पीयूष पांडेय/बड़बिल (ओडिशा)। ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी क्योंझर जिले के अपने पैतृक गाँव रायकला लौट आए और पारंपरिक पूजा-अर्चना के बाद अपने पुनर्निर्मित पारिवारिक घर में प्रवेश किया। टाइलों व् छत वाला यह साधारण सा घर, जो वर्षों से जीर्ण-शीर्ण हो गया था, अब बुनियादी मरम्मत के साथ बहाल कर दिया गया है।
अपना पदभार ग्रहण करने के बाद यह मुख्यमंत्री की पहली घर वापसी है। इस अवसर पर स्थानीय ग्रामीणों ने भावुक प्रतिक्रिया व्यक्त की। उनकी दादी घर के प्रवेश द्वार पर बैठी दिखाई दीं, जबकि दर्जनों ग्रामीण रहिवासी मुख्यमंत्री माझी का स्वागत करने और प्रतीकात्मक गृह प्रवेश समारोह देखने के लिए उत्सुकता से इंतज़ार कर रहे थे।
किसी आलीशान हवेली से कोसो दूर, यह पैतृक घर मुख्यमंत्री की साधारण जड़ों को दर्शाता है। स्थानीय रहिवासियों ने बताया कि विधायक रहते हुए भी माझी ने कभी निजी लाभ को प्राथमिकता नहीं दी और हमेशा अपने निर्वाचन क्षेत्र की समस्याओं के समाधान पर ध्यान केंद्रित किया। एक स्थानीय रहिवासी ने कहा कि सीएम बनने से पूर्वकाल से हमेशा से माझी एक जननेता रहे हैं। वे एक ऐसे व्यक्तित्व है जो हमारे संघर्षों से गहराई से जुड़े हैं।
मुख्यमंत्री बनने के बाद भी माझी ने इसी दृष्टिकोण को जारी रखा है। अपने क्योंझर दौरे के दौरान ग्रामीणों से सीधे बातचीत की और उनकी समस्याओं को सुना। एक भव्य आवास बनाने के बजाय, अपने पुराने पारिवारिक घर की मरम्मत करने के उनके फैसले को सादगी और जनसेवा के एक सशक्त संदेश के रूप में देखा जा रहा है। एक अन्य ग्रामीण ने कहा कि जिस तरह से सीएम निजी सुख-सुविधाओं से ज़्यादा यहां के रहिवासियों की समस्याओं को महत्व देते हैं, यह उन्हें सबसे अलग बनाता है। देश में ऐसा मुख्यमंत्री दुर्लभ है। मुख्यमंत्री माझी की रायकला वापसी ने न केवल उनकी जड़ों को पुनर्जीवित किया, बल्कि एक ज़मीनी और सुलभ नेता के रूप में उनकी छवि को भी मज़बूत किया है।
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