Advertisement

एक निश्छल संत थे स्व. बाबा राम दास उदासीन-संत मौनी बाबा

पुण्यतिथि पर होगा सुन्दर काण्ड पाठ का आयोजन

अवध किशोर शर्मा/सारण (बिहार)। बिहार प्रदेश उदासीन महामंडल के अध्यक्ष एवं सारण जिला के हद में सोनपुर स्थित लोकख्याति प्राप्त लोकसेवा आश्रम के महंत संत विष्णु दास उदासीन उर्फ मौनी बाबा ने 31 जुलाई को कहा कि स्व.राम दास उदासीन एक निश्छल संत थे। अपने गुरु के आदर्शों पर चलते हुए उन्होंने लोकसेवा आश्रम की परंपराओं को अपने जीवन के आखिरी क्षण तक संजोए रखा।

संत मौनी बाबा यहां अपने लोक सेवा आश्रम में स्व.बाबा राम दास उदासीन की एक अगस्त को आयोजित होनेवाले पुण्यतिथि की पूर्व संध्या पर बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि इस खास अवसर पर लोक सेवा आश्रम में सुन्दर काण्ड पाठ का आयोजन किया जाना है। बाबा के भक्त आश्रम में जुटेंगे और उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे।

उन्होंने कहा कि इस अवसर पर भंडारा का भी आयोजन किया गया है। कहा कि उनके गुरु संत बाबा राम दास उदासीन ने लोक सेवा आश्रम एवं आश्रम के राष्ट्रीय सांस्कृतिक कला मंच की गरिमा को सदैव बढ़ाया। उस गरिमा को वे भी निरंतर बढ़ाने का प्रयास कर रहे हैं। इस आश्रम में बना सूर्य मंदिर और शनि मंदिर इस आश्रम की गरिमा को और बढ़ा रहा है। दूर – दूर से भक्त गण आ रहे हैं। उन्होंने बताया कि मंदिर परिसर में भव्य हनुमान मंदिर बन रहा है, जिसमें अष्टधातु निर्मित हनुमान जी की प्रतिमा स्थापित होगी।

ज्ञात हो कि यूपी में सरयूपारी ब्राह्मण परिवार में जन्मे संत बाबा हरि दास का बचपन का नाम जगदीश था। पटना सिटी (अब पटना साहेब) के चैनपुरा में अवस्थित महावीर स्थान के 1008 संत बाबा ज्ञान दास का आशीर्वाद ग्रहण कर उनकी प्रेरणा से वर्ष 1952 में वे हरिहरक्षेत्र सोनपुर आए। यहां पर ज्ञान दास जी के शिष्य संत बाबा रामलखन दास से काली घाट पर गुरुमंत्र लेकर उनका शिष्यत्व ग्रहण किया। इसके बाद मुजफ्फरपुर स्थित मधौल मठ भेजे गए। जहां से उन्होंने आयुर्वेदाचार्य की उपाधि प्राप्त कर 1971 में सोनपुर लौटे और आश्रम की गौरव गरिमा को बरकरार रखने में अपना सम्पूर्ण जीवन सुपुर्द कर दिया।

 

Loading

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *