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प्रेमचंद के साहित्य में तत्कालीन समय व् समाज का चरित्र बोलता है-सुरेन्द्र मानपुरी

अवध किशोर शर्मा/सारण (बिहार)। कोई भी लेखक अपने समय के यथार्थ से कट कर लोकप्रिय नहीं हो सकता और न उसकी रचनाओं में आम आदमी की दर्द भरी तस्वीर उभर सकती है। प्रसिद्ध साहित्यकार अमृत राय (प्रेमचंद) के साहित्य में तत्कालीन समय और समाज का चरित्र बोलता है।

यह विचार सारण जिला के हद में सोनपुर स्थित कविता स्मृति अगस्त क्रांति संग्रहालय के सभागार में 31 जुलाई को शहीद महेश्वर स्मारक संस्थान के तत्वावधान में प्रेमचंद और भारतीय किसान विषयक गोष्ठी में प्रसिद्ध साहित्यकार व् पत्रकार सुरेंद्र मानपुरी द्वारा व्यक्त किए गए।

गोष्ठी में हिंदी के सुप्रसिद्ध कवि चंद्रबिंद, वैशाली महिला महाविद्यालय के हिंदी विभाग की प्रोफेसर अनीशा, साहित्यकार सीताराम सिंह, डॉ केकी कृष्णा आदि ने प्रेमचंद साहित्य के कई महत्वपूर्ण पहलुओं पर गंभीर चर्चा की। गोष्ठी की अध्यक्षता क्षेत्र के वरिष्ठ पत्रकार एवं साहित्यकार सुरेन्द्र मानपुरी ने की।

इस गोष्ठी में एक महत्वपूर्ण बात यह आई कि भारतीय ग्रामीण जीवन का वह अर्थशास्त्र आज भी किसी न किसी रूप में कायम है। जिसमें कहा गया था, कि भारतीय किसान कर्ज में ही जन्म लेते, कर्ज में ही पलते-बढ़ते और कर्ज में ही मर जाते हैं। प्रगतिवादी विचारधारा के लेखकों के बारे में अच्छी समझ रखने वाले जयप्रकाश ने गोष्ठी का संचालन किया। संस्थान के अच्युत नंदन ने अंत में धन्यवाद ज्ञापन किया।

 

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