पर्यावरण को बढ़ा खतरा, महुल में समुद्री तटों की भरनी में लगा एजिस लिमिटेड
पेट्रोलियम स्टोरेज की टंकी और टर्मिनल बनाने के काम में तेजी
मुश्ताक खान/मुंबई। दशकों से यह देखा जा रहा है कि प्राकृतिक से छेड़ – छाड़ का नतीजा सिर्फ और सिर्फ तबाही है। तबाही का मंजर न केवल भारत बल्कि पूरे विश्व ने बखूबी देखा है। इसके बाद भी बारूद के ढेर पर बैठी वाशीनाका का औद्योगिक क्षेत्र में स्थित एजिस लॉजिस्टिक्स लिमिटेड द्वारा माहुल में समुद्री तटों को भरने और अपनी कंपनी के क्षेत्रफल को बढ़ाने का काम तेजी से किया जा रहा है। इससे पर्यावरण का खतरा बढ़ गया है, इसके स्याह पहलुओं के मद्देनजर मुंबई की विभिन्न सामाजिक संस्थाओं ने अदालत का दरवाजा खटखटाने की तैयारी कर ली है।
क्योंकि एजिस लिमिटेड के अधिकारियों ने यहां के वन विभाग, जिलाधिकारी, मनपा व अन्य संबंधित विभागों को खरीद लिया है। यही कारण है कि समुद्री तटों पर मिट्टी और पत्थरों की भरनी में काफी तेजी आई है और आस पास लगे मैंग्रोव की धडल्ले से कटाई चल रही है। इस मुद्दे को अणुशक्ति नगर की लोकप्रिय विधायक सना मलिक-शेख ने सदन में जोरदार तरीके से उठाया। लेकिन सरकार ने कोई संज्ञान नहीं लिया, इससे माना जा रहा है कि माहुल में एसआरए परियोजना की तरह इस मुद्दे को भी दफन किया जा सकता है।
जानलेवा है गैस और केमिकल कंपनियों का प्रदूषण
गौरतलब है कि देश की प्रमुख बहुराष्ट्रीय तेल और गैस उत्पादक कंपनियां हैं, इनमें बीपीसीएल, एचपीसीएल, आरसीएफएल, बीएआरसी, टाटा पावर और एजिस लिमिटेड है। इन कंपनियों के जहरीले गैसों से अणुशक्ति नगर और चैंबूर विधानसभा की लगभग 20 लाख आबादी परेशान होने के साथ -साथ विभिन्न जानलेवा रोगों के शिकार हैं। बावजूद इसके एजिस लिमिटेड द्वारा माहुल गांव में टाटा पावर कंपनी के पीछे केमिकल की तीसरे ब्रांच के लिए समुद्री तटों को भरने और मैंग्रोव की कटाई कर रहा है। सूत्रों की माने तो एजिस लिमिटेड भरनी के साथ -साथ पेट्रोलियम स्टोरेज की टंकी और टर्मिनल भी बनाता जा रहा है।
हालांकि यहां के नागरिक इस कंपनी का विरोध कर रहे थे, इस बीच नए ब्रांच का काम भी शुरू कर दिया। जानकार बताते हैं कि केमिकल कंपनियों के प्रदूषण से फैल रही बीमारियों से अब भी की लोग बीमार हैं। सूत्रों के अनुसार पर्यावरण विभाग की ओर से कंपनी को करोड़ों रुपए का जुर्माना लगाया जा चुका है, लेकिन इन्हें कोई फर्क नहीं पड़ा और काम जारी है।
दर्जन भर विभागों की मिलीभगत से एजिस की बल्ले बल्ले
मिली जानकारी के अनुसार वन विभाग, जिलाधिकारी, मनपा व अन्य संबंधित विभागों को खरीदने के बाद एजिस लॉजिस्टिक्स लिमिटेड के हौसले बुलंद हैं। यही कारण है कि समुद्री तटों को मिट्टी और पत्थरों से भरने के साथ -साथ मैंग्रोव की कटाई में तेजी आई है। इस कड़ी में सबसे दिलचस्प बात यह है कि एजिस लिमिटेड का फेज 1और फेज 2 यूनिट सन 1990 के पहले बना था। लेकिन फेज 3 यूनिट समुद्री तट क्षेत्र में बन रहा है, जबकि फेज 4 यूनिट भूखण क्रमांक 478 माहुल गांव में बनाने की तैयारी भी की जा रही है।

इसके लिए मुंबई और मेट्रो परियोजनाओं से निकलने वाले कचरे से समुद्री तटों को अवैध रूप से भरने का काम कंपनी द्वारा किया जा रहा है। जो कि पूरी तरह से अपराध की श्रेणी में आता है। लेकिन यहां तो संबंधित विभागों को खरीदा जा चुका है। स्थानीय नागरिकों के मुताबिक माहुल परिसर में टाटा पावर के पीछे अवैध रूप से चल रहे इस काम में छोटे बड़े नेताओं सहित छुटभैये लोगों को भी कंपनी ने खरीद रखा है।
अनुमति मिलने से पहले कर लेते हैं काम
एक अन्य जानकारी के अनुसार एजिस लॉजिस्टिक्स लिमिटेड ने इस काम को जनवरी 2024 में शुरू किया था, उन दिनों इस कंपनी के काले कारनामों की जानकारी किसी को नहीं थी। क्योंकि कंपनी परिसर में फोटोग्राफी या लोगों का आना जाना वर्जित था। हालांकि इस मुद्दे पर करीब दो माह पूर्व संवाददाता ने वन विभाग के फोरेस्ट ऑफिसर गजनंद महादेव जाधव से मुलाकात कर इस मुद्दे पर चर्चा करनी चाही लेकिन उन्होंने गोल मटोल जवाब दिया। उन्होंने यह भी कहा कि फिलहाल इस मामले की जांच की जा रही है। उस दौरान भी एजिस लिमिटेड का काम जोरों पर चल रहा था।
इस कड़ी में एक चौंकाने वाली बात यह है कि इस कंपनी द्वारा पहले काम किया जाता है, इसके बाद संबंधित विभागों से अनुमति ली जाती है। यानि की अरबों खरबों की संपत्ति को कौड़ियों के भाव, रिश्वत दे कर लिया जा रहा है।
मैंग्रोव की कटाई और समुद्री तटों की भरनी में तेजी
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार बीना सीटीएस नंबर का लगभग 3 एकड़ जमीन जो मुंबई पोर्ट ट्रस्ट का नहीं है, फिर उसने कैसे टेंडर प्रक्रिया के जरिए कैसे दिया? बताया जाता है कि एमबीपीटी ने एजिस लॉजिस्टिक्स लिमिटेड को 30 वर्षों की लीज पर कैसे दिया? सूत्रों ने दावा किया है कि टाटा पावर का सीटीएस नंबर 474 है। लेकिन पर्यावरण की तबाही, मैंग्रोव की कटाई और समुद्री तटों की भरनी करने वाली एजिस लिमिटेड द्वारा सरकारी नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।
सूत्रों का कहना है कि जनवरी वर्ष 2024 से नियमों की धज्जियां उड़ाने वाली इस कंपनी ने दो विधानसभाओं की लगभग 20 लाख नागरिकों का जीवन खतरे में डाल दिया है। अगर 26 जुले 2005 जैसी भयंकर बढ़ आई तो खुद तो डूबेगा, इस इलाके के लाखों मुंबईकरों का जीवन भी दांव पर लग जाएगी।
जनता के मुद्दे को विधायक सना मलिक शेख उठाया
इस मद्दे पर अणुशक्ति नगर विधानसभा की विधायक सना मलिक ने विधानसभा के मानसून सत्र उठाया है। विधायक सना मलिक ने कहा कि महाराष्ट्रा में बिना अनुमति के पर्यावरण से छेड़छाड़ और नियमों से खिलवाड़ करने का असर आम नागरिकों पर पद रहा है। उन्होंने कहा समुद्री इलाके में हाई टाइड और लॉव टाइड वाले इलाके में भी 1500 गाड़ी मिट्टी और शहर का सॉलिड वेस्ट कचरा से भरनी कर दिया गया है। जबकि बम्बई हाई कोर्ट ने इस स्थान को रिजर्व फॉरेस्ट व वन क्षेत्र घोषित किया है। लेकिन एजिस लिमिटेड द्वारा लगातार पेड़-पौधे वनस्पति, जल जीव की हत्या करवाया जा रहा है है। इसके अलावा स्थानीय मछुवारों को गुमराह कर मुआवजा के नाम पर ठेंगा दिया जा रहा है। बताया जाता है यह परियोजना 4 हजार करोड़ का है।
Tegs: #Umbaikar-at-stake-at-the-industrial-area-of-chembur-on-a-pile-of-gunpowder
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