्म में आना एक ऐतिहासिक कदम है। उन्होंने हिंदू समाज द्वारा उन्हें आत्मसात् करने की घोषणा को इतिहास का स्वर्णिम क्षण बताया।
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