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सना मलिक ने विधानसभा में ध्वनि प्रदूषण का मुद्दा उठाया

सीएम ने केंद्र सरकार से सिफारिश करने का किया वादा

मुश्ताक खान/मुंबई। पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 के तहत निर्धारित ध्वनि प्रदूषण की सीमाएं वर्तमान स्थिति में अपर्याप्त साबित हो रही हैं। इस बात को अणुशक्ति नगर विधानसभा की विधायक सना मलिक-शेख ने शुक्रवार को सदन में जोरदार तरीके से उठाया। उन्होंने धार्मिक ध्वनि प्रदूषण के मुद्दे पर चर्चा के दौरान यह महत्वपूर्ण सिफारिश करके सदन का ध्यान आकर्षित किया।

गौरतलब है कि ध्वनि प्रदूषण अधिनियम वर्ष 2000 में बनाया गया था। इसके तहत आवासीय क्षेत्रों में दिन में 55 और रात में 45 डेसिबल की सीमा निर्धारित है। जबकि व्यवसायिक क्षेत्रों में यह सीमा दिन में 65 और रात में 55 तथा औद्योगिक क्षेत्रों में दिन में 75 और रात में 70 है। हालांकि, आज यह डेसिबल सीमा पार हो गई है, इसलिए इन सीमाओं में सुधार की आवश्यकता है। यह विषय केंद्र सरकार के अधिकार क्षेत्र में आता है। इस लिए राज्य सरकार इसमें बदलाव नहीं कर सकती, लेकिन अगर राज्य में एक सर्वेक्षण कराया जाए और सर्वसम्मति से केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजा जाए, तो हम नई डेसिबल सीमा में सुधार करवा सकते हैं।

साथ ही सदन का ध्यान इस ओर भी आकर्षित कर सकते हैं कि सदन में डेसिबल सीमा 60 से ऊपर है। इस बीच, विधायक सना मलिक-शेख द्वारा उठाए गए मुद्दे का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि यह मुद्दा सही है और उन्होंने इस मुद्दे पर विस्तार से विचार करने और संशोधित सीमा के संबंध में केंद्र सरकार को सिफारिश भेजने का आश्वासन दिया।

Tegs: #Sana-owner-raised-the-issue-of-noise-pollution-in-the-assembly

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