एस. पी. सक्सेना/रांची (झारखंड)। झारखंड विधानसभा में विपक्ष का नेता घोषित नहीं किये जाने के कारण 12 संवैधानिक संस्थाओं में अध्यक्ष व् सदस्यों के खाली पदो की नियुक्ति नही होने पर भाजपा झारखंड अध्यक्ष को भी अवमानना याचिका एंव अन्य जनहित याचिकाओं में पार्टी बनाए झारखंड उच्च न्यायालय।
उपरोक्त बाते 25 फरवरी को आदिवासी मूलवासी जनाधिकार मंच के केन्द्रीय उपाध्यक्ष सह पूर्व प्रत्याशी हटिया विधानसभा विजय शंकर नायक ने झारखंड उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश को भेजे गए ईमेल में कही।
नायक ने मुख्य न्यायाधीश को भेजे ईमेल में कहा है कि झारखंड में प्रतिपक्ष का नेता भारतीय जनता पार्टी द्वारा अब तक घोषणा नही किये जाने के कारण लोकायुक्त, सूचना आयोग, मानवाधिकार आयोग एंव अन्य 12 संवैधानिक संस्थाओं में अध्यक्ष व् सदस्यों के खाली पदो की नियुक्ति झारखंड सरकार द्वारा नही किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आज सदन में झामूमो गठबंधन की सरकार है और विपक्ष मे भारतीय जनता पार्टी है।
इससे पूर्व भाजपा ने विधायक बाबुलाल मरांडी को झारखंड विधान सभा मे विपक्ष का नेता बनाया गया था, मगर किसी कारणवश वह मामला दल बदल कानुन के अन्तर्गत विवाद मे आ गया। जिसकी सुनवाई विधानसभा अध्यक्ष द्वारा पांच वर्ष बाद भी फैसला नही सुनाया गया। ना ही भाजपा नेतृत्व, आलाकमान ने कोई अन्य भाजपा विधायक को विपक्ष का नेता मनोनीत किया, जिस कारण बिना प्रतिपक्ष नेता के बगैर झारखंड विधान सभा चला। दुष्परिणाम यह हुआ कि आज तक झारखंड राज्य मे प्रतिपक्ष का नेता भाजपा द्वारा अब तक घोषणा नही किये जाने के कारण लोकायुक्त, सूचना आयोग, मानवाधिकार आयोग एंव अन्य 12 संवैधानिक संस्थाओं मे अध्यक्ष व सदस्यों के खाली पदो की नियुक्ति हो सकी।
जिसके कारण राज्य की आम जनता खासकर राज्य के सदियों से शोषित पीड़ित अधिकार से वंचित अनुसूचित जाति/जनजाति/ महिलाओ एंव अन्य पीड़ित कमजोर वर्गो को न्याय और लाभ से वंचित होना पड़ा। जिसके लिए झारखंड मे सबसे ज्यादा भाजपा नेतृत्व, आलाकमान दोषी है। क्योंकि, कुछ कुछ संवैधानिक संस्थान के पद ऐसे है जिसमे बिना प्रतिपक्ष के नेता के अनुशंसा के पद मे मनोनयन, नियुक्ति नहीं की जा सकती है।
नायक ने कहा है कि मुख्य न्यायाधीश एमएस रामचन्द्र राव व् जस्टिस दीपक रोशन की खंडपीठ से अनुरोध है कि जब तक भाजपा के झारखंड प्रदेश अध्यक्ष को अवमानना याचिका एंव अन्य जनहित याचिकाओं मे पार्टी नही बनाया जायेगा, तब तक इस याचिका से संबंधित मामलो का निष्पादन नही होगा। क्योंकि राज्य सरकार ने खंडपीठ को यह बता चुकी है कि नियुक्ति प्रक्रिया चल रही है, मगर जब तक नेता प्रतिपक्ष को लेकर कोई अधिसूचना जारी नही होगा, नियुक्ति प्रक्रिया को अंतिम रुप नही दिया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि जब तक नेता प्रतिपक्ष बनाने की दिशा मे भाजपा नेतृत्व पहल नही करेगी, तब तक सरकार इसी तरह खंडपीठ को अपना जवाब देती रहेगी और डेट पर डेट मिलता रहेगा।
समय पार होता रहेगा और आम जनता अपने संवैधानिक अधिकारों से वंचित होते रहेंगे। नायक ने कहा कि यह तो वही कहावत को इंगित करती है कि ना नौ मन तेल हाेगा ना राधा नाचेगी। ना प्रतिपक्ष नेता का मनोनयन होगा और ना ही इन संवैधानिक संस्थानो के पद भरे जायेंगें।इसलिए पुनः खंडपीठ से अनुरोध होगा कि जब तक भाजपा अध्यक्ष झारखंड को इस केस में पार्टी नही बनाया जाता तब तक समाधान नही होगा।
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