पीयूष पांडेय/ बड़बील (ओडिशा)। ओडिशा सरकार राज्य के बरगढ़ जिले में स्थित प्रसिद्ध देबरीगढ़ वन्यजीव अभयारण्य में बाघ लाने की योजना बना रही है। वन विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने 29 जुलाई को जानकारी दी।
अंतर्राष्ट्रीय बाघ दिवस के अवसर पर ओडिशा में बाघों की आबादी के पुनरुद्धार के बारे में बोलते हुए, प्रधान मुख्य वन संरक्षक (पीसीसीएफ) वन्यजीव प्रेम कुमार झा ने कहा कि देबरीगढ़ वन्यजीव अभयारण्य बाघों के आगमन के लिए एक संभावित स्थल है। झा ने कहा कि हमें देबरीगढ़ वन्यजीव अभयारण्य को बाघ अभयारण्य में बदलने के लिए राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) से तकनीकी अनुमति मिल गई है।
उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने वन्यजीव अभयारण्य का अध्ययन करने और रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए एक विशेषज्ञ समिति का गठन किया है। समिति कोर क्षेत्र और बफर ज़ोन को चिह्नित करेगी, ताकि इसे बाघों का आवास बनाया जा सके। उन्होंने कहा कि प्रक्रिया पूरी होने के बाद, हम बाघों को अभयारण्य में लाने के लिए कदम उठाएँगे। बाघों का स्थानांतरण एक कठिन कार्य।
पीसीसीएफ झा ने कहा कि बाघों का स्थानांतरण एक बहुत ही कठिन प्रक्रिया है। कहा कि सत्कोसिया बाघ अभयारण्य में बाघिन सुंदरी का स्थानांतरण असफल रहा है। कहा कि पिछले वर्ष 2024 के नवंबर में दो बाघिनों जमुना और ज़ीनत को महाराष्ट्र से सिमिलिपाल टाइगर रिज़र्व (एसटीआर) लाया गया था। कहा कि अंतराज्यीय बाघ स्थानांतरण परियोजना 80 प्रतिशत सफल रही, क्योंकि ज़ीनत को झारखंड और पश्चिम बंगाल भेजा गया और फिर वापस एसटीआर में लाया गया। झा ने बताया कि अब दोनों बाघिनों को उनके अलग-अलग क्षेत्रों में सीमित कर दिया गया है।
उन्होंने बताया कि संरक्षित क्षेत्र में धारीदार शिकारियों के लिए बंद आबादी में अंतःप्रजनन एक बड़ा खतरा बनकर उभरा है। इसलिए, एसटीआर प्राधिकरण ने महाराष्ट्र से चार बाघ दो नर और दो मादा लाने का प्रस्ताव रखा था। उन्होंने कहा कि दोनों बाघिनों के व्यवहार का अध्ययन करने के बाद एसटीआर में एक और बाघ लाने के लिए कदम उठाए जाएँगे।
वन अधिकारी ने कहा कि भविष्य में सतकोसिया टाइगर रिज़र्व में बाघ लाने के लिए भी इसी तरह का कदम उठाया जाएगा, जहाँ वर्तमान में कोई बाघ नहीं है। ज्ञात हो कि, वर्ष 2018 में ओडिशा सरकार ने सतकोसिया टाइगर रिज़र्व में बाघों के स्थानांतरण का प्रयास किया था। महावीर नामक एक बाघ को कान्हा राष्ट्रीय उद्यान से और सुंदरी नामक एक बाघिन को बांधवगढ़ राष्ट्रीय उद्यान से लाया गया था। दोनों मध्य प्रदेश में स्थित हैं और सतकोसिया में छोड़ा गया था।
शिकारियों द्वारा बिछाए गए जाल में फंसकर बाघ की मौत हो गई, जबकि ओडिशा में 30 महीने के प्रवास के दौरान कथित तौर पर दो रहिवासियों की हत्या करने के बाद बाघिन को उसके मूल निवास स्थान पर वापस भेज दिया गया। ओडिशा वन विभाग द्वारा की गई नवीनतम जनगणना के अनुसार राज्य में 30 रॉयल बंगाल टाइगर पाए गए, जिनमें से 27 सिमिलिपाल टाइगर रिज़र्व में पाए गए। अंतर्राष्ट्रीय बाघ दिवस पर प्रशंसित रेत कलाकार सुदर्शन पटनायक ने वर्ल्ड वाइड फंड फॉर नेचर-इंडिया (डब्ल्यूडब्ल्यूएफ इंडिया) के सहयोग से जगन्नाथ पुरी समुद्र तट पर 51 छोटे बाघों से घिरे 20 फुट लंबे बाघ की एक रेत मूर्ति बनाई। सेंड आर्टिस्ट पटनायक ने कहा कि वैश्विक बाघ दिवस पर डब्ल्यूडब्ल्यूएफ इंडिया के साथ मिलकर यह रेत कलाकृति बनाना हमारे लिए सम्मान की बात है, जो बाघों के हमारे जंगलों और समुदायों के साथ गहरे जुड़ाव को दर्शाती है।
उन्होंने कहा कि, अपने काम के माध्यम से मेरा उद्देश्य सह-अस्तित्व के महत्व के बारे में एक सशक्त दृश्य संदेश देना है। कहा कि बाघ केवल शक्ति का प्रतीक नहीं है, बल्कि यह हमारे पर्यावरण का रक्षक है और हमारे पारिस्थितिकी तंत्र के संरक्षक के रूप में कार्य करता है।
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