गंगोत्री प्रसाद सिंह/हाजीपुर (वैशाली)। बिहार की राजधानी पटना को वैशाली जिला मुख्यालय हाजीपुर से जोड़नेवाले महात्मा गांधी सेतु राजमार्ग के बीएसएनल गोलम्बर हाजीपुर पर लगे 21 फीट ऊंची मालभोग केले की सजीव स्टैचू मार्ग से गुजरने वाले उत्तर बिहार के मुजफ्फरपुर सारांश दरभंगा, नेपाल के राहगीरों का बरबस मन मोह ले रहा है।
ज्ञात हो कि हाजीपुर के स्थानीय हाथसारगंज रहिवासी चित्रकार और मूर्तिकार धर्मेंद्र कुमार उर्फ डीके आजाद और उनके सहयोगियों के अथक परिश्रम से तैयार यह 21 फीट ऊंची और पांच सौ किलो वजन का माल भोग केले का स्टैचू तैयार की है, जो पूरे देश में इतनी लंबी स्टैचू केले की अभी तक नहीं बनी है। इस स्टैचू को बनाने में फाइबर ग्लास और रेसीन इत्यादि का प्रयोग हुआ है, ताकि बरसात और धूप से इसका अधिक से अधिक बचाव हो सके।
मूर्तिकार धर्मेंद्र कुमार बिहार राज्य के अलावे अन्य राज्यों में भी मूर्तिकार के रूप में जाने जाते हैं। किसान परिवार से आने वाले धर्मेंद्र ने फाइन आर्ट्स में स्नातक पटना कॉलेज से किया तथा चंडीगढ़ के फाइन आर्ट इंस्टिट्यूट से मास्टर डिग्री किया। इनकी बनाई मूर्तियां सजीवता का एहसास कराती है।
हाजीपुर क्षेत्र की केला उत्पादक के रूप में एक अलग पहचान है। यहां का प्रसिद्ध चीनिया केला पूरे देश में जाना जाता है। लेकिन स्थानीय स्तर पर माल भोग केला अपने मिठास और सुंदरता के लिए जाना जाता है। भारत सरकार ने मलभोग केले को जीआई टैग भी आवंटित किया है। परन्तु सबसे आश्चर्य की बात है कि यह केला किसी भी पूजा में भोग पर नहीं चढ़ाया जाता है। इसके पीछे की मिथक है कि भगवान श्रीकृष्ण ने इस केले की खुशबू और सुंदरता से प्रभावित होकर पेड़ से हीं इसे तोड़कर जूठा कर दिया था, तब से इसे पूजा में भोग नहीं लगाया जा रहा है।
चित्रकार और मूर्तिकार धर्मेंद्र कुमार की वर्षों से इच्छा थी कि हाजीपुर केला उत्पादक किसानों की पहचान के लिए केला का स्टेचू किसी चौक चौराहे पर स्थापित हो। हाजीपुर नगर परिषद के वर्तमान नगर सभापति संगीता कुमारी और नगर परिषद के अन्य पार्षदों के प्रयास से नगर परिषद हाजीपुर द्वारा धर्मेंद्र को उक्त मालभोग केले का स्टैचू बीएसएनल गोलंबर के समीप स्थापित करने की अनुमति दी गई।
यह स्टैचू इस वर्ष के शुरुआत में ही स्थापित हो गई, लेकिन कोई भी स्थानीय दल के राजनेता या मंत्री इस स्टैचू के उद्घाटन के लिए उपलब्ध नहीं हो सके। आखिर में स्थानीय जनता ने ही इस स्टेचू का गत माह उद्घाटन कर दिया। इस स्टैचू के वजह से केला उत्पादक किसानों की एक पहचान बनी है। एक मलभोग केले की दूसरी स्टैचू जो मेटल से तैयार हुई है उसे मूर्तिकार धर्मेंद्र ने ही बनाया है। हर कोई इस स्टैचू के बनाने वाले कारीगर की तारीफ कर रहा है।
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