सिद्धार्थ पांडेय/चाईबासा (पश्चिम सिंहभूम)। पश्चिम सिंहभूम जिला के हद में किरीबुरु के हिलटॉप टाउनशिप स्थित बाबा रत्नेश्वर शिव मंदिर में महाशिवरात्रि की रात एक अद्भुत घटना देखने सुनने को मिला, जब मंदिर परिसर में स्थित नंदी महाराज की प्रतिमा द्वारा दूध ग्रहण किया जा रहा था।
बताया जाता है कि नंदी प्रतिमा द्वारा दूध ग्रहण करने की खबर फैलते ही उक्त मंदिर में भक्तों का हुजूम उमड़ पड़ा। सोशल मीडिया और मोबाइल फोन के माध्यम से इस खबर के तेजी से वायरल होने के बाद आसपास के क्षेत्रों से श्रद्धालु विशेष पात्र में दूध लेकर मंदिर पहुंचने लगे।
कैमरों में कैद हुआ चमत्कारी दृश्य
बताया जाता है कि भक्तगण अपने-अपने तरीके से नंदी महाराज को दूध पिलाने लगे। कोई चम्मच से तो कोई छोटे पात्र से दूध अर्पित कर रहा था। हर बार चम्मच में भरा दूध नंदी महाराज के मुख के पास ले जाते ही समाप्त हो जाता, जिससे श्रद्धालु आश्चर्यचकित हो गए। इस अद्भुत दृश्य को भक्तों ने अपने मोबाइल कैमरों में कैद कर लिया और देखते ही देखते वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो गईं।
शिवरात्रि के शुभ अवसर पर हुई इस घटना ने भक्तों के मन में गहरी आस्था जगा दी। यह खबर जंगल में लगी आग की तरह पूरे क्षेत्र में फैल गई, जिसके बाद देर रात तक मंदिर में भक्तों की भीड़ लगी रही। क्षेत्र की महिलाओं और बच्चों समेत बड़ी संख्या में रहिवासी इस अलौकिक घटना के साक्षी बनने के लिए पहुंचे। मंदिर परिसर में बोल बम और हर-हर महादेव के जयकारे गूंजने लगे।
आस्था या विज्ञान? बना चर्चा का विषय
किरीबुरु के हिलटॉप टाउनशिप स्थित बाबा रत्नेश्वर शिव मंदिर में नंदी महाराज की प्रतिमा द्वारा दूध ग्रहण करने की इस घटना ने पूरे क्षेत्र में हलचल मचा दी। वैज्ञानिक दृष्टिकोण से इसे सतह तनाव (surface tension) और केशिका क्रिया (capillary action) के कारण होने वाली घटना माना जा सकता है। हालांकि, भक्त इसे भगवान शिव की कृपा और आस्था का चमत्कार मान रहे हैं। भले ही इस घटना के पीछे का धार्मिक या वैज्ञानिक कारण स्पष्ट न हो, लेकिन श्रद्धालुओं के लिए यह एक दिव्य अनुभव से कम नहीं था। महाशिवरात्रि के दिन इस अनूठी घटना ने श्रद्धालुओं के विश्वास को और मजबूत कर दिया है।
नंदी महाराज को दूध अर्पित कर भक्तगण स्वयं को धन्य महसूस कर रहे थे। इस अलौकिक घटना ने बाबा रत्नेश्वर शिव मंदिर को क्षेत्र में और अधिक प्रसिद्ध बना दिया है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि भविष्य में वैज्ञानिक दृष्टिकोण से इस पर क्या व्याख्या सामने आती है, लेकिन श्रद्धालुओं के लिए यह क्षण किसी आशीर्वाद से कम नहीं था।
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